Lucknow : मुख्यमंत्री ने विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र के 30 व्यक्तियों/संस्थाओं/नियोक्ताओं एवं सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग कार्मिकों को राज्यस्तरीय पुरस्कार दिए
कार्यक्रम में दिव्यांगजनों से बातचीत का मौका मिला और उनकी काबिलियत को सम्मानित किया गया। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति में होने वाली
- अन्य पिछड़ा वर्ग के कक्षा 09 से 12 तक के 5,33,285 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति स्वीकृति प्रमाण-पत्र के क्रम में कुछ छात्र-छात्राओं को स्वीकृति प्रमाण-पत्र प्रदान किये
- कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र, शादी अनुदान योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति-पत्र वितरित किए
- मुख्यमंत्री ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद की जयन्ती पर उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी
- दिव्यांगजन किसी से कम नहीं, उनकी हिम्मत, प्रतिभा और सफलता नए भारत की शक्ति, सरकार और समाज उनके साथ मजबूती से खड़े : मुख्यमंत्री
- हमें संवेदनशील व सहायक बनते हुए दिव्यांगजन के लिए बैरियर-फ्री इण्डिया बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन ईमानदारी से करना होगा
- प्रधानमंत्री द्वारा प्रदान किया गया दिव्यांग शब्द सम्मान की नई भाषा तथा नए भारत की सोच प्रदर्शित करता
- दिव्यांगजन को स्वावलम्बन के पथ पर अग्रसर करने की दिशा में उठाया गया कदम नए भारत की सामर्थ्य प्रदर्शित करता, नये भारत में सरकार प्रत्येक व्यक्ति के स्वावलम्बन व सम्मान के लिए दृढ़संकल्पित
- सरकारी भवनों, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को बैरियर-फ्री बनाया जा रहा, प्रत्येक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को सुलभ बनाने का अभियान चलाया जा रहा
- दिव्यांगजन के कल्याण के लिए सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे
- दिव्यांग बच्चों को थोड़ा सा प्रोत्साहित किये जाने के बहुत अच्छे परिणाम आ सकते
- भारत की ऋषि परम्परा ने कभी भी शारीरिक बनावट को व्यक्ति की सामर्थ्य आंकने का माध्यम नहीं बनाया
- प्रदेश में 11 लाख से अधिक दिव्यांगजन पेंशन की सुविधा प्राप्त कर रहे, पेंशन की राशि 300 रू0 से बढ़ाकर 1,000 रू0 की गयी
- प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए अलग-अलग स्थानों पर अनेक केन्द्र स्थापित किए गए
- प्रदेश सरकार के संसाधनों से प्रथम चरण में प्रत्येक मण्डल मुख्यालय पर डी0डी0आर0सी0 की स्थापना एवं संचालन का निर्णय
- प्रदेश में दिव्यांगजन को ब्रेल लिपि व साइन लैंग्वेज का प्रशिक्षण, रैम्प, छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण, निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण आदि सुविधाओं से जोड़ा जा रहा
- कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना के अन्तर्गत दिव्यांगजन को अनुमन्य 10,000 रु0 का अनुदान बढ़ाकर 15,000 रु0 किया गया
- कॉक्लियर इम्प्लाण्ट योजनान्तर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 06 लाख रु0 का अनुदान प्रदान किया जा रहा
- आश्रयहीन मानसिक दिव्यांगजन हेतु बरेली, मेरठ, गोरखपुर, लखनऊ में 50-50 की आवासीय क्षमता युक्त राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्र संचालित
लखनऊ में विश्व दिव्यांग दिवस के मौके पर योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजनों के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले 30 लोगों, संगठनों और नियोक्ताओं को साथ ही उत्कृष्ट दिव्यांग कर्मचारियों को राज्य स्तर के पुरस्कार दिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन किसी से पीछे नहीं रहते। उनकी हौसला, काबिलियत और कामयाबी नए भारत की ताकत हैं। सरकार और समाज उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। हमें संवेदनशील और मददगार बनकर दिव्यांगजनों के लिए बाधा रहित भारत बनाने में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इस कार्यक्रम में उन्होंने 500 दिव्यांगजनों को तीन पहियों वाली साइकिल, सहायक यंत्र, दिव्यांग बच्चों को पढ़ाई की सामग्री और विशेष स्कूलों के होनहार छात्रों को टैबलेट और प्रमाण पत्र बांटे। इसके अलावा, पिछड़े वर्ग के कक्षा 9 से 12 तक के 5 लाख 33 हजार 285 छात्रों को छात्रवृत्ति की मंजूरी के प्रमाण पत्र दिए गए, जिसमें से कुछ छात्रों को खुद प्रमाण पत्र सौंपे। कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वालों को प्रमाण पत्र और शादी अनुदान योजना के लाभ पाने वालों को मंजूरी पत्र बांटे गए। कार्यक्रम से पहले, उन्होंने दिव्य कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उसका दौरा किया। उन्होंने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उनकी यादों को सलाम करते हुए श्रद्धांजलि दी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया 'दिव्यांग' शब्द सम्मान की नई भाषा और नए भारत की सोच को दिखाता है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाए गए कदम नए भारत की क्षमता को जाहिर करते हैं। नए भारत में सरकार हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी इमारतों, परिवहन और सार्वजनिक जगहों को बाधा रहित बनाया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर आसान बनाने का अभियान चल रहा है। केंद्र और राज्य सरकार दिव्यांगजनों के भलाई के लिए कई कार्यक्रम चला रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की पुरानी परंपरा ने कभी शारीरिक ढांचे को व्यक्ति की क्षमता मापने का जरिया नहीं बनाया। पूरी दुनिया ने दिव्यांगजनों की संकल्प शक्ति और आत्मविश्वास को देखा है। छोटे प्रयास से बड़ा बदलाव आ सकता है। अष्टावक्र जैसे ऋषि ने राजा जनक को ज्ञान दिया था। सूरदास जैसे संत ने अपनी विद्वता से दुनिया को रोशन किया। अगर दिव्यांग को थोड़ी सी मदद मिले, तो वह अपनी ताकत से समाज के लिए असंभव काम कर दिखाते हैं।
दिव्यांगजनों के भलाई के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री की कृपा से धन की कमी नहीं है। राज्य सरकार हर स्तर पर दिव्यांगजनों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्यांग बच्चों को थोड़ा सा हौसला देने से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव ने पैरा ओलंपिक में कई मेडल जीते हैं। चित्रकूट के मंडल आयुक्त दृष्टि बाधित होने के बावजूद आईएएस के रूप में काम कर रहे हैं। हमारी इच्छा शक्ति और आत्मबल हमारी क्षमता का प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा कि अगर हम हर व्यक्ति और जीव में ईश्वर का वास मानकर सद्भाव और सहानुभूति रखें, तो समाज में खुद को अलग महसूस करने वाले लोग मुख्यधारा से जुड़कर अपनी काबिलियत से देश और समाज को फायदा पहुंचा सकते हैं। अतीत में जिन्हें थोड़ी मदद मिली, उन्होंने अपनी ताकत से समाज को प्रेरित किया। यह काम आज भी किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों के बारे में लोगों की सोच बदली है। उन्होंने बताया कि अगर कहीं कमी है, तो ईश्वर ने उसकी भरपाई भी की है। शारीरिक रूप से कोई हिस्सा कमजोर हो सकता है, लेकिन मानसिक रूप से वह मजबूत होता है। पहले दिव्यांगजन सरकारी सुविधाओं से वंचित रहते थे। 2017 से पहले प्रदेश में करीब 8 लाख दिव्यांगजनों को सिर्फ 300 रुपये महीना पेंशन मिलती थी। अब 11 लाख से ज्यादा दिव्यांगजन पेंशन पा रहे हैं और राशि 300 से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी गई है। यह पैसा सीधे उनके खाते में जाता है।
प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए कई केंद्र बनाए गए हैं। पहले व्हीलचेयर, तीन पहियों वाली साइकिल, अंधेरे की छड़ी, सुनने की मशीन जैसी चीजें मिलना मुश्किल था। 2014 के बाद कानपुर के एलिम्को को प्रेरित कर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को मजबूत बनाया गया। अब फैसला लिया गया है कि प्रदेश सरकार के संसाधनों से पहले चरण में हर मंडल मुख्यालय पर ऐसे केंद्र बनाए और चलाए जाएंगे। इन केंद्रों से दिव्यांगजनों को सहायक यंत्रों सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
दिव्यांगजनों को ब्रेल लिपि और साइन भाषा का प्रशिक्षण, रैंप, छात्रवृत्ति, सहायक यंत्र, मुफ्त स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। उन्हें कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और सरकारी नौकरियों में मौके दिए जा रहे हैं। प्रदेश में राज्य के अधीन सेवाओं में 4 प्रतिशत और शिक्षण संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण है। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने भारत सरकार के विशेष दिव्यांगता पहचान पत्र पोर्टल पर प्रदेश के 19 लाख 74 हजार 984 दिव्यांगजनों के पंजीकरण के मुकाबले 16 लाख 23 हजार से ज्यादा कार्ड जारी किए हैं।
कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों की पेंशन 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। कृत्रिम अंग और सहायक यंत्र योजना में अनुदान 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया। स्मार्टफोन, टैबलेट, डेजी प्लेयर जैसे आधुनिक यंत्र दिए जा रहे हैं। अब तक 3 लाख 84 हजार से ज्यादा कृत्रिम अंग और सहायक यंत्र बांटे गए हैं। शल्य चिकित्सा अनुदान में राशि 8 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की गई है।
कॉक्लियर इम्प्लांट योजना में मूकबधिर बच्चों की शल्य चिकित्सा से इम्प्लांट कराया जाता है, जिससे वे सुन और पढ़ सकें। हर लाभार्थी को 6 लाख रुपये अनुदान मिलता है। अगर बच्चे का जन्म के बाद जांच शुरू करें और 5 साल की उम्र तक इम्प्लांट के साथ स्पीच थेरेपी जोड़ दें, तो वह पूरी तरह ठीक हो सकता है। इस साल प्रदेश सरकार ने 108 ऐसे बच्चों के लिए धन उपलब्ध कराया है। कार्यक्रम में उन बच्चों को सम्मानित किया गया, जो सामान्य बच्चों की तरह बात कर रहे थे।
आश्रय विहीन मानसिक दिव्यांगजनों के लिए बरेली, मेरठ, गोरखपुर और लखनऊ में 50-50 की क्षमता वाले सरकारी आश्रय गृह और प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। चित्रकूट और बांदा में ऐसे केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इस योजना से प्रदेश के 16 जिलों में 24 स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा मानसिक रूप से प्रभावित आश्रय गृह और प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं।
2017 से अब तक 6 हजार 100 से ज्यादा दिव्यांग दंपतियों को विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए हैं। 8 हजार 835 दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए धन दिया गया है। प्रदेश में 3 से 7 साल के दिव्यांग बच्चों की स्कूल तैयारी के लिए 18 मंडलीय जिलों में बचपन डे केयर सेंटर चल रहे हैं। बड़े मंडलों के आसपास के जिलों में इन सेंटरों को बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
दिव्यांग बच्चों का टीकाकरण समय पर होना चाहिए। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल बनाए गए हैं, जैसे शारीरिक रूप से प्रभावित बच्चों के लिए प्रयास स्कूल, मूकबधिर के लिए संकेत स्कूल, मानसिक रूप से चुनौती वाले के लिए ममता स्कूल और दृष्टि बाधित के लिए स्पर्श स्कूल। विभाग के 21 विशेष स्कूलों में 1 हजार 488 छात्र पढ़ रहे हैं। सरकार उनकी सभी सुविधाओं का ख्याल रखती है। उत्तर प्रदेश एकमात्र राज्य है जहां दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए दो विश्वविद्यालय पूरी तरह चलाए जा रहे हैं- शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट।
कार्यक्रम में दिव्यांगजनों से बातचीत का मौका मिला और उनकी काबिलियत को सम्मानित किया गया। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति में होने वाली दिक्कतों को दूर कर समय पर छात्रवृत्ति दी जा रही है। अब तक पिछड़े वर्ग के कक्षा 9 से 12 तक के 12 लाख 76 हजार से ज्यादा छात्रों को पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति दी गई है।
2016-17 में पिछड़े वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति और शुल्क वापसी के लिए 1 हजार 92 करोड़ रुपये से 18 लाख 83 हजार छात्रों को फायदा पहुंचाया गया था। अब 2024-25 में 2 हजार 432 करोड़ रुपये से 32 लाख 22 हजार से ज्यादा पिछड़े वर्ग के छात्रों को लाभ मिला है। 2016-17 में 11 करोड़ रुपये से 7 हजार युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2024-25 में 32 करोड़ 92 लाख रुपये से 29 हजार 769 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।
2016-17 में शादी अनुदान योजना में 141 करोड़ रुपये से 70 हजार 774 जरूरतमंदों को फायदा हुआ। अब 2024-25 में 200 करोड़ रुपये से पिछड़े वर्ग के 1 लाख गरीबों को उनकी बेटियों की शादी के लिए अनुदान दिया गया है।
कार्यक्रम को पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कुमार कश्यप ने भी संबोधित किया। इस मौके पर विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, अवनीश कुमार सिंह, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, अमरेश कुमार, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग सुभाष चंद शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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