Hardoi : अपराध रोकने के लिए गांव स्तर पर सुरक्षा समितियों का नया गठन, रात्री गश्त और जागरूकता पर जोर होगा
पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द इन समितियों का गठन पूरा करें। समिति में ग्राम प्रधान के अलावा पूर्व प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम चौकीदार और गांव के शिक्षित युवाओं को
हरदोई जिले में अपराधों को काबू करने और गांवों में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा समितियों का पुनर्गठन शुरू कर दिया है। इन समितियों के जरिए रात के समय गश्त, संदिग्धों पर नजर और स्थानीय लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का काम होगा। प्रत्येक गांव में कम से कम दस सदस्यों वाली ऐसी टीम बनाई जा रही है, जिसमें ग्राम प्रधान प्रमुख होंगे।
पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द इन समितियों का गठन पूरा करें। समिति में ग्राम प्रधान के अलावा पूर्व प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम चौकीदार और गांव के शिक्षित युवाओं को शामिल किया जा रहा है। इन सदस्यों का मुख्य काम रात साढ़े दस बजे से सुबह चार बजे तक गांव में चक्कर लगाना और चौकीदारी करना है। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को खबर करना होगा।
समितियों के अन्य दायित्वों में गांव वालों को सुरक्षा के बारे में बताना, सीसीटीवी कैमरे और रोशनी लगाने में मदद करना शामिल है। इसके अलावा, असामाजिक तत्वों की जानकारी पर पुलिस से तालमेल रखना और चौपालों के आयोजन में सहयोग देना भी इनका हिस्सा है। यह कदम सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले अपराधों को रोकने के लिए उठाया गया है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी और अन्य घटनाएं आम हो जाती हैं।
पुलिस के अनुसार, ऐसी समितियां पहले भी सक्रिय रही हैं, लेकिन अब इन्हें नई ताकत देकर सक्रिय बनाया जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था मजबूत होगी और लोग खुद सुरक्षित महसूस करेंगे। हाल ही में सांडीला थाना क्षेत्र के ग्राम मीतो में ऐसी ही एक समिति के सदस्यों के साथ रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। वहां सीसीटीवी और रोशनी की अहमियत बताई गई। सदस्यों को ड्यूटी के बारे में जानकारी दी गई और सर्दी से बचाव के लिए जरूरतमंद परिवारों को कंबल भी बांटे गए। इस चौपाल में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी, क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी मौजूद रहे।
ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह पहल उपयोगी साबित हो रही है। समितियों के सदस्यों को नियमित ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे अपराधों से निपट सकें। पुलिस का मानना है कि स्थानीय सहयोग से अपराध दर में कमी आएगी।
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