Lucknow : बाबा साहब के समरसता के विचार और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर संगोष्ठी आयोजित, वक्ताओं ने सामाजिक न्याय पर दिया जोर
मुख्य वक्ता राजकिशोर ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन ही देश की एकता को बनाए रख सकता है। उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने पाखंड का विरोध किया और हमेशा समाज को सही दिशा दिखाने
लखनऊ के बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में 'युवराष्ट्र' संस्था की ओर से एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के समरसता के विचार और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर आधारित था। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए समाज में समरसता का होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि अंबेडकर का दृष्टिकोण केवल संविधान बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सामाजिक न्याय और स्वदेशी के सिद्धांतों पर भी आधारित था।
मुख्य वक्ता राजकिशोर ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन ही देश की एकता को बनाए रख सकता है। उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने पाखंड का विरोध किया और हमेशा समाज को सही दिशा दिखाने का प्रयास किया। उनके जीवन में राष्ट्र हित सर्वोपरि रहा और उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया। राजकिशोर ने सामाजिक भेदभाव को खत्म करने की बात करते हुए भगवान राम के प्रसंगों का उदाहरण दिया और कहा कि जब ईश्वर भेदभाव नहीं करते, तो मनुष्यों को भी ऐसा नहीं करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलानुशासक प्रोफेसर रामचन्द्रा ने कहा कि अंबेडकर और सामाजिक समरसता एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संस्कार और शालीनता अपनाने का आह्वान किया। संगोष्ठी की शुरुआत प्रोफेसर भीम सोनकर ने की और कार्यक्रम का संचालन अविनाश द्वारा किया गया। इस अवसर पर भगवान सहाय, बृजनन्दन राजू, प्रोफेसर दीपा द्विवेदी और डॉक्टर राजश्री सहित कई अन्य बुद्धिजीवी और युवा उपस्थित रहे।
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