Lucknow : यूपी विधानसभा मॉनसून सत्र 2025- माता प्रसाद पांडेय के अपमान के मुद्दे पर सपा का हंगामा, सदन स्थगित
सदन में हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि माता प्रसाद पांडेय का सभी सम्मान करते हैं और उनके साथ कोई अपमा
लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र 11 अगस्त 2025 को शुरू हुआ, जो 16 अगस्त तक चलेगा। सत्र का पहला दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों के हंगामे और नारेबाजी के कारण चर्चा में रहा। सपा विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के साथ गोरखपुर दौरे के दौरान कथित अपमान और बदसलूकी का मुद्दा उठाया, जिसके चलते सदन में तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 1:20 बजे स्थगित कर दी गई और अगले दिन 12 अगस्त की सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दी गई। इस दौरान विधान परिषद की कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रही।
सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने गोरखपुर दौरे के दौरान उनके साथ हुई कथित बदसलूकी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में उनके रास्ते में बुलडोजर खड़े किए गए और जटाशंकर चौराहे तथा घंटाघर पर कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी से उन्हें खींचने की कोशिश की। पांडेय ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा, "गोरखपुर में एक गिरोह सक्रिय है, जिसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। सरकार इसकी जांच कराए।"
उनके इस बयान के बाद सपा विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। "ब्राह्मण विरोधी सरकार नहीं चलेगी" और "नेता प्रतिपक्ष का अपमान नहीं सहेगा उत्तर प्रदेश" जैसे नारे गूंजने लगे। सपा विधायकों ने माता प्रसाद पांडेय के अपमान को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर हमला बोला और कार्यवाही रोकने की मांग की।
सत्ता पक्ष का जवाब
सदन में हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि माता प्रसाद पांडेय का सभी सम्मान करते हैं और उनके साथ कोई अपमानजनक व्यवहार नहीं हुआ। खन्ना ने इसे सियासी ड्रामा करार देते हुए कहा, "नेता प्रतिपक्ष ने कल दो बैठकों में हिस्सा लिया, लेकिन वहां इस मुद्दे पर कोई शिकायत नहीं की। बिना सबूत के जांच की मांग करना गलत है।" उन्होंने विपक्ष पर बेवजह हंगामा करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में विरासत गलियारा बनाया जा रहा है, जो सपा अपने शासनकाल में नहीं कर सकी। योगी ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा, "लोकतंत्र जैसे शब्द सपा को शोभा नहीं देते। विपक्ष को सकारात्मक चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।" उनके इस बयान पर सपा विधायकों ने और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सदन का स्थगन
सपा विधायकों की लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पहले कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित किया। दोपहर 1:20 बजे के आसपास जब हंगामा नहीं थमा, तो उन्होंने सदन को अगले दिन, 12 अगस्त की सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया। हालांकि, विधान परिषद में कार्यवाही सामान्य रूप से चलती रही। सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले, 10 अगस्त को विधानसभा में विधायकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का आयोजन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की पहल पर हुआ, जिसमें आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने विधायकों को AI और चैट जीपीटी के उपयोग के बारे में बताया। सत्र में गोसाईगंज (अयोध्या) के विधायक अभय सिंह ने अपने मजाकिया सवालों से सबका ध्यान खींचा।
अभय सिंह ने चैट जीपीटी को "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी" का वैज्ञानिक स्वरूप बताया और कहा कि यह सोशल मीडिया से अधकचरी जानकारी इकट्ठा करता है, जो अक्सर गलत होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि AI ने उनकी कुंडली की गणना गलत की और कहा कि उनका राजयोग खत्म हो गया है। जब उन्होंने पंडित की जानकारी दी, तो AI ने अपनी गलती मानी। अभय सिंह ने यह भी कहा कि AI की तुलना गूगल मैप से की जा सकती है, जो कई बार गलत दिशा दिखाकर गड्ढे में गिरा देता है। उनके इन बयानों ने सदन में हंसी का माहौल बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सत्र का एजेंडा और विपक्ष की रणनीति
मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। इनमें बाढ़ संकट, किसानों को मुआवजा, स्कूलों का विलय, कानून-व्यवस्था, और उच्च शिक्षा में संशोधन शामिल हैं। 13 अगस्त को "विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश" विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर 24 घंटे की मैराथन चर्चा होगी। यह दस्तावेज़ शिक्षा, बुनियादी ढांचा, और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के विकास का रोडमैप है।
सत्र में छह अध्यादेश भी पेश किए जाएंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश 2025, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश 2025, और उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025 शामिल हैं। विपक्ष ने इन अध्यादेशों पर सवाल उठाने की तैयारी की है।
सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल कानून-व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी, और स्कूलों के विलय जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। सपा विधायक अतुल प्रधान ने सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा के बाहर कांवड़ लेकर प्रदर्शन किया और "हमें चाहिए पाठशाला, हमें नहीं चाहिए मधुशाला" का नारा लगाया। उन्होंने सरकारी स्कूलों के विलय को गरीब बच्चों के भविष्य के लिए हानिकारक बताया।
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