Lucknow : इंस्पायर-मानक योजना में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, 2.80 लाख नामांकन के साथ देश में पहला स्थान
शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेन्द्र देव ने बताया कि इस वर्ष नामांकन की प्रक्रिया 15 जून से 30 सितंबर तक चली। इस दौरान माध्यमिक विद्यालयों के अलावा बेसिक शि
उत्तर प्रदेश ने इंस्पायर-मानक योजना के तहत इस वर्ष देश में सबसे अधिक नामांकन दर्ज कराकर प्रथम स्थान हासिल किया है। कुल 2,80,747 नामांकन के साथ राज्य ने अपनी पिछली सर्वश्रेष्ठ संख्या को भी पीछे छोड़ दिया। यह योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और राष्ट्रीय नवाचार प्रतिष्ठान द्वारा चलाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना है। छात्र अपने मौलिक विचारों और समस्याओं के समाधान को ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करते हैं। चयनित छात्रों को 10,000 रुपये का पुरस्कार मिलता है, जिसका उपयोग वे अपने प्रोजेक्ट मॉडल बनाने में कर सकते हैं। इस पुरस्कार के साथ ही उन्हें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का मौका भी प्रदान किया जाता है। योजना से छात्र न केवल विज्ञान के प्रति आकर्षित होते हैं, बल्कि भविष्य में शोध और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेन्द्र देव ने बताया कि इस वर्ष नामांकन की प्रक्रिया 15 जून से 30 सितंबर तक चली। इस दौरान माध्यमिक विद्यालयों के अलावा बेसिक शिक्षा परिषद के जूनियर हाईस्कूल, कम्पोजिट स्कूल, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और केंद्रीय बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के छात्रों ने उत्साह से भाग लिया। राज्य भर में स्कूलों ने विशेष अभियान चलाए, जिसमें शिक्षकों ने छात्रों को ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग सिखाया। कई जिलों में कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां छात्रों को विचारों को प्रोजेक्ट में बदलने की ट्रेनिंग दी गई। इस प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी योजना से जुड़े, जो पहले कम भाग लेते थे। देव ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों का परिणाम है, जो छात्रों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करती है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक और राज्य सह नोडल अधिकारी विवेक नौटियाल ने विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 70,400 अधिक नामांकन हुए। 2024-25 में संख्या 2,10,347 थी, जो अब बढ़कर 2,80,747 हो गई। इस उछाल ने उत्तर प्रदेश को राजस्थान (1,41,142 नामांकन) और कर्नाटक (1,01,656 नामांकन) जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया। नौटियाल ने कहा कि यह प्रगति जिला स्तर पर समन्वय का नतीजा है। राज्य के शिक्षा अधिकारियों ने हर स्कूल से कम से कम पांच छात्रों के नामांकन का लक्ष्य रखा था, जिसे कई जगह इससे कहीं अधिक हासिल किया गया। ऑनलाइन पोर्टल inspireawards-dst.gov.in पर नामांकन आसान बनाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए थे। छात्रों को घरेलू समस्याओं जैसे पानी की कमी, कृषि सुधार या पर्यावरण संरक्षण पर विचार जमा करने को कहा गया। नौटियाल ने जोर दिया कि यह योजना छात्रों को समस्या समाधान की क्षमता सिखाती है, जो उन्हें भविष्य में उपयोगी साबित होगी।
देश के शीर्ष 50 जिलों में नामांकन के आधार पर उत्तर प्रदेश के 21 जिले शामिल हुए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या केवल 12 थी। इस उपलब्धि से राज्य का प्रदर्शन और मजबूत हुआ। प्रमुख जिलों में प्रयागराज ने 6,929 नामांकन के साथ छठा स्थान हासिल किया। लखनऊ ने 6,721 नामांकन से सातवां स्थान प्राप्त किया, जबकि हरदोई ने 6,689 नामांकन के साथ आठवां स्थान लिया। अन्य उल्लेखनीय जिलों में वाराणसी, कानपुर और आगरा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। इन जिलों में स्कूलों ने विशेष ड्राइव चलाए, जैसे छात्रों के लिए विचार प्रतियोगिताएं और शिक्षक प्रशिक्षण सत्र। प्रयागराज में स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीण स्कूलों पर फोकस किया, जिससे वहां नामांकन में भारी इजाफा हुआ। लखनऊ जैसे शहरी जिले में निजी स्कूलों की सक्रियता ने योगदान दिया। नौटियाल ने बताया कि ये जिले अब राज्य के मॉडल के रूप में अन्य जिलों को मार्गदर्शन देंगे।
इंस्पायर-मानक योजना की शुरुआत 2010 में हुई थी, लेकिन 2015 से इसे MANAK (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नॉलेज) के रूप में विस्तार दिया गया। यह योजना कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए शुरू हुई थी, लेकिन अब कक्षा 12 तक विस्तारित हो गई है। हर वर्ष देश भर से 10 लाख विचार जमा करने का लक्ष्य रखा जाता है, जिनमें से एक लाख को पुरस्कार मिलता है। योजना छात्रों को शोध संस्कृति से जोड़ती है। राष्ट्रीय नवाचार प्रतिष्ठान (NIF) योजना का संचालन करता है, जो चयनित विचारों को आगे विकसित करने में मदद करता है। कई छात्रों के विचार बाद में पेटेंट बन जाते हैं या सामाजिक उपयोग में आते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश के एक छात्र के जल संरक्षण के विचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
पिछले सात वर्षों का तुलनात्मक विवरण राज्य की प्रगति को स्पष्ट करता है। 2019-20 में नामांकन 33,134 थे, जो महामारी के कारण 2020-21 में घटकर 25,166 हो गए। 2021-22 में यह 27,108 पर पहुंचे। 2022-23 में सुधार हुआ और संख्या 31,932 हो गई। 2023-24 में 50,329 नामांकन दर्ज हुए। 2024-25 में बड़ा उछाल आया और 2,10,347 नामांकन हुए। इस वर्ष 2025-26 में 2,80,747 नामांकन के साथ रिकॉर्ड बना। यह वृद्धि राज्य सरकार के प्रयासों से संभव हुई, जैसे ऑनलाइन ट्रेनिंग और जागरूकता अभियान। शिक्षा विभाग ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DIOS) को निर्देश दिए थे कि हर स्कूल में कम से कम 5-10 विचार जमा हों।
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