Lucknow : ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का 16वां स्थापना दिवस- नारी सशक्तिकरण पर संगोष्ठी और सांस्कृतिक उत्सव

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे अटल सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति अनिल कुमार शुक्ल, विशेष अतिथि मालिनी चंद्रा (अंतरराष्ट्रीय डेटा वैज्ञानिक), मंजू सिंह (

Oct 2, 2025 - 00:11
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Lucknow : ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का 16वां स्थापना दिवस- नारी सशक्तिकरण पर संगोष्ठी और सांस्कृतिक उत्सव
Lucknow : ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का 16वां स्थापना दिवस- नारी सशक्तिकरण पर संगोष्ठी और सांस्कृतिक उत्सव

लखनऊ में स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने अपने 16वें स्थापना दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम न केवल विश्वविद्यालय की स्थापना की स्मृतियों को ताजा करने का माध्यम बना, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय, जो 2010 में स्थापित हुआ, भाषा शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक विकास पर केंद्रित है। यह राज्य का एक महत्वपूर्ण संस्थान है, जहां उर्दू, हिंदी, अरबी, फारसी और अन्य भाषाओं के पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। स्थापना के 16 वर्षों में विश्वविद्यालय ने कई नए विभाग खोले हैं और छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा देने में सफलता हासिल की है। इस दिवस पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और मातृ सम्मेलन ने नारी सशक्तिकरण को मुख्य विषय बनाया, जो मिशन शक्ति अभियान से जुड़ा था।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे अटल सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति अनिल कुमार शुक्ल, विशेष अतिथि मालिनी चंद्रा (अंतरराष्ट्रीय डेटा वैज्ञानिक), मंजू सिंह (राष्ट्रीय सेवा योजना की विशेष अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग) और पंकज शर्मा (सुरक्षा विशेषज्ञ) के साथ कुलपति अजय तनेजा ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद अतिथियों को स्वागत में पौधे और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा तैयार की गई एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म से हुई। इस फिल्म में विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक की विकास यात्रा को दर्शाया गया, जिसमें शुरुआती चुनौतियों से लेकर वर्तमान उपलब्धियों तक की कहानी को जीवंत बनाया गया। फिल्म ने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया और विश्वविद्यालय के योगदान को रेखांकित किया।संगोष्ठी का विषय था 'नारी सशक्तिकरण: सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की दिशा में कदम'। यह विषय वर्तमान समय की मांग के अनुरूप था, जहां महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना की विशेष अधिकारी मंजू सिंह ने कहा कि मिशन शक्ति कार्यक्रम के जरिए सरकार और छात्रों के सहयोग से विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने बताया कि महिलाएं परिवार को आगे बढ़ाने वाली सृजनकर्ता होती हैं, और इसी तरह मिशन शक्ति जन जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है। सिंह ने छात्रों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भाग लें, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति मजबूत हो। मिशन शक्ति उत्तर प्रदेश सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए चलाया जाता है। इस संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना और स्वरोजगार प्रशिक्षण पर चर्चा की।

विशेष अतिथि मालिनी चंद्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाएं। एक डेटा वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने बताया कि डिजिटल दुनिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, और भाषा शिक्षा से जुड़े छात्र डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में योगदान दे सकते हैं। चंद्रा ने उदाहरण दिए कि कैसे भाषाई कौशल डेटा साइंस के साथ मिलकर सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं, जैसे महिलाओं की स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी डेटा का उपयोग। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी भाषा की ताकत को आधुनिक तकनीक से जोड़ें।

सुरक्षा विशेषज्ञ पंकज शर्मा ने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति का व्यवहार ही उसकी पहचान होता है। उन्होंने नारी सम्मान पर जोर देते हुए बताया कि समाज में बदलाव तभी संभव है जब महिलाओं को सम्मान दिया जाए। शर्मा ने सड़क सुरक्षा के नियमों और कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में महिलाओं का प्रभाव अधिक पड़ता है, इसलिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक सिग्नल के पालन जैसे बुनियादी नियमों पर चर्चा की, साथ ही महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा उपायों जैसे नाइट पेट्रोलिंग और ऐप-आधारित सहायता पर बात की। यह सत्र छात्रों के लिए उपयोगी साबित हुआ, क्योंकि कई ने सवाल पूछे और अपनी जागरूकता बढ़ाई।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में स्थापना दिवस व्याख्यान शामिल था, जहां मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति अनिल कुमार शुक्ल ने भाषाई समृद्धि को राष्ट्र की शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भाषा शिक्षा से नवाचार और सामाजिक परिवर्तन संभव है। शुक्ल ने विश्वविद्यालय की यात्रा को 'नींव से नियत तक' की यात्रा कहा, जहां चुनौतियों के बावजूद प्रगति हुई है। नारी सशक्तिकरण पर उन्होंने सहयोग, भागीदारी और सम्मान के माध्यम से आगे बढ़ने की बात कही। शुक्ल ने उदाहरण दिए कि कैसे भाषा विविधता महिलाओं को सशक्त बनाती है, जैसे उर्दू साहित्य में महिलाओं की भूमिका। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों से अपील की कि वे भाषा को संरक्षण दें और इसे सामाजिक न्याय का हथियार बनाएं।

कुलपति अजय तनेजा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्प समय में शिक्षण, अनुसंधान और सांस्कृतिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हुआ है। विश्वविद्यालय भाषाई विविधता और सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। तनेजा ने गुणवत्ता शिक्षा की महत्ता बताते हुए कहा कि इससे ही विकास संभव है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विजन को परिभाषित किया और सभी को इसे अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर तनेजा ने भाषा विज्ञान और हिंदू अध्ययन विभाग सहित नए पाठ्यक्रमों की घोषणा की। साथ ही, कई संस्थानों के साथ नए समझौते (एमओयू) की भी बात कही। ये नए कोर्स छात्रों को बहुभाषी कौशल प्रदान करेंगे, जैसे डिजिटल भाषा अनुवाद और सांस्कृतिक अध्ययन। तनेजा ने बताया कि विश्वविद्यालय में 13 सेंटर फॉर एक्सीलेंस चल रहे हैं, और नए सत्र से और सेंटर शुरू होंगे।

इस वर्ष स्थापना दिवस पर पहली बार गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य के लिए शाहिद, विनीत शुक्ला, रामस्वरूप, जमना प्रसाद और राजधर मिश्रा को शॉल, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और 1100 रुपये के पारितोषिक से नवाजा गया। यह कदम कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला था, क्योंकि पहले केवल शिक्षकों को ही सम्मान मिलता था। सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। छात्रों ने गीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से विश्वविद्यालय की थीम पर आधारित कार्यक्रम पेश किए। इन प्रस्तुतियों ने सभागार में उत्सव का माहौल बना दिया। गीतों में भाषाई एकता पर जोर दिया गया, जबकि नृत्य में सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया। नाटक में नारी सशक्तिकरण की कहानी को चित्रित किया गया, जो दर्शकों को भावुक कर गया। विजयी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में उत्साह बढ़ा।

स्वागत अभिनंदन और संयोजन नलिनी मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव महेश कुमार ने किया, जबकि संचालन नीरज शुक्ल ने संभाला। कार्यक्रम में प्रथम महिला मोनिका तनेजा, डीन अकादमिक सौबान सईद, हैदर अली, चंदना डे सहित सभी प्रमुख अतिथि, विद्वान, मीडिया प्रतिनिधि, प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित थे। उनकी मौजूदगी ने समारोह को गरिमामय बनाया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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