Maha Kumbh 2025: 92 साल की उम्र में भी कमाल का जज्बा, घर बिना बताए MahaKumbh पहुंची तारा अम्मा
तारादेवी(TaraDevi) ने कहा कि वे 5 साल की उम्र से कुंभ में स्नान करने आ रही हैं और अब तक कभी भी कोई कुंभ नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि इस बार उनके बेटे ने सब्जी खरीदने जाना था, तो इस मौके ...
- वृद्ध शरीर भी नहीं तोड़ पाया हौसला, 92 साल की उम्र में भी अकेले MahaKumbh पहुंच गयी तारा अम्मा
By INA News Maha Kumbh Nagar.
आस्था और विश्वास की शक्ति इतनी गहरी होती है कि उम्र और शारीरिक स्थिति केवल संख्याएं बन कर रह जाती हैं। एक व्यक्ति जब ठान लेता है कि उसे कोई काम करना है, तो उसे किसी भी चुनौती से डर नहीं लगता। MahaKumbh 2025 में एक बुजुर्ग महिला, तारादेवी(TaraDevi), जो 1945 से हर कुंभ में स्नान करने आती हैं, का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तारादेवी(TaraDevi) अपने बेटे से छिपकर MahaKumbh पहुंची हैं। महिला ने कुंभ के प्रति अपने प्रेम और इस लंबे सफर के बारे में बताया। हालांकि उन्होंने अपनी पोती को इस बारे में बताया और उसे टिकट कराने का भी बोला। तारादेवी(TaraDevi) ने बताया कि वे इस बार 1 महीने तक कुंभ में रहेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या घरवाले चिंता करेंगे, तो उन्होंने कहा कि घरवाले जानते हैं कि वे सुरक्षित रहेंगी। 1945 से हर कुंभ में स्नान करने पहुंचती हैं। पति और बेटे को बिना बताए ही वह MahaKumbh में आ गईं। महिला का कहना है कि परिवार के लोग आने नहीं देते हैं, इसलिए वह छुपकर आ जाती है।
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बेटा-पति बोलते हैं कि अकेले जाएंगी तो बीमार हो जाएगी, गिर जाएगी या ठोकर लग जाएगी। इसलिए जब पति 9 बजे दुकान गया तो रात 11 बजे की ट्रेन पकड़कर आ गई। तारादेवी(TaraDevi) ने कहा कि वे 5 साल की उम्र से कुंभ में स्नान करने आ रही हैं और अब तक कभी भी कोई कुंभ नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि इस बार उनके बेटे ने सब्जी खरीदने जाना था, तो इस मौके का फायदा उठाकर वह कुंभ आ गईं। तारादेवी(TaraDevi) ने यह भी बताया कि उन्होंने घर में किसी से अपनी कुंभ यात्रा के बारे में नहीं बताया, केवल अपनी पोती को इसके बारे में बताया है। तारादेवी(TaraDevi) ने MahaKumbh के शाही स्नान में शामिल होने के लिए अपनी यात्रा अकेले ही शुरू की।
बिना किसी से बताए उन्होंने रात के अंधेरे में घर छोड़ा, ट्रेन पकड़ी और प्रयागराज पहुंच गईं। यहां तक कि उन्होंने फोन भी साथ नहीं लिया, क्योंकि उनकी आस्था और विश्वास उन्हें अपने उद्देश्य तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त थे। यह कोई साधारण यात्रा नहीं थी। यह एक 92 साल की वृद्धा की आस्था का प्रदर्शन था। आज ये पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। इस यात्रा के दौरान तारादेवी(TaraDevi) ने यह भी बताया कि उनकी पोती को उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बताया था, लेकिन अन्य किसी को इस बारे में नहीं बताया। यह उनके भीतर की दृढ़ता और आस्था का प्रतीक है। तारादेवी(TaraDevi) की यह यात्रा हमें सिखाती है कि अगर मन में विश्वास हो और इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि अभी तक उन्होंने बेटे से बात नहीं की है। प्रयागराज आने के लिए पोती को बोलते हैं, टिकट कटा दे और फिर आ जाती हैं।
अब अगले एक महीने वह MahaKumbh में ही रहेंगी। कुंभ ही नहीं, वह वृदांवन समेत कई मंदिरों में जाने के लिए घर से बिना बताए निकल जाती हैं। जब बेटा नहीं जाने देते तो भागकर आ जाते हैं। भागवत सुनने नहीं जाने देते हैं तो भागकर चले जाते हैं। अब जब यहां से घर जाएंगे तो बेटा रोने लगेगा। तारादेवी(TaraDevi) बोली कि किसी भी कार्यक्रम में वह भीड़ से नहीं डरती हैं।
उनके जहन में 1954 प्रयागराज कुंभ की यादें भी ताजा हैं। उस वक्त जब मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ हुई तो पिता जैसे-तैसे बचाकर ले गए थे। वहीं, जब 2003 में नासिक में कुंभ में भगदड़ मची तब भी तारादेवी(TaraDevi) मौजूद थी। हजारों तीर्थयात्री रामकुंड की तरफ बढ़ रहे थे और जब स्नान करने के वक्त भगदड़ मची तो हालात बिगड़ गए थे। महिला ने बताया कि तब वह खिड़की से कूदकर भाग गई थी। तारादेवी(TaraDevi) ने बताया कि वे इस बार 1 महीने तक कुंभ में रहेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या घरवाले चिंता करेंगे, तो उन्होंने कहा कि घरवाले जानते हैं कि वे सुरक्षित रहेंगी।
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