पूर्वोत्तर में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, असम-त्रिपुरा से 11 संदिग्ध गिरफ्तार, बांग्लादेशी कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े तार
ये लोग इमाम महमूदर काफिला (आईएमके) नामक संगठन से जुड़े थे, जो जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) का एक नया गठित ऑफशूट है। जेएमबी भारत में प्रतिबंधि
उत्तर-पूर्व भारत में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर असम और त्रिपुरा में समन्वित छापेमारी की, जिसमें कुल 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। ये गिरफ्तारियां 29 दिसंबर 2025 की रात को की गईं, और 30 दिसंबर 2025 को गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर पार्थसारथी महंत ने इसकी जानकारी दी। गिरफ्तारियां असम के बारपेटा, चिरांग, बक्सा और दरंग जिलों में की गईं, जबकि एक संदिग्ध को त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले से पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में से 10 असम के निवासी हैं और एक त्रिपुरा का है। इन संदिग्धों पर आरोप है कि वे बांग्लादेश आधारित कट्टरपंथी संगठनों के सीधे आदेशों पर काम कर रहे थे, जिनका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से असम को अस्थिर करना था।
ये लोग इमाम महमूदर काफिला (आईएमके) नामक संगठन से जुड़े थे, जो जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) का एक नया गठित ऑफशूट है। जेएमबी भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। आईएमके 2018 से सक्रिय माना जाता है और इसका वैचारिक तथा परिचालन संबंध अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) तथा अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से भी जुड़ा है। संगठन खुद को 'ग़ज़वतुल हिंद' केंद्रित चरमपंथी मॉड्यूल के रूप में प्रस्तुत करता है और प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय जिहादी संगठनों के साथ संरेखित विचारधारा का प्रचार करता है। गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर ने बताया कि बांग्लादेश में सरकार परिवर्तन के बाद जेएमबी, एबीटी और एक्यूआईएस के कई कैडर जेल से रिहा हुए या सशक्त हुए, जिससे इनके विचारों का प्रभाव और भारतीय नेटवर्क में पुनरुत्थान हुआ। आईएमके के माध्यम से भारत में इनकी गतिविधियां बढ़ीं। असम मॉड्यूल का प्रमुख नसीम उद्दीन उर्फ नजीमुद्दीन उर्फ तमीम (24 वर्ष, बारपेटा रोड निवासी) बताया गया है। दो बांग्लादेशी नागरिक उमर और खालिद को असम सेल के साथ समन्वय के लिए नियुक्त किया गया था।
गतिविधियां सुरक्षित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से समन्वित की जाती थीं। 'पुरवा आकाश' नामक एक ऐसा प्रमुख ग्रुप था, जो असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में लोगों को कट्टरपंथी बनाने, भर्ती करने, वित्तीय सहायता जुटाने और संगठन से जोड़ने के लिए काम करता था। इस ग्रुप के माध्यम से युवाओं को लक्षित किया जाता था। आईएमके नेतृत्व द्वारा लिखित कट्टरपंथी साहित्य जैसे 'सर्बोभौमो खामातार मालिक अल्लाह' और 'ग़ज़वतुल हिंद एर संक्षिप्त आलोचना' को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर व्यवस्थित रूप से प्रसारित किया जाता था। नए सदस्यों से वीडियो में निष्ठा की शपथ लेने की मांग की जाती थी, जो बांग्लादेश स्थित हैंडलर्स को भेजी जाती थी। नेटवर्क की वित्तीय व्यवस्था हवाला चैनलों, नकद संग्रह और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से चलती थी। असम और त्रिपुरा से जुटाई गई धनराशि बांग्लादेश भेजी जाती थी, जहां इसे प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स के लिए उपयोग किया जाता था। लाखों रुपये की राशि इस वित्तीय ट्रेल का हिस्सा बताई गई है। कुछ संदिग्धों के पास वैध पासपोर्ट और वीजा से बांग्लादेश जाने के रिकॉर्ड हैं, जहां वे वरिष्ठ ऑपरेटिव्स से मिले और प्रशिक्षण लिया, जिसमें बम बनाने जैसे विषय शामिल थे। अप्रैल 2025 में दो असम आधारित ऑपरेटिव्स मेघालय जाकर बांग्लादेशी हैंडलर्स से मिले थे।
गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान इस प्रकार है: असम से नसीम उद्दीन उर्फ नजीमुद्दीन उर्फ तमीम (24), जुनाब अली (38), अफराहिम हुसैन (24), मिजानुर रहमान (46), सुल्तान महमूद (40), मोहम्मद सिद्दीक अली (46), रसीदुल आलम (28), महिबुल खान (25), शारुक हुसैन (22), मोहम्मद दिलबर रजाक (26)। त्रिपुरा से जागीर मियां (33)। ये लोग विभिन्न जिलों से हैं और पूछताछ में नेटवर्क की पूरी सीमा, फंडिंग ट्रेल और सीमा-पार संबंधों का पता लगाया जा रहा है। मामले में एसटीएफ केस नंबर 06/2025 दिनांक 28 दिसंबर 2025 दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराएं और गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) 1967 की कठोर धाराएं लगाई गई हैं। असम पुलिस ने पहले भी 'ऑपरेशन प्रहार' जैसे अभियानों में जिहादी मॉड्यूल्स के खिलाफ कार्रवाई की है।
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