नोएडा में 'ऑपरेशन क्लीन' की शुरुआत: 66 उपद्रवी गिरफ्तार, प्रियंका भारती और कंचना यादव समेत चार पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले एक सप्ताह से जारी श्रमिक आंदोलन के हिंसक मोड़ लेने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस
- औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की बहाली: नोएडा पुलिस ने दर्ज किए 10 मुकदमे, बाहरी तत्वों की पहचान कर की जा रही कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले एक सप्ताह से जारी श्रमिक आंदोलन के हिंसक मोड़ लेने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 'ऑपरेशन क्लीन' का आगाज कर दिया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों, विशेषकर फेज-2 और फेज-3 के औद्योगिक क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और निजी कंपनियों में तोड़फोड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने अब तक इस पूरे प्रकरण में 10 अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की हैं, जिनमें दंगों, आगजनी और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इस कार्रवाई के तहत अब तक 66 व्यक्तियों को हिरासत में लेकर जेल भेजा जा चुका है, जिससे उपद्रवियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच और गिरफ्तारियों के बाद एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से लगभग 45 व्यक्ति ऐसे हैं जिनका संबंधित कंपनियों या श्रमिक संगठनों से कोई सीधा नाता नहीं है। ये 'फर्जी श्रमिक' बाहरी क्षेत्रों से आकर भीड़ का हिस्सा बने और उन्होंने ही मुख्य रूप से हिंसा और आगजनी को भड़काने का काम किया। पुलिस कमिश्नरेट नोएडा का मानना है कि इस सुनियोजित उपद्रव के पीछे कुछ असामाजिक तत्वों का हाथ है जो औद्योगिक शांति को भंग कर शहर की छवि खराब करना चाहते थे। पुलिस अब इन बाहरी तत्वों के मोबाइल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि उनके मूल निवास और उनके पीछे की मंशा का पता लगाया जा सके।
नोएडा पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन' केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी पूरी सक्रियता के साथ चलाया जा रहा है। साइबर क्राइम थाना की टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर रखते हुए भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव सहित चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का एक काफी पुराना और असंबंधित वीडियो साझा किया और उसे नोएडा के वर्तमान प्रदर्शन का बताकर प्रसारित किया। पुलिस का तर्क है कि इस प्रकार के वीडियो से न केवल आम जनता के बीच भय का माहौल बना, बल्कि इसने हिंसक भीड़ को और अधिक उत्तेजित करने का काम किया। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी वीडियो या फोटो को बिना सत्यता जांचे शेयर न करें। फेक न्यूज फैलाने वालों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। गलत सूचना फैलाने पर आईटी एक्ट के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग तेज कर दी है। जिन कंपनियों में तोड़फोड़ हुई है, वहां के प्रबंधन को सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, औद्योगिक संघों के साथ बैठक कर यह तय किया गया है कि भविष्य में किसी भी श्रमिक समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा, न कि सड़कों पर उतरकर। पुलिस ने साफ कर दिया है कि वैध मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। वर्तमान में संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है और पीएसी की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात की गई हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो प्रियंका भारती और अन्य द्वारा साझा किए गए थे, उनका उद्देश्य सांप्रदायिक या क्षेत्रीय तनाव को हवा देना हो सकता था। जांच अधिकारियों के अनुसार, शहडोल का वीडियो पुलिस और ग्रामीणों के बीच के संघर्ष का था, जिसे नोएडा की फैक्ट्री के अंदर की कार्रवाई बताकर पेश किया गया। साइबर विशेषज्ञों ने पाया कि इन पोस्ट्स के जरिए कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक गलत जानकारी पहुंची, जिससे पुलिस की फील्ड यूनिट्स को स्थिति संभालने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी। अब पुलिस इन सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है और उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स की विस्तृत जांच की जा रही है। नोएडा के उद्यमियों और व्यापारियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि हिंसा के कारण न केवल उत्पादन ठप हुआ, बल्कि विदेशी निवेशकों के बीच भी नकारात्मक संदेश गया। 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत अब औद्योगिक क्षेत्रों के पास स्थित अवैध झुग्गी-बस्तियों और किराएदारों का सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है। पुलिस का मानना है कि बाहरी अपराधी इन्हीं बस्तियों में छिपकर रहते हैं और प्रदर्शन के समय भीड़ का फायदा उठाकर लूटपाट करते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पास पहचान पत्र या वैध दस्तावेज नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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