UP News: यूपी से पाकिस्तानी नागरिकों को भेजा गया वापस- पंजाब में 237 लोगों को अटारी सीमा से वापस भेजा गया।
पंजाब पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से यह ऑपरेशन किया गया। इन 237 नागरिकों को पहले पंजाब के विभिन्न ....
भारत ने पंजाब के अमृतसर जिले में अटारी-वाघा सीमा के रास्ते 237 पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा। ये नागरिक विभिन्न कारणों से भारत में रह रहे थे, जिनमें ज्यादातर अवैध रूप से सीमा पार करने, वीजा उल्लंघन, और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के मामले शामिल हैं। इस कार्रवाई को भारत-पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव, विशेषकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद, एक सख्त कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
पंजाब पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से यह ऑपरेशन किया गया। इन 237 नागरिकों को पहले पंजाब के विभिन्न हिस्सों, जैसे अमृतसर, गुरदासपुर, और फिरोजपुर, से हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में 180 पुरुष, 40 महिलाएं, और 17 बच्चे शामिल थे। इनमें से कई लोग पिछले कुछ वर्षों से भारत में रह रहे थे, कुछ तो दशकों से।वापसी से पहले सभी की पहचान और दस्तावेजों की गहन जांच की गई। भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी रेंजर्स और पाकिस्तान उच्चायोग के साथ समन्वय कर इन लोगों की नागरिकता और आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि की। अटारी सीमा पर एक औपचारिक हैंडओवर समारोह आयोजित किया गया, जहां BSF ने पाकिस्तानी रेंजर्स को इन नागरिकों को सौंपा। प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू हुई और दोपहर 2 बजे तक पूरी हो गई।
- वापसी के कारण अवैध प्रवास...
इनमें से अधिकांश लोग बिना वैध वीजा या दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। कुछ लोग पर्यटक या धार्मिक वीजा पर आए थे, लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटे।आपराधिक गतिविधियां: कुछ नागरिक छोटे-मोटे अपराधों, जैसे जालसाजी, चोरी, और अवैध व्यापार, में शामिल पाए गए। हालांकि, किसी के आतंकी गतिविधियों से सीधे जुड़े होने की पुष्टि नहीं हुई। कई लोग पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर अवैध रूप से भारत में घुसे थे। कुछ मामलों में, ये लोग गलती से सीमा पार करने का दावा करते हैं, लेकिन जांच में जानबूझकर घुसपैठ की बात सामने आई।कूटनीतिक तनाव: हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें तीन पाकिस्तानी आतंकियों की संलिप्तता सामने आई, के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख अपनाया है। इस कार्रवाई को उसी का हिस्सा माना जा रहा है।
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश पर की गई। हिरासत में लिए गए लोगों को पहले अमृतसर और जालंधर के डिटेंशन सेंटर में रखा गया था, जहां उनकी स्क्रीनिंग की गई। वापसी से पहले सभी को बुनियादी सुविधाएं, जैसे भोजन, चिकित्सा जांच, और कानूनी सहायता, प्रदान की गई। कुछ लोगों ने भारत में रहने की अपील की, लेकिन उनके दावों को खारिज कर दिया गया।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "भारत अवैध प्रवास के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। सभी विदेशी नागरिकों को वैध दस्तावेजों के साथ रहना होगा।"
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन नागरिकों को स्वीकार कर लिया, लेकिन इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। पाकिस्तानी मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स में इसे "भारत का एकतरफा कदम" बताया गया। कुछ मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया कि इनमें से कुछ लोग भारत में उत्पीड़न से बचने के लिए आए थे, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई।
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अटारी सीमा के पास स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया, लेकिन कुछ ने सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण व्यापार प्रभावित होने की चिंता जताई। पंजाब में कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया और मांग की कि अवैध प्रवास को रोकने के लिए सीमा पर निगरानी और सख्त की जाए।
भारत और पाकिस्तान के बीच अक्सर ऐसी कार्रवाइयां होती रहती हैं, जहां दोनों देश एक-दूसरे के नागरिकों को वापस भेजते हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने अवैध प्रवासियों, खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वालों, के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। 2023 में भी पंजाब और राजस्थान से 150 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया था। पहलगाम हमले और सिंधु जल संधि के निलंबन जैसे हालिया घटनाक्रमों ने इस कार्रवाई को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, भारत अगले कुछ महीनों में और अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया तेज कर सकता है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से विदेशी नागरिकों की स्क्रीनिंग के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है। साथ ही, सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए BSF की तैनाती और ड्रोन निगरानी बढ़ाई जा रही है। यह कार्रवाई भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक नीति को दर्शाती है, खासकर पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच। इस घटना पर दोनों देशों के बीच आगे की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।
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