दिल्ली के रोहिणी का दर्दनाक हादसा- 800 से ज्यादा झुग्गियां खाक, 2 मासूमों की दर्दनाक मौत।

दिल्ली सरकार ने सभी झुग्गी बस्तियों में बिजली, पानी, और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट कराने का आदेश दिया है। दिल्ली फायर सर्विस ....

Apr 28, 2025 - 17:05
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दिल्ली के रोहिणी का दर्दनाक हादसा-  800 से ज्यादा झुग्गियां खाक, 2 मासूमों की दर्दनाक मौत।

Delhi Rohini Fire: बीती देर रात दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-8, विजय विहार फेज-2 की घनी झुग्गी बस्ती में भीषण आग लग गई। यह घटना रात करीब 11:20 बजे शुरू हुई और तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। आग की चपेट में आने से लगभग 800 झुग्गियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं। इस हादसे में दो बच्चों (7 वर्षीय रीना और 10 वर्षीय अजय, दोनों सगे भाई-बहन) की दम घुटने से मौत हो गई। कम से कम 12 लोग घायल हुए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है। घायलों में ज्यादातर लोग धुएं के कारण दम घुटने और जलने की चोटों से पीड़ित हैं।

प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का मुख्य कारण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बस्ती में बिजली के तार अवैध रूप से जोड़े गए थे और कई जगह खुले तार लटक रहे थे। दिल्ली फायर सर्विस के एक अधिकारी ने बताया कि बस्ती में ज्वलनशील सामग्री (जैसे प्लास्टिक, लकड़ी, और कपड़े) की अधिकता और संकरी गलियों ने आग को तेजी से फैलने में मदद की। आग के दौरान कम से कम 8 गैस सिलेंडरों में विस्फोट होने की भी खबर है, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। फॉरेंसिक विशेषज्ञ और बिजली विभाग की टीमें सटीक कारण का पता लगाने के लिए साक्ष्य जुटा रही हैं। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात कारणों से आग लगने का केस दर्ज किया है और स्थानीय बिजली आपूर्तिकर्ता (BSES) से भी जवाब मांगा है।

दमकल विभाग को रात 11:30 बजे सूचना मिली, जिसके बाद 15 फायर टेंडर और 60 से अधिक दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। आग की तीव्रता और धुएं के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं। दमकलकर्मियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 3:30 बजे आग पर काबू पाया। इस दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। दिल्ली पुलिस और स्थानीय एनजीओ ने भी बचाव कार्य में सहयोग किया।घायलों को तुरंत नजदीकी बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को वेंटिलेटर पर रखा गया है। मृत बच्चों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।

दिल्ली सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को 10,000 रुपये की तत्काल राहत राशि दी गई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुबह घटनास्थल का दौरा किया और ट्वीट कर दुख जताया। उन्होंने कहा, "हम प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। उनकी हरसंभव मदद की जाएगी। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।"दिल्ली सरकार ने नजदीकी सरकारी स्कूल में अस्थायी राहत शिविर बनाया है, जहां 500 से अधिक प्रभावित लोगों को ठहराया गया है। शिविर में भोजन, पानी, कंबल, और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्थानीय विधायक और नगर निगम के अधिकारियों को पुनर्वास योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
उधर आग से प्रभावित बस्तीवासियों ने प्रशासन और बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बस्ती में बिजली के तारों की खराब स्थिति और अवैध कनेक्शनों की शिकायत पिछले दो साल से की जा रही थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ निवासियों ने बताया कि बस्ती में पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण आग बुझाने में स्थानीय लोगों को दिक्कत हुई।सुबह सैकड़ों प्रभावित लोग विजय विहार पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए और मुआवजे, पुनर्वास, और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर के लिए रोहिणी मेन रोड भी जाम कर दिया, जिसे पुलिस ने समझा-बुझाकर हटवाया।

विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "आम आदमी पार्टी की सरकार ने झुग्गी बस्तियों को मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल रही है। यह हादसा लापरवाही का नतीजा है।" कांग्रेस ने भी सरकार से तत्काल पुनर्वास और सुरक्षा ऑडिट की मांग की।

दिल्ली सरकार ने सभी झुग्गी बस्तियों में बिजली, पानी, और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट कराने का आदेश दिया है। दिल्ली फायर सर्विस ने प्रस्ताव दिया है कि ऐसी बस्तियों में अग्निशमन उपकरणों की स्थायी व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, अवैध बिजली कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई और नियमित निरीक्षण की योजना बनाई जा रही है।

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विजय विहार की यह बस्ती ज्यादातर दिहाड़ी मजदूरों और छोटे-मोटे काम करने वालों की थी। आग ने सैकड़ों परिवारों के रोजगार के साधन (जैसे रिक्शा, ठेले, और छोटी दुकानें) नष्ट कर दिए। कई लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, और बच्चों के स्कूल सर्टिफिकेट, भी जल गए। स्थानीय एनजीओ और सामाजिक संगठन प्रभावितों के लिए कपड़े, बर्तन, और स्कूल सामग्री जुटाने में लगे हैं।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं...
 
यह घटना दिल्ली में हाल के वर्षों में झुग्गियों में लगी सबसे बड़ी आग की घटनाओं में से एक है। इससे पहले 2019 में किराड़ी और 2022 में मुंडका में भी ऐसी ही आग लगी थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। इन घटनाओं के बाद भी झुग्गी बस्तियों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।

रोहिणी की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वालों की असुरक्षित जिंदगी को उजागर किया है। प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत और पुनर्वास के साथ-साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई और सुरक्षा मानकों को लागू करने की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

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