Sambhal: मज़हब की आड़ में सियासत नहीं चलेगी - बंगाल में गठबंधन टूटने पर मुफ्ती आलम रज़ा नूरी का बड़ा बयान।
पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है, जहां ओवैसी और हुमायूँ कबीर के बीच गठबंधन टूटने को लेकर अब धार्मिक और
उवैस दानिश, सम्भल
पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है, जहां ओवैसी और हुमायूँ कबीर के बीच गठबंधन टूटने को लेकर अब धार्मिक और सामाजिक हलकों से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में धर्मगुरु मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने इस टूट को “जरूरी” बताते हुए बड़ा बयान दिया है।
मुफ्ती नूरी ने कहा कि उन्होंने पहले ही दिसंबर में लोगों को आगाह किया था कि हुमायूँ कबीर एक राजनीतिक एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं और मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद और मजहब की आड़ में राजनीति करना सही नहीं है और इससे समाज को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति करना गलत नहीं है, लेकिन मजहब के नाम पर राजनीति करना न तो समाज के हित में है और न ही कौम के लिए फायदेमंद। उनके मुताबिक, हुमायूँ कबीर का मकसद समाज की भलाई नहीं बल्कि सस्ती लोकप्रियता और वोटों का बंटवारा था। बंगाल चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि वहां के मुसलमान पूरी समझदारी के साथ फैसला करेंगे कि उन्हें किसे वोट देना है। उन्होंने नफरत की राजनीति से दूर रहने और “प्यार की राजनीति” को अपनाने की अपील की। मुफ्ती नूरी ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए इशारों में कहा कि हुमायूँ कबीर किसी राजनीतिक दल के हाथों में खेल रहे थे, जिसे अब जनता समझ चुकी है। बंगाल में गठबंधन टूटने के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ ही मजहब और राजनीति के रिश्ते पर भी नई बहस छिड़ती दिख रही है।
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