Hardoi: 1147 किताबों का ‘पुस्तकोपहार’: पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय हरदोई में बच्चों ने दिया पर्यावरण संरक्षण और सहयोग का संदेश।
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, हरदोई में आज 'पुस्तकोपहार' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी
हरदोई। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, हरदोई में आज 'पुस्तकोपहार' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी पुरानी कक्षा की किताबें अपने से छोटी कक्षा के बच्चों को भेंट कीं। इस बार विद्यालय के बच्चों ने मिलकर कुल 1147 किताबों का आदान-प्रदान किया, जिससे अब ये किताबें नए बच्चों के पढ़ने के काम आएंगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद राशिद ने बच्चों को बहुत ही प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किताबें सबसे अच्छी मित्र होती हैं और इन्हें दूसरों को उपहार में देना बहुत नेक काम है। प्राचार्य ने इस अभियान के तकनीकी और पर्यावरणीय महत्व पर जोर देते हुए बताया कि कागज पेड़ों से बनता है और एक टन कागज तैयार करने के लिए लगभग 17 बड़े पेड़ों को काटना पड़ता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज जो हमने 1147 किताबों का दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया है, उससे हमने न केवल कागज की बचत की है, बल्कि बहुत सारे पेड़ों को कटने से बचाकर पर्यावरण संरक्षण में अपना बड़ा योगदान दिया है। प्राचार्य ने समझाया कि यह मुहिम 'रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल' के सिद्धांत पर आधारित है, जो हमारी धरती को हरा-भरा रखने के लिए जरूरी है।
विद्यालय के लाइब्रेरियन आदेश कुमार ने अपने संबोधन में इस कार्यक्रम को वैश्विक लक्ष्यों से जोड़ते हुए जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG), विशेष रूप से SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 12 (जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग और उत्पादन) को पूरा करने की दिशा में एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि किताबों को दोबारा इस्तेमाल करना संसाधनों को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। आदेश कुमार ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे किताबों को एक धरोहर की तरह संभाल कर रखें ताकि वे आने वाले समय में भी दूसरों के काम आ सकें और हम मिलकर अपनी धरती को सुरक्षित रख सकें।
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक अवधेश शर्मा, दीपक सिंह, संजय पाठक और अभिषेक गंगवार ने सहयोग किया। इन सभी शिक्षकों ने मिलकर बच्चों को किताबें बांटने में मदद की और उन्हें इस मुहिम का महत्व समझाया। विद्यालय के इस प्रयास की सभी ने सराहना की है क्योंकि इससे न केवल संसाधनों की बचत होती है, बल्कि बच्चों में एक-दूसरे की मदद करने और पर्यावरण के प्रति सजग रहने के संस्कार भी विकसित होते हैं।
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