बिहार चुनावी रैली में राहुल गांधी का विवादास्पद बयान: 'सेना और नौकरशाही पर 10 फीसदी आबादी का कंट्रोल, 90 फीसदी वंचित', भाजपा ने की कड़ी निंदा। 

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में सेना

Nov 5, 2025 - 15:16
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बिहार चुनावी रैली में राहुल गांधी का विवादास्पद बयान: 'सेना और नौकरशाही पर 10 फीसदी आबादी का कंट्रोल, 90 फीसदी वंचित', भाजपा ने की कड़ी निंदा। 
बिहार चुनावी रैली में राहुल गांधी का विवादास्पद बयान: 'सेना और नौकरशाही पर 10 फीसदी आबादी का कंट्रोल, 90 फीसदी वंचित', भाजपा ने की कड़ी निंदा। 

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में सेना और प्रमुख संस्थाओं पर बड़ा बयान दिया। औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि देश की 90 फीसदी आबादी दलित, महादलित, पिछड़ी, अति पिछड़ी, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों से है, लेकिन प्रमुख कंपनियों, नौकरशाही, न्यायपालिका और सेना पर सिर्फ शीर्ष 10 फीसदी लोगों का कंट्रोल है। उन्होंने कहा कि 500 सबसे बड़ी कंपनियों की सूची बनाएं तो वहां कोई दलित या पिछड़ा नहीं दिखेगा। सभी नौकरियां और अवसर इन्हीं 10 फीसदी को मिलते हैं। सेना पर भी इन्हीं का कब्जा है। बाकी 90 फीसदी आबादी का कहीं प्रतिनिधित्व नहीं है। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और भाजपा ने इसे सेना के अपमान और जातिवादी बयान बताते हुए कड़ी निंदा की। कांग्रेस ने इसे सामाजिक न्याय की मांग बताया।

यह बयान 4 नवंबर 2025 को कुटुम्बा में दिया गया, जो बिहार चुनाव के पहले चरण के अंतिम अभियान दिवस पर था। कुटुम्बा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जहां बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में भाजपा समर्थित हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के ललन राम से मुकाबला कर रहे हैं। राहुल ने रैली में कहा, देश की आबादी पर गौर करें तो 90 फीसदी लोग दलित, महादलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी या अल्पसंख्यक हैं। लेकिन कॉर्पोरेट सेक्टर, नौकरशाही, न्यायपालिका और सेना में इन्हें जगह नहीं मिलती। सिर्फ 10 फीसदी आबादी सब कुछ कंट्रोल करती है। उन्होंने पूछा कि यह अन्याय क्यों? राहुल ने इसे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया और पूरे देश में जाति आधारित जनगणना की मांग दोहराई। उनका कहना था कि बिना सटीक आंकड़ों के न्याय संभव नहीं। बिहार में 2023 की जाति जनगणना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यहां सामान्य वर्ग की आबादी सिर्फ 15 फीसदी है, फिर भी वे सब कुछ हथिया लेते हैं।

राहुल का यह बयान बिहार चुनाव के संदर्भ में आया, जहां महागठबंधन सामाजिक न्याय और जाति जनगणना को मुख्य मुद्दा बना रहा है। वे औरंगाबाद और वजीरगंज में भी रैलियां कर चुके थे। कुटुम्बा रैली में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। कहा कि मोदी जी शिक्षा से उदासीन हैं क्योंकि उनकी डिग्री फर्जी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिहार के लोगों को मजदूर बनने के लिए मजबूर किया। राहुल ने वादा किया कि इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो बिहार में नालंदा जैसी विश्व स्तरीय यूनिवर्सिटी बनेगी, जहां दुनिया भर से छात्र आएंगे। उन्होंने अग्निवीर योजना की आलोचना की, कहा कि 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल बाद सड़क पर छोड़ दिया जाएगा। रैली में हजारों लोग जुटे थे, ज्यादातर पिछड़े और दलित समुदाय से। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, जाति जनगणना और न्याय की मांग की।

यह बयान तुरंत विवादास्पद हो गया। भाजपा ने इसे सेना के प्रति अपमानजनक बताया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी सेना को जाति के चश्मे से देख रहे हैं, जो राष्ट्रविरोधी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना राष्ट्रभक्ति की मिसाल है, न कि जाति की। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा, राहुल अब सेना को भी जाति में बांटना चाहते हैं। यह चीन को मजबूत करने जैसा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस हमेशा सेना को कमजोर करने की कोशिश करती रही है। उन्होंने राहुल को सलाह दी कि वे पहले अपनी पार्टी के इतिहास को देखें, जहां इंदिरा गांधी ने सेना का राजनीतिकरण किया। भाजपा ने इसे 'एंटी-आर्मी' बयान करार दिया और कहा कि यह सैनिकों का अपमान है। पार्टी ने कहा कि सेना में भर्ती मेरिट पर होती है, जाति पर नहीं।

कांग्रेस ने बचाव किया। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि राहुल सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं, न कि सेना को कमजोर करने की। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा विपक्ष के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल का बयान संविधान की भावना पर आधारित है। हम 90 फीसदी आबादी के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। महागठबंधन के सहयोगी आरजेडी ने समर्थन दिया। तेजस्वी यादव ने कहा कि राहुल साहब सच्चाई बोल रहे हैं। बिहार की जाति जनगणना ने साबित किया कि सामान्य वर्ग 15 फीसदी है, फिर भी वे 90 फीसदी संसाधनों पर कब्जा जमाए हैं। विपक्ष ने इसे जातिवादी बयान बताने पर भाजपा को निशाना बनाया। कहा कि भाजपा आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित होकर सामाजिक न्याय को कमजोर करती है।

सोशल मीडिया पर यह बयान तहलका मचा दिया। एक्स पर #RahulOnArmy और #10PercentControl ट्रेंड करने लगे। कांग्रेस समर्थकों ने इसे साहसिक बताया। एक यूजर ने लिखा, राहुल जी ने जो कहा वही सच्चाई है। 90 फीसदी वंचित हैं। भाजपा समर्थकों ने आलोचना की। एक पोस्ट में लिखा, सेना पर जाति की राजनीति? राहुल देशद्रोही हैं। वीडियो क्लिप लाखों बार देखा गया। कुछ न्यूट्रल यूजर्स ने कहा कि बयान का संदर्भ सामाजिक प्रतिनिधित्व है, लेकिन शब्द चयन गलत था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान बिहार चुनाव में पिछड़े और दलित वोटों को एकजुट करने की कोशिश है। बिहार में ओबीसी और ईबीसी वोटर महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राहुल का यह बयान उनकी हालिया राजनीतिक रणनीति का हिस्सा लगता है। वे बिहार में वोटर अधिकार यात्रा चला चुके हैं, जहां वोट चोरी के आरोप लगाए। सितंबर में उन्होंने 'हाइड्रोजन बम' का जिक्र किया था। अब जाति जनगणना को केंद्र में रखा है। बिहार चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं। पहला चरण 6 नवंबर को 71 सीटों पर। महागठबंधन में कांग्रेस को 70 सीटें मिली हैं। भाजपा ने कहा कि यह बयान वोट बैंक की राजनीति है। सेना प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सेना में विविधता पर काम चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सेना में अधिकारी स्तर पर सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व ज्यादा है, लेकिन जवान स्तर पर पिछड़े समुदायों की भागीदारी बढ़ी है।

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