जोहरान ममदानी ने रचा इतिहास: न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मेयर बने, ट्रंप की धमकियों के बावजूद मिली बड़ी जीत। 

अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क सिटी में 4 नवंबर 2025 को हुए मेयर चुनाव में भारतीय मूल के जोहरान क्वासी ममदानी ने धमाकेदार जीत हासिल की है।

Nov 5, 2025 - 15:24
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जोहरान ममदानी ने रचा इतिहास: न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मेयर बने, ट्रंप की धमकियों के बावजूद मिली बड़ी जीत। 
जोहरान ममदानी ने रचा इतिहास: न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मेयर बने, ट्रंप की धमकियों के बावजूद मिली बड़ी जीत। 

न्यूयॉर्क। अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क सिटी में 4 नवंबर 2025 को हुए मेयर चुनाव में भारतीय मूल के जोहरान क्वासी ममदानी ने धमाकेदार जीत हासिल की है। 34 वर्षीय डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ममदानी ने पूर्व गवर्नर एंड्र्यू कुओमो और रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा को हराकर शहर के 111वें मेयर बनने का गौरव प्राप्त किया। यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। ममदानी न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर हैं, पहले दक्षिण एशियाई मूल के मेयर हैं और एक सदी से ज्यादा समय में सबसे युवा मेयर हैं। चुनाव में रिकॉर्ड दो मिलियन से ज्यादा वोट पड़े, जो 1969 के बाद सबसे ज्यादा हैं। ममदानी को 50.4 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कुओमो को 41.6 प्रतिशत और स्लिवा को सिर्फ 7.1 प्रतिशत। यह जीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने ममदानी को कम्युनिस्ट कहकर फंडिंग रोकने की धमकी दी थी।

जोहरान ममदानी का जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। उनके पिता महमूद ममदानी प्रसिद्ध लेखक और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं, जो भारतीय मूल के मुस्लिम हैं। मां मीरा नायर ऑस्कर नॉमिनेटेड भारतीय फिल्ममेकर हैं, जिनकी फिल्में जैसे सलाम बॉम्बे और मॉनसून वेडिंग विश्व प्रसिद्ध हैं। ममदानी सात साल की उम्र में परिवार के साथ न्यूयॉर्क आए। उन्होंने बोवडॉइन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में डिग्री ली। कॉलेज के दिनों में वे रैपर थे और अपना गाना नानी अपनी नानी को समर्पित किया, जो वायरल हुआ। 2018 में अमेरिकी नागरिकता मिली। 2020 में वे न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य चुने गए, जहां वे क्वींस के एस्ट्रोरिया इलाके का प्रतिनिधित्व करते हैं। असेंबली में उन्होंने किराया नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर दिया।

ममदानी का चुनाव अभियान affordability यानी रहन-सहन की लागत कम करने पर केंद्रित था। उन्होंने वादा किया कि बसें फ्री करेंगे, एक मिलियन किराया नियंत्रित अपार्टमेंट्स में किराया फ्रीज करेंगे, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर शुरू करेंगे और अमीरों पर टैक्स बढ़ाकर फंड जुटाएंगे। उनका नारा था न्यूयॉर्क को कामकाजी लोगों के लिए सस्ता बनाओ। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हुए, जहां वे कई भाषाओं में लोगों से बात करते दिखे। युवाओं और प्रोग्रेसिव वोटर्स ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया। ब्रुकलिन और क्वींस के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ थी। दक्षिण एशियाई समुदाय ने पहली बार इतनी बड़ी तादाद में वोट डाले।

चुनाव बेहद रोचक रहा। मौजूदा मेयर एरिक एडम्स स्कैंडल्स के कारण इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बने, लेकिन सितंबर में बाहर हो गए और कुओमो को समर्थन दिया। कुओमो जून में डेमोक्रेटिक प्राइमरी हार गए थे, फिर इंडिपेंडेंट बने। स्लिवा ने क्राइम रोकने पर फोकस किया। लेकिन ममदानी की ऊर्जा और सोशल मीडिया कैंपेन ने सबको पीछे छोड़ दिया। चुनाव में 20 लाख से ज्यादा वोट पड़े, जो 2001 के बाद सबसे ज्यादा हैं। एक्जिट पोल्स में युवा और नए वोटर्स ने ममदानी को चुना।

ट्रंप ने ममदानी का खुलकर विरोध किया। उन्होंने उन्हें कम्युनिस्ट कहा और धमकी दी कि अगर ममदानी जीते तो न्यूयॉर्क की फेडरल फंडिंग रोक देंगे। चुनाव से एक दिन पहले ट्रंप ने कुओमो को एंडोर्स किया। यहूदी वोटर्स से अपील की कि ममदानी यहूदी विरोधी हैं। लेकिन ममदानी ने जवाब दिया कि यह इस्लामोफोबिया है। जीत के बाद ब्रुकलिन में विजय भाषण में ममदानी ने ट्रंप को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, ट्रंप, मैं जानता हूं आप देख रहे हैं, वॉल्यूम बढ़ाओ। हम भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, अरबपतियों को टैक्स छूट नहीं देंगे। उन्होंने नेहरू के ट्रिस्ट विद डेस्टिनी स्पीच का जिक्र किया और कहा, न्यूयॉर्क ने असंभव को संभव बनाया।

ममदानी की जीत डेमोक्रेटिक पार्टी में नई पीढ़ी की जीत है। प्रोग्रेसिव नेता जैसे बर्नी सैंडर्स और एलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोर्टेज ने उन्हें समर्थन दिया। यह ट्रंप के दूसरे टर्म की पहली बड़ी परीक्षा थी, जहां डेमोक्रेट्स ने न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और वर्जीनिया में जीत हासिल की। ममदानी ने कहा कि हम ट्रंप को दिखाएंगे कि न्यूयॉर्क कैसे उन्हें हरा सकता है। उनकी पत्नी रामा दुवाजी सीरियाई मूल की आर्टिस्ट हैं, जिनसे हाल ही शादी हुई।

सोशल मीडिया पर खुशी की लहर है। भारतीय अमेरिकी समुदाय गर्व कर रहा है। मीरा नायर ने बेटे को बधाई दी। ममदानी ने कहा कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे। न्यूयॉर्क में 8.8 मिलियन लोग रहते हैं, जहां विविधता है। ममदानी की जीत इस विविधता का प्रतीक है। वे 1 जनवरी 2026 को शपथ लेंगे। चुनौतियां बड़ी हैं - किराया महंगा, बसें देर से, अपराध। लेकिन ममदानी ने वादा किया कि वे शहर को सभी के लिए बनाएंगे।

ट्रंप की धमकियां अब कानूनी लड़ाई का रूप ले सकती हैं। ममदानी ने कहा कि फंडिंग रोकना गैरकानूनी है। कांग्रेस फंडिंग तय करती है। शहर के नेता एकजुट हैं। यह जीत सिर्फ न्यूयॉर्क की नहीं, पूरे अमेरिका की प्रोग्रेसिव राजनीति की है। युवा वोटर्स ने दिखाया कि बदलाव संभव है। ममदानी की कहानी एक आप्रवासी बच्चे की है, जो सपनों का शहर संभालने जा रहा है।

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