नव निर्माण के 9 वर्ष (कानून व्यवस्था)- 9 वर्षों में जीरो टॉलरेंस से प्रदेश में मजबूत हुआ कानून का राज, निवेश, व्यापार और आम जनता के लिए बना सुरक्षित प्रदेश

योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके तहत प्रदेश में मिशन शक्ति, ऑपरेशन गरुड़, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन दृष्टि, ऑपरेशन बचपन, ऑपरेश

Mar 18, 2026 - 22:58
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नव निर्माण के 9 वर्ष (कानून व्यवस्था)- 9 वर्षों में जीरो टॉलरेंस से प्रदेश में मजबूत हुआ कानून का राज, निवेश, व्यापार और आम जनता के लिए बना सुरक्षित प्रदेश
नव निर्माण के 9 वर्ष (कानून व्यवस्था)- 9 वर्षों में जीरो टॉलरेंस से प्रदेश में मजबूत हुआ कानून का राज, निवेश, व्यापार और आम जनता के लिए बना सुरक्षित प्रदेश

  • जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए 269 अपराधियों को एनकाउंटर में किया गया ढेर
  • 22 हजार से अधिक इनामी अपराधी भेजे गए जेल, 1.25 लाख से अधिक अभियुक्त दोषी करार
  • 79 अपराधियों को मृत्युदंड और 10 हजार से अधिक को उम्रकैद की सजा दिलाई 
  • महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति और एंटी रोमियो स्क्वॉड सक्रिय, महिलाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण में यूपी देश में नंबर- 1

लखनऊ। योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई कर सूबे में न सिर्फ कानून का राज स्थापित किया, बल्कि बेटियों को उनका शक्ति का रूप लौटाया। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बेटियां पूरी निडरता से नाइट शिफ्ट में भी काम पर जातीं हैं। यूपी अब आम जनता, व्यापारी के साथ-साथ निवेशकों के लिए भी सुरक्षित प्रदेश बनकर उभरा है। सुदृढ़ कानून व्यवस्था से प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार में काफी उछाल आया है। वर्तमान में देश ही नहीं दुनिया के बड़े-बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए लालायित हैं। 

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक 269 अपराधियों को एनकाउंटर में किया ढेर
योगी सरकार ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 7 बड़े महानगरों में पुलिस कमिश्नरेट को लागू किया। इससे पुलिसिंग, जनसमस्याओं के निस्तारण व अपराध नियंत्रण में गुणात्मक सुधारा हुआ। यही वजह है कि वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में एक भी सांप्रदायिक दंगा और जातिगत संघर्ष की घटना नहीं हुई। योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए दुर्दांत अपराधियों के विरुद्ध एनकाउंटर की कार्रवाई की। इस दौरान अब तक 269 अपराधी मुठभेड़ में मारे गये जबकि एवं 10,990 घायल हुए। इनमें 22,306 इनामी अपराधियों को जेल भेजा गया। वहीं, 85,118 अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम तथा 977 अपराधियों के विरुद्ध एनएसए की कार्रवाई की गई। इसके अलावा गैंगस्टर अधिनियम के तहत 145 अरब 79 करोड़ से अधिक लागत मूल्य की चल/अचल अवैध सम्पत्तियों को जब्त किया गया। इसके साथ ही चिन्हित 68 माफिया व उनके गैंग के सदस्यों/ सहयोगियों के कुल 1,459 के विरुद्ध 875 अभियोग पंजीकृत किए गये तथा 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 18 के विरुद्ध एनएसए, 785 के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई। इन माफिया एवं अपराधियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित 4,137 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति जब्त की गई। 

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत सवा लाख से अधिक अभियुक्तों को दिलाई सजा
योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में न केवल अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई की बल्कि न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर कठोर सजा दिलाई। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत कुल 1,25,985 अभियुक्तों को दोषसिद्ध कराया गया। इस दौरान 79 अपराधियों को मृत्युदंड, 10,414 को आजीवन कारावास और 1,921 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा दिलाई गई। इसके अलावा 6,321 अपराधियों को 10 से 19 वर्ष तक की सजा, 9,484 अभियुक्तों को 5 से 9 वर्ष तक की सजा और 97,766 अभियुक्तों को 5 वर्ष से कम की सजा दिलाई गई। वहीं, चिन्हित माफिया गैंग के खिलाफ प्रभावी पैरवी करते हुए 35 माफिया और उनके 94 सहयोगियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई जबकि दो अपराधियों को मृत्युदंड की सजा दिलाई गई। इसके साथ ही बुलडोजर कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई, जिससे अपराधियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ा है। कानून व्यवस्था में सुधार का असर अपराध के आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वर्ष 2016 की तुलना में प्रदेश में कई गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार डकैती में 90 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत, बलवा की घटनाओं में 70 प्रतिशत, फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं में 62 प्रतिशत, दहेज हत्या में 19 प्रतिशत और बलात्कार की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

एंटी रोमियो स्क्वायड का किया गया गठन, 5 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की जांच की गई
योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके तहत प्रदेश में मिशन शक्ति, ऑपरेशन गरुड़, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन दृष्टि, ऑपरेशन बचपन, ऑपरेशन खोज, ऑपरेशन डिस्ट्रॉय और ऑपरेशन रक्षा जैसे अभियानों को प्रभावी रूप से संचालित किया गया। इन अभियानों के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की गई। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश में 1090 वूमेन पावर लाइन, जीआरपी, फायर सर्विस और महिला हेल्पलाइन 181 जैसी सेवाओं का एकीकरण करते हुए प्रत्येक जिले में एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया है। एंटी रोमियो स्क्वॉड के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की जांच की गई, जिसमें 1 करोड़ 85 लाख से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई और 38,835 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। वहीं, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन 1090 का गठन कर महिलाओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था की गई। प्रदेश के प्रत्येक जिले में महिला थानों के साथ अतिरिक्त थानों में महिला थाना प्रभारी की तैनाती भी की गई है। प्रदेश में महिला सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए तीन महिला पीएसी बटालियन का गठन किया गया है जबकि बलरामपुर, जालौन, मीरजापुर, शामली और बिजनौर में नई महिला बटालियन बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं और इन केंद्रों के संचालन के लिए लगभग 40 हजार पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 

महिला संबंधी मामलों के निस्तारण में उत्तर प्रदेश नंबर 1
मिशन शक्ति केंद्रों के गठन के बाद प्रदेश में महिलाओं से जुड़े अपराधों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच के आंकड़ों के अनुसार बलात्कार की घटनाओं में 33.92 प्रतिशत की कमी, महिलाओं एवं बच्चों के अपहरण में 17.03 प्रतिशत की कमी, दहेज हत्या में 12.96 प्रतिशत की कमी और घरेलू हिंसा में 9.54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यौन अपराधों की जांच को प्रभावी बनाने के लिए आईटीएसएसओ (Investigation Tracking System for Sexual Offences)पोर्टल का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में महिला संबंधी मामलों के निस्तारण की दर 98.90 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके साथ ही पेंडेंसी दर के आधार पर भी उत्तर प्रदेश 0.20 प्रतिशत के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। न्यायालय में प्रभावी पैरवी के जरिये महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हुए अपराधों में 32,575 अभियोगों, पॉक्सो अधिनियम के 14,111 अभियोगों एवं बलात्कार के 4,564 अभियोगों में अभियुक्तों को सजा दिलाई गई। इतना ही नहीं, 19,839 महिला पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की गई है, जबकि 9,172 महिला बीटों का आवंटन किया गया है।

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