Sambhal : सूरजकुंड मंदिर भूमि विवाद में टकराव: नापतोल करने पहुंचे लेखपाल को मंदिर कमेटी ने रोका

बुधवार को हल्का लेखपाल राहुल धारीवाल गाटा संख्या 127/0.214 हेक्टेयर भूमि की नापतोल करने के लिए मौके पर पहुंचे थे। तभी मंदिर कमेटी के राहुल शर्मा समेत अन्य लोगों ने यह कहते हुए विरोध कर दिया कि संबंधित भू

Apr 8, 2026 - 20:01
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Sambhal : सूरजकुंड मंदिर भूमि विवाद में टकराव: नापतोल करने पहुंचे लेखपाल को मंदिर कमेटी ने रोका
Sambhal : सूरजकुंड मंदिर भूमि विवाद में टकराव: नापतोल करने पहुंचे लेखपाल को मंदिर कमेटी ने रोका

कोर्ट में मामला विचाराधीन होने का हवाला, प्रशासन की टीम लौटी बैरंग; दोनों पक्ष आमने-सामने

Report : उवैस दानिश, सम्भल

कोतवाली सम्भल क्षेत्र के मोहल्ला शेरखां सराय स्थित प्राचीन सूरजकुंड मंदिर परिसर में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब राजस्व विभाग की टीम जमीन की नापतोल करने पहुंची। मंदिर कमेटी के विरोध के चलते लेखपाल को बिना नापतोल किए ही वापस लौटना पड़ा।बुधवार को हल्का लेखपाल राहुल धारीवाल गाटा संख्या 127/0.214 हेक्टेयर भूमि की नापतोल करने के लिए मौके पर पहुंचे थे। तभी मंदिर कमेटी के राहुल शर्मा समेत अन्य लोगों ने यह कहते हुए विरोध कर दिया कि संबंधित भूमि सूरजकुंड मंदिर की है और इस पर न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। बिना कोर्ट के आदेश के नापतोल करने पर आपत्ति जताई गई। बताया जा रहा है कि यह नापतोल संपूर्ण समाधान दिवस में तरुण कुमार प्रजापति द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर कराई जा रही थी।दावा है कि यह जमीन वर्ष 1995 में गंगा प्रसाद प्रजापति ने नजीर नामक व्यक्ति से खरीदी थी। बाद में इस जमीन को लेकर बाबा शिवचंद्र द्वारा वाद दायर किया गया था, जिसमें वर्ष 2023 में कोर्ट ने नजीर के पक्ष में फैसला सुनाया। मौजूदा समय में यह जमीन मंदिर परिसर के भीतर बताई जा रही है, जहां एक ओर बाउंड्री बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर मकान बने हुए हैं और बीच का हिस्सा पानी से भरा हुआ है। गंगा प्रसाद की मृत्यु के बाद यह जमीन उनके पुत्र तरुण कुमार प्रजापति और प्रदीप आर्य के नाम खतौनी में दर्ज बताई जा रही है। इसी मामले को लेकर प्रदीप आर्य ने कहा कि उनके पिता ने वर्ष 1995 में यह जमीन रजिस्टर्ड बैनामे के जरिए खरीदी थी और वे वर्षों से इसके मालिक हैं।उनका आरोप है कि मंदिर समिति ने इस पर मुकदमा कर स्टे लिया था, जो अब खारिज हो चुका है। उन्होंने बताया कि डीएम के निर्देश पर नापतोल के लिए टीम आई थी, लेकिन मंदिर कमेटी के विरोध के चलते कार्य नहीं हो सका। अब प्रशासन ने दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई करने और नापतोल की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रदीप आर्य ने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ अपनी जमीन चाहिए और यदि बातचीत से समाधान निकलता है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। सूरजकुंड मंदिर की प्राचीनता और जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद अब प्रशासन और न्यायालय के बीच उलझता नजर आ रहा है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।

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