Prayagraj : जीवन में आलस्य और प्रमाद का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, युवाओं में बढ़ता अध्यात्म का रुझान सुखद संकेत- पुरी शंकराचार्य
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि समाज में 'एक घंटा और एक रुपया' की योजना चलाई जाए, तो हिंदुओं की कई समस्याओं का समाधान आपसी सहयोग से संभव है। उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रह
प्रयागराज के शिवगंगा आश्रम झूंसी में प्रवास के दौरान पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने धर्म, अध्यात्म और राष्ट्र से जुड़े सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में आलस्य और प्रमाद बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति को 24 घंटे में से कम से कम 24 मिनट ईश्वर के लिए जरूर निकालने चाहिए। उन्होंने खुशी जताई कि आजकल बड़ी संख्या में युवा वर्ग धर्म और राष्ट्र से संबंधित प्रश्न पूछ रहे हैं, जो समाज के लिए एक अच्छा संकेत है। शंकराचार्य ने जोर दिया कि ऐसा विकास किसी काम का नहीं जो मानव जीवन की सार्थकता को ही खत्म कर दे। उन्होंने अपील की कि अपनी पहचान और आदर्शों की रक्षा के लिए हर हिंदू को सनातनी संस्कारों के साथ जुड़ना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि समाज में 'एक घंटा और एक रुपया' की योजना चलाई जाए, तो हिंदुओं की कई समस्याओं का समाधान आपसी सहयोग से संभव है। उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज की रक्षा के लिए सैन्य प्रशिक्षण भी लेना चाहिए ताकि एक व्यक्ति अन्य दस लोगों की मदद कर सके। विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सूर्योदय के समय सोने से बुद्धि कमजोर होती है। सफल होने के लिए युवाओं को रात में जल्दी सोना चाहिए और सूरज निकलने से एक-दो घंटे पहले उठना चाहिए, इससे याददाश्त और सोचने की शक्ति बढ़ती है। उन्होंने अंत में कहा कि जिसकी आस्था धर्म और भगवान में अटूट है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
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