Saharanpur: सांसद इकरा हसन प्रकरण में राजनीतिक खामोशी पर चर्चा तेज।
मुकदमा दर्ज होने के बाद सांसद अकेले मोर्चे पर, सहयोगी दलों और संगठन की सक्रियता पर उठे सवाल
सहारनपुर। सांसद इकरा हसन एवं डीआईजी प्रकरण में सांसद समेत 7 लोगों को नामजद करने तथा 20- 25 अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद सांसद इकरा हसन ही अकेले मैदान में डटी है अभी तक भी समाजवादी पार्टी की ओर से सोशल मीडिया को छोड़ अन्य किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है गठबंधन के तहत कांग्रेस सांसद समेत अन्य नेता भी कुछ कहने से किनारा कर रहे हैं। आपको बता दे की विगत 19 में को सांसद इकरा हसन अपनी लोकसभा क्षेत्र शामली के गांव जसाला से एक पीड़ित महिला को लेकर डीआईजी से मिलने पहुंची थी, जिसको लेकर विवाद हो गया था और विवाद इतना बड़ा हो गया था कि सांसद इकरा हसन को पुलिस हिरासत में लिया गया और उनके समर्थकों को जेल तक भेज दिया गया था। सांसद इकरा हसन के कड़े रुख के कारण पकड़े गए लोगों को थाने से ही जमानत दे दी गई थी और पीड़ित परिवार को लेकर सांसद इकरा हसन सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिली थी और सपा की ओर से 200000 रूपये की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को दिलाते हुए उनकी सहानुभूति बटोरी थी।पुलिस प्रशासन की ओर से सांसद इकरा हसन समेत लगभग आठ लोगों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज करते हुए 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से कोई सकारात्मक राजनीति नहीं देखी। कल तक सांसद इकरा हसन के राजनीति रूप् से अत्यधिक करीबी बनने वाले लोग भी अपने आप को बचते नजर आ रहे हैं, जब भी सांसद इकरा हसन सहारनपुर आती थी तो वह उन्हें अपने साथ अपने घर ले जाते हैं और किसी से मिलने भी नहीं देते थे, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बाद उनकी ओर से कोई ऐसी बात सामने नहीं आई जो आंदोलनात्मक लगती हो।
केवल सोशल मीडिया के माध्यम से ही समाजवादी पार्टी के नेता अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं जिसमें बेहट विधायक उमर अली खान, साहिल खान और पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा प्रमुख नाम है जो केवल सोशल मीडिया पर ही अपने प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जनपद स्तर पर सपा जिला अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष अन्य जनप्रतिनिधियों एवं बड़े नेताओं द्वारा ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि वह सांसद इकरा हसन का समर्थन कर मुकदमे के खिलाफ आंदोलन चलाने की बात की।चर्चा है कि समाजवादी पार्टी नेता मुकदमा दर्ज होने से बच रहे हैं क्योंकि 20 25 अज्ञात के नाम मुकदमा दर्ज है ऐसे में उनका नाम इस मुकदमे से ना जुड़ जाए इसीलिए सपा नेता पूरी तरह इस मामले में खामोशी अख्तियार किए हुए हैं।लोकसभा और विधानसभा में गठबंधन करने वाले कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोशी अख्तियार किए हुए हैं कांग्रेस सांसद एवं तेजतर्रार नेता इमरान मसूद की ओर से भी सांसद इकरा हसन को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है चर्चा है कि गठबंधन भले ही हो लेकिन मुद्दों पर गठबंधन नहीं निभाया जा रहा है। सांसद इकरा हसन ने मुकदमा दर्ज होने के बाद कहा कि वह इससे डरने वाले नहीं है और इस मामले को लोकसभा में उठाया जाएगा लेकिन इससे पहले भी सांसद इकरा हसन की अपर जिला अधिकारी प्रशासन से भी विवाद हो चुका है और वह इस मामले को लोकसभा में भी उठ चुकी है लेकिन आज तक भी आधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में सांसद इकरा हसन ही इस मामले में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई है पार्टी भी इस मामले पर खुलकर सामने नहीं आ रही है। संगठन स्तर पर इस लड़ाई को मजबूती से लड़ने की जरूरत थी लेकिन सांसद इकरा हसन झांसी की रानी की तरह अकेले ही मैदान में डटी हुई है।उधर कश्प्य समाज के उत्पीड़न व लोगों हत्या होने के बावजूद भी कश्यप समाज पूरी तरह खामोश है, जबकि प्रदेशसरकार में समाज की हिस्सेदारी के रूप में संजय निषाद कैबिनेट मंत्री है। ऐसे में सरकार और कश्यप समाज क्या रहा है यह भी अपने आप में एक सवाल खड़ा हो रहा है।
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