Saharanpur: कांग्रेस के लश्कर में भी तौबा-तौबा की गूंज..सपा से गठबंधन होने पर भी सातों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का इमरान मसूद का ऐलान।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास कारवां कम गुबार ज्यादा है।लेकिन सहारनपुर जनपद इसका अपवाद कहा जा सकता है। यहां
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास कारवां कम गुबार ज्यादा है।लेकिन सहारनपुर जनपद इसका अपवाद कहा जा सकता है। यहां की लोकसभा सीट से कद्दावर नेता इमरान मसूद सन 2024 में चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे हैं। अब रही बात सन 2027 के विधानसभा चुनाव की तो कांग्रेस 'जीत का फॉर्मूला' तलाश रही है, जिसमें समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की रूपरेखा बन रही है। सपा से गठबंधन होने की दशा में भी कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ऐलान किया है कि सहारनपुर की सभी सातों सीटों पर वह अपना प्रत्याशी उतारेंगे। जबकि सपा ऐसा कभी नहीं चाहेगी क्योंकि बेहट और देहात सीट पर उसके दो विधायक पिछला चुनाव जीत चुके हैं। अगर इमरान की चली तो वह भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। सन 27 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में खींचतान शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार अपना लश्कर बढ़ाते जा रहे हैं। पिछले दिनों गागलहेड़ी में हुए सदस्यता ग्रहण सम्मेलन में पूर्व विधायक मसूद अख्तर समेत कई और नेता कांग्रेस का दामन पकड़ लिए। प्रदेश अधक्ष अजय राय और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे की मौजूदगी में मंच पर थोड़ी अनबन हुई।लेकिन इमरान ने साफ कहा कि वह सहारनपुर की सभी सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारेंगे जबकि इन दोनों , अजय राय और अविनाश पांडे ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन और तय शर्तों के अनुसार चुनाव लड़ने की बात कही। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े सूबे में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती राज्य के मजबूत क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बिठाने की है।समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव का स्पष्ट रुख है कि आगामी चुनाव में 'सीट नहीं, जीत' को प्राथमिकता दी जाएगी। सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन बना हुआ है, लेकिन कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए हर सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद कर रहा है। इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर बढ़ते कदम हैं। कांग्रेस नेताओं ने लखनऊ में मायावती से मिलने की कोशिशें की, हालांकि उन्हें तवज्जो नहीं मिली और खाली हाथ लौटना पड़ा।
अब जहां तक सहारनपुर और इमरान मसूद की बात है तो इतिहास अपने आप को फिर दोहरा सकता है। एक समय था जब तत्कालीन कैबिनेट मंत्री जगदीश राणा को इमरान मसूद ने खुद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर हरा दिया था। इमरान के कहने पर अगर कांग्रेस नेतृत्व सातों सीट नहीं देता है तो वह निर्दलीय प्रत्याशी भी लड़ा सकते हैं। क्योंकि इमरान व्यापक जनाधार वाले नेता हैं लिहाजा वह भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों का खेल बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। दिलचस्प है कि इमरान मसूद के परिवार में ही उनके दामाद सायान मसूद भी बेहट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। सूत्रों का यहां तक कहना है कि कभी काजी रशीद मसूद की कक्षा के विद्यार्थी रहे एक पूर्व मंत्री जो अब दूसरे दल में हैं, वह अंदरखाने इमरान मसूद से संपर्क में हैं। अगर बीजेपी से उनको टिकट नहीं मिलता है तो इमरान मसूद के बूते कांग्रेस के टिकट पर सदर सीट से चुनाव लड़ने की मंशा पाले हुए हैं। एक और पूर्व विधायक जो भाजपा में हैं वह भी कांग्रेस का रुख कर सकते हैं। बहरहाल सहारनपुर में अभी गंगा और यमुना में बहुत पानी बहना बाकी है काफी उठापटक होनी है सहारनपुर में कांग्रेस का संगठन भी नाराजगी जाहिर कर चुका है। संगठन के पदाधिकारी का कहना है कि इमरान मसूद के आगे उनकी चलती नहीं, जबकि पार्टी के लिए वह हमेशा झंडा उठा रहे हैं। इस बाबत प्रदेश अध्यक्ष अजय रावत का कहना है कि राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस फोकस कर रही है।पार्टी का पूरा जोर समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं और वंचित वर्गों को पार्टी से जोड़ना है।कांग्रेस सहारनपुर में कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह समय बतायेगा।
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