Bihar Elections: जेल से रिहा आजम खान को सपा ने दी स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी, रामगोपाल-शिवपाल गायब।
समाजवादी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपनी 20 स्टार प्रचारकों की सूची शुक्रवार को जारी की। इस सूची में जेल से हाल ही में रिहा हुए वरिष्ठ नेता आजम खान का नाम शामिल
समाजवादी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपनी 20 स्टार प्रचारकों की सूची शुक्रवार को जारी की। इस सूची में जेल से हाल ही में रिहा हुए वरिष्ठ नेता आजम खान का नाम शामिल है, जो उनकी राजनीतिक पुनर्वास का संकेत माना जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम को महागठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। सूची में अखिलेश यादव, उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव, सांसद राजीव राय, इकरा हसन, प्रिया सरोज के अलावा किरणमय नंदा, अफजल अंसारी, अवधेश प्रसाद, बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रामाशंकर विद्यार्थी, लालजी वर्मा, छोटेलाल खरवार, संतान पांडेय, पप्पू निषाद, तेज प्रताप सिंह यादव, ओम प्रकाश सिंह, काशी यादव और धर्मेंद्र सोलंकी जैसे 20 नेताओं के नाम हैं। खास बात यह है कि अखिलेश के चाचा रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव का नाम गायब है, जो पार्टी में सत्ता संतुलन को दर्शाता है।
यह सूची बिहार चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले जारी हुई है, जो छह और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। समाजवादी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं। सपा ने बिहार में चार सीटें लड़ी हैं, लेकिन प्रचार में पूरे गठबंधन के लिए योगदान देगी। आजम खान की वापसी से मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति साफ है। आजम सपा के सह-संस्थापक हैं और 10 बार विधायक रह चुके हैं। वे मुस्लिम समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, जिनकी बिहार के सीमावर्ती जिलों में अच्छी पकड़ है। अखिलेश ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया था, लेकिन कानूनी मुश्किलों के कारण वे जेल में थे। अब उनकी एंट्री से पार्टी में नया उत्साह है।
आजम खान का जेल से बाहर आना एक लंबी कानूनी लड़ाई का अंत था। वे 2022 से सितंबर 2025 तक रामपुर के विभिन्न मामलों में जेल में रहे। उन पर जमीन हड़पने, धोखाधड़ी और हिंसा के आरोप थे। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी, जिसके बाद वे स्वतंत्र हो गए। जेल से बाहर आते ही आजम ने कहा कि वे सपा के प्रति वफादार रहेंगे। अखिलेश ने उन्हें घर बुलाया और गले लगाया। यह मुलाकात पार्टी कार्यालय में हुई, जहां आजम ने कहा कि अखिलेश का सम्मान उनके लिए सब कुछ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आजम की वापसी से सपा का मुस्लिम आधार मजबूत होगा। बिहार में मुस्लिम वोटरों की संख्या 17 प्रतिशत है, जो महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। आजम के भाषणों में उनकी आक्रामक शैली है, जो युवाओं को आकर्षित करती है। वे प्रचार में सीधे मुद्दों पर बोलेंगे, जैसे बेरोजगारी, शिक्षा और अल्पसंख्यक अधिकार।
सूची में रामगोपाल और शिवपाल के नाम न होने से पार्टी में बहस छिड़ गई। रामगोपाल सपा के दिग्गज रणनीतिकार हैं, जो राज्यसभा सदस्य हैं। शिवपाल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं, लेकिन सपा से जुड़े हैं। अखिलेश ने 2022 में शिवपाल को माफ किया था, लेकिन अब उन्हें किनारे किया। विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश अब परिवार से ऊपर उठकर पार्टी को केंद्रीकृत कर रहे हैं। रामगोपाल को लोकसभा चुनाव में हार मिली, इसलिए उनका नाम टाला गया। शिवपाल की अपनी महत्वाकांक्षा रही है। यह फैसला सपा को नई दिशा देगा। अखिलेश ने कहा कि प्रचारक वे होंगे जो जनता से जुड़े हैं। सूची में युवा सांसदों को जगह दी गई, जो पार्टी की नई पीढ़ी को मजबूत करती है।
अखिलेश यादव खुद सूची में पहले नंबर पर हैं। वे बिहार में तेजस्वी यादव के साथ प्रचार करेंगे। डिंपल यादव महिलाओं के मुद्दों पर फोकस करेंगी। राजीव राय, इकरा हसन और प्रिया सरोज जैसे सांसद युवाओं को लक्ष्य करेंगे। किरणमय नंदा पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, जो संगठन को मजबूत करते हैं। अफजल अंसारी पूर्वांचल के प्रभावशाली हैं। अवधेश प्रसाद, बाबू सिंह कुशवाहा जैसे नेता पिछड़े वर्गों को जोड़ेंगे। नरेश उत्तम पटेल प्रदेश अध्यक्ष हैं, जो रणनीति बनाएंगे। रामाशंकर विद्यार्थी, लालजी वर्मा जैसे वरिष्ठ विधायक स्थानीय मुद्दों पर बोलेंगे। छोटेलाल खरवार, संतान पांडेय, पप्पू निषाद दलित और पिछड़े समुदायों के प्रतिनिधि हैं। तेज प्रताप सिंह यादव युवा चेहरा हैं। ओम प्रकाश सिंह, काशी यादव और धर्मेंद्र सोलंकी पार्टी के मजबूत स्तंभ हैं। ये सभी प्रचारक बिहार के विभिन्न जिलों में सभाएं करेंगे।
यह सूची महागठबंधन के लिए रणनीतिक है। तेजस्वी यादव ने कहा कि सपा का समर्थन जीत दिलाएगा। महागठबंधन ने सीट बंटवारा पूरा किया है। राजद को सबसे ज्यादा, कांग्रेस और वाम को कम। सपा चार सीटों पर लड़ेगी, लेकिन प्रचार में पूरे गठबंधन के लिए। आजम खान की एंट्री से सीमावर्ती क्षेत्रों में मुस्लिम-यादव गठजोड़ मजबूत होगा। बिहार में सपा का इतिहास पुराना है। मुलायम सिंह यादव ने यहां मजबूत आधार बनाया। अब अखिलेश उस विरासत को आगे बढ़ा रहे। प्रचार अभियान में डिजिटल मीडिया का भी इस्तेमाल होगा। सोशल मीडिया पर वीडियो और लाइव सभाएं होंगी।
बिहार चुनाव में मुद्दे स्पष्ट हैं। महागठबंधन रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर देगा। एनडीए विकास और कानून व्यवस्था पर। आजम खान ने कहा कि वे बिहार के गरीबों के दर्द को समझते हैं। जेल ने उन्हें मजबूत बनाया। अखिलेश ने कहा कि आजम पार्टी का अभिन्न अंग हैं। उनकी वापसी से सपा मजबूत हुई। विपक्ष ने इसे सवाल उठाया। भाजपा ने कहा कि आजम पर मामले लंबित हैं, लेकिन सपा ने खारिज किया। कहा कि न्याय मिलेगा।
सूची जारी होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई। ट्विटर पर #AzamKhanStarCampaigner ट्रेंड किया। लोग लिख रहे कि अखिलेश ने साहस दिखाया। कुछ ने रामगोपाल-शिवपाल को साइडलाइन करने पर सवाल उठाए। न्यूज चैनलों ने डिबेट की। इंडिया टीवी, आज तक ने कवरेज किया। मनीकंट्रोल ने विश्लेषण दिया कि यह अखिलेश का नया दौर है। हिंदी वनइंडिया ने कहा कि आजम की एंट्री से मुस्लिम वोट एकजुट। टाइम्स बुल ने किरणमय नंदा का जिक्र किया। सियासत ने अल्पसंख्यक समर्थन पर फोकस। सोशल न्यूज एक्सवाईजेड ने पूरी लिस्ट शेयर की।
आजम खान का सफर प्रेरणादायक है। स्वार से विधायक, वे सपा के चाणक्य कहलाए। 2017 में हार मिली, लेकिन 2022 में फिर जीते। जेल में रहते हुए भी पार्टी के लिए लड़े। अब बिहार में वे प्रचार करेंगे। सभाओं में वे अखिलेश के विकास मॉडल की बात करेंगे। डिंपल यादव महिलाओं को संबोधित करेंगी। अखिलेश बिहार के युवाओं से कहेंगे कि वोट से बदलाव आएगा।
यह सूची सपा की रणनीति को मजबूत करती है। महागठबंधन में एकता का संदेश। तेजस्वी ने धन्यवाद दिया। कहा कि सपा का साथ जीत सुनिश्चित। एनडीए ने जवाब दिया कि गठबंधन टूटेगा। लेकिन सपा आश्वस्त है। प्रचार अभियान तेज होगा। बिहार के गांवों में सभाएं, शहरों में रोड शो। आजम की भाषण शैली जनता को जोड़ेगी।
बिहार चुनाव देश की राजनीति को प्रभावित करेगा। सपा की भूमिका महत्वपूर्ण। आजम की वापसी से पार्टी में नया जोश। अखिलेश ने कहा कि हम गरीबों के लिए लड़ेंगे। सूची में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व। दलित, मुस्लिम, यादव, पिछड़े सब शामिल। यह गठबंधन की ताकत है। प्रचार से पहले ट्रेनिंग सेशन होंगे। नेता मुद्दों पर एकजुट रहेंगे।
आजम खान ने कहा कि जेल ने उन्हें नया नजरिया दिया। अब वे बिहार के लिए काम करेंगे। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा भी सक्रिय। परिवार सपा के साथ। अखिलेश ने आजम को घर बुलाया, जहां चाय पर बात हुई। आजम ने कहा कि अखिलेश मेरे बेटे जैसे। यह भावुक मुलाकात थी। पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित। बिहार में सपा के कार्यालयों पर जश्न।
यह घटना सपा के पुनरुत्थान की कहानी है। 2019 लोकसभा में 5 सीटें, 2022 यूपी में 111। अब बिहार में कम सीटें, लेकिन प्रभाव ज्यादा। आजम की भूमिका से मुस्लिम वोट 80 प्रतिशत एकजुट। विश्लेषक कहते हैं कि यह महागठबंधन को फायदा देगा। एनडीए सतर्क। अमित शाह ने कहा कि गठबंधन फेल होगा। लेकिन सपा आगे बढ़ेगी।
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