उधर ब्रेन की सर्जरी करते रहे डॉक्टर, इधर शहनाई बजाती रही लड़की, डॉक्टरों को तुरंत दिखा चमत्कार

डेनिस बेकन का जन्म इंग्लैंड के ईस्ट ससेक्स के क्रोबोरो गांव में हुआ। वे एक रिटायर्ड स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट हैं। संगीत उनका जुनून रहा है। वे ईस्ट ग्रीनस्टेड कॉन्सर्ट बैं

Oct 24, 2025 - 23:08
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उधर ब्रेन की सर्जरी करते रहे डॉक्टर, इधर शहनाई बजाती रही लड़की, डॉक्टरों को तुरंत दिखा चमत्कार
उधर ब्रेन की सर्जरी करते रहे डॉक्टर, इधर शहनाई बजाती रही लड़की, डॉक्टरों को तुरंत दिखा चमत्कार

लंदन के किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल में एक ऐसी सर्जरी हुई, जो विज्ञान और संगीत का अनोखा संगम बनी। 65 वर्षीय डेनिस बेकन, जो पार्किंसन रोग से जूझ रही हैं, ने ब्रेन सर्जरी के दौरान अपनी क्लैरिनेट बजाई। यह सर्जरी डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) की थी, जिसमें डॉक्टरों ने उनके मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड डाले। सर्जरी के दौरान महिला जागृत अवस्था में थीं, ताकि डॉक्टर उनके मूवमेंट का परीक्षण कर सकें। जैसे ही स्टिमुलेशन चालू हुआ, उनकी उंगलियों की गति में तुरंत सुधार दिखा और वे सहजता से क्लैरिनेट बजा सकीं। यह दृश्य इतना प्रेरणादायक था कि हॉस्पिटल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। डॉक्टरों ने कहा कि यह तरीका सर्जरी की सफलता को तुरंत मापने का बेहतरीन उदाहरण है।

डेनिस बेकन का जन्म इंग्लैंड के ईस्ट ससेक्स के क्रोबोरो गांव में हुआ। वे एक रिटायर्ड स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट हैं। संगीत उनका जुनून रहा है। वे ईस्ट ग्रीनस्टेड कॉन्सर्ट बैंड में क्लैरिनेट बजाती थीं। लेकिन 2014 में पार्किंसन रोग का निदान होने के बाद सब बदल गया। यह एक न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारी है, जो मस्तिष्क के डोपामाइन प्रोड्यूसिंग सेल्स को प्रभावित करती है। शुरुआती लक्षणों में हाथों का कांपना, मांसपेशियों में अकड़न और धीमी गति शामिल हैं। डेनिस को चलने-फिरने, तैराकी, नृत्य और संगीत बजाने में कठिनाई होने लगी। पांच साल पहले उन्हें बैंड छोड़ना पड़ा। दवाओं से कुछ राहत मिली, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ी, साइड इफेक्ट्स भी उभरे। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि डीबीएस सर्जरी उनके लिए उपयुक्त होगी।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक आधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें मरीज के सिर में पांच सिक्के के आकार के छोटे छेद किए जाते हैं। उसके बाद मस्तिष्क के विशिष्ट हिस्से, जैसे सब्थैलामिक न्यूक्लियस, में इलेक्ट्रोड डाले जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड एक पल्स जेनरेटर से जुड़े होते हैं, जो छाती में पेसमेकर की तरह लगाया जाता है। यह डिवाइस मस्तिष्क को नियंत्रित विद्युतीय संकेत भेजती है, जो कांपन, अकड़न और धीमी गति जैसे लक्षणों को कम करती है। पार्किंसन का कोई इलाज नहीं है, लेकिन डीबीएस जीवन की गुणवत्ता सुधार सकता है। यह उन मरीजों के लिए है, जिनकी दवाएं असरदार न रहें। विश्व भर में लाखों मरीजों पर यह सफल रही है। लंदन के किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल में यह प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती है।

सर्जरी 2025 की शुरुआत में हुई, जो चार घंटे चली। प्रोफेसर कीयॉमार्स अश्कान, न्यूरोसर्जरी के प्रमुख, ने इसका नेतृत्व किया। डेनिस को सामान्य एनेस्थीसिया नहीं दिया गया। केवल सिर की त्वचा और खोपड़ी को लोकल एनेस्थेटिक से सुन्न किया गया। मरीज जागृत रहना जरूरी था, ताकि डॉक्टर इलेक्ट्रोड की सटीक स्थिति जांच सकें। वे मरीज से बात करते हैं, उंगलियां हिलवाते हैं या कोई कार्य करवाते हैं। डेनिस के मामले में क्लैरिनेट बजाना चुना गया। प्रोफेसर अश्कान ने कहा, डेनिस एक उत्साही क्लैरिनेटिस्ट हैं। सर्जरी का मुख्य लक्ष्य उनकी बजाने की क्षमता सुधारना था। इसलिए हमने ऑपरेटिंग थिएटर में उनका इंस्ट्रूमेंट लाने का सुझाव दिया।

जैसे ही इलेक्ट्रोड प्लेसमेंट पूरा हुआ और स्टिमुलेशन चालू की गई, चमत्कार हुआ। डेनिस ने क्लैरिनेट उठाई और बजाना शुरू किया। वीडियो में दिख रहा है कि सर्जरी टेबल पर लेटीं हुईं, वे संगीतमय स्वर निकाल रही हैं। उनकी दाहिनी हाथ की उंगलियां पहले की तुलना में तेज और सुगम चलीं। डॉक्टरों को तुरंत फीडबैक मिला कि इलेक्ट्रोड सही जगह पर हैं। डेनिस ने बाद में कहा, मुझे याद है कि स्टिमुलेशन लगते ही दाहिना हाथ आसानी से हिलने लगा। इससे क्लैरिनेट बजाना बेहतर हो गया। मैं इससे बहुत खुश हूं। सर्जरी के बाद उन्हें छाती में पल्स जेनरेटर लगाया गया। कुछ हफ्तों बाद इसे एक्टिवेट किया जाएगा। अब वे फिर से बैंड जॉइन करने की सोच रही हैं।

यह घटना पार्किंसन रोग के इलाज में नई उम्मीद जगाती है। पार्किंसन दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है। भारत में भी लाखों मरीज हैं। बीमारी के शुरुआती चरण में लेवोडोपा जैसी दवाएं दी जाती हैं। लेकिन लंबे समय में ये असरदार न रहें। तब डीबीएस जैसे विकल्प आते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि सर्जरी से 70 प्रतिशत तक लक्षण कम हो सकते हैं। लेकिन यह हर मरीज के लिए नहीं। उम्र, बीमारी की गंभीरता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। लंदन जैसे शहरों में उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं। भारत में भी अपोलो, फोर्टिस जैसे हॉस्पिटल डीबीएस करते हैं। लेकिन लागत अधिक है, करीब 10 से 15 लाख रुपये।

सर्जरी का वीडियो बीबीसी, स्काई न्यूज और यूरोन्यूज पर प्रसारित हुआ। सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज हैं। लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि यह चिकित्सा का चमत्कार है। एक यूजर ने कहा, संगीत ने बीमारी को हरा दिया। डॉक्टरों की तारीफ हो रही है कि उन्होंने मरीज के शौक को इलाज का हिस्सा बनाया। प्रोफेसर अश्कान ने बताया कि ऐसी सर्जरी में मरीज की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। कभी गाना गवाते हैं, कभी चित्र बनाते हैं। डेनिस का मामला खास था क्योंकि क्लैरिनेट उंगलियों की फुर्ती मापने का सटीक तरीका साबित हुआ। हॉस्पिटल ने कहा कि यह प्रक्रिया सुरक्षित है। मरीज को कोई दर्द नहीं होता। सर्जरी के बाद रिकवरी जल्दी होती है।

पार्किंसन रोग के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। मिशेल जैक्सन से लेकर मुहम्मद अली तक कई हस्तियां इससे प्रभावित रहीं। भारत में अभिनेता अक्षय कुमार ने जागरूकता अभियान चलाए। डेनिस की कहानी प्रेरणा देती है कि बीमारी के बावजूद जिंदगी जी जा सकती है। वे कहती हैं, संगीत मेरी ताकत है। सर्जरी ने मुझे नई जिंदगी दी। अब वे दोस्तों को सलाह देती हैं कि हार न मानें। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि पार्किंसन प्रगतिशील है। डीबीएस लक्षणों को नियंत्रित करता है, लेकिन बीमारी को नहीं रोकता। नियमित फॉलो-अप जरूरी है।

यह घटना चिकित्सा विज्ञान की प्रगति दिखाती है। ब्रेन सर्जरी पहले जोखिम भरी मानी जाती थी, अब जागृत अवस्था में संभव है। इससे सटीकता बढ़ती है। किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल यूरोप का प्रमुख न्यूरोसेंटर है। यहां सालाना सैकड़ों डीबीएस सर्जरी होती हैं। डेनिस के मामले ने मीडिया में सुर्खियां बटोरीं। वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि यह संगीत और चिकित्सा का मेल है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने भारत के संदर्भ में कवर किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि सर्जरी के बाद क्या होगा। डेनिस को डिस्चार्ज कर दिया गया। अब वे सामान्य जीवन जी रही हैं।

डेनिस की कहानी से सबक मिलता है कि व्यक्तिगत शौक इलाज में सहायक हो सकते हैं। पार्किंसन मरीजों को व्यायाम, योग और संगीत थैरेपी की सलाह दी जाती है। भारत में पार्किंसन सोसाइटी काम कर रही है। सरकार सब्सिडी पर दवाएं उपलब्ध कराती है। लेकिन उन्नत सर्जरी तक पहुंच सीमित है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेटिक रिसर्च से भविष्य में बेहतर इलाज संभव। डेनिस अब बैंड प्रैक्टिस शुरू करने वाली हैं। वे कहती हैं, यह सर्जरी मेरे सपनों को लौटाई। डॉक्टरों ने धन्यवाद दिया कि डेनिस ने साहस दिखाया।

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