बड़वानी में एक साथ उठी तीन अर्थियां, अनेर नदी में नहाने गए तीन सगे भाई-बहनों की डूबने से दर्दनाक मौत।

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है, बल्कि पूरे प्रदेश

Apr 23, 2026 - 15:52
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बड़वानी में एक साथ उठी तीन अर्थियां, अनेर नदी में नहाने गए तीन सगे भाई-बहनों की डूबने से दर्दनाक मौत।
बड़वानी में एक साथ उठी तीन अर्थियां, अनेर नदी में नहाने गए तीन सगे भाई-बहनों की डूबने से दर्दनाक मौत।
  • मामा के घर आई खुशियां मातम में बदलीं: नदी की गहराई नहीं भांप सके मासूम
  • कलेजे के टुकड़ों को निगल गई नदी: मध्य प्रदेश के बड़वानी में हृदयविदारक हादसा, पूरे गांव में पसरा सन्नाटा

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। गर्मी की छुट्टियों का आनंद लेने अपने मामा के घर आए तीन सगे भाई-बहनों की अनेर नदी में डूबने से मौत हो गई। यह भीषण हादसा उस समय हुआ जब बच्चे दोपहर के समय नदी में नहाने के लिए गए थे। पानी की गहराई का सही अंदाजा न होने और अचानक पैर फिसलने के कारण तीनों बच्चे एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में गहरे पानी में समा गए। जिस घर में कुछ घंटों पहले तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब केवल चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है। इस दुखद घटना ने प्रशासन और स्थानीय निवासियों को एक बार फिर नदी तटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है। हादसे की विस्तृत जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्चे मूल रूप से खरगोन जिले के रहने वाले थे और अपनी मां के साथ बड़वानी जिले के वरला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धुलकोट गांव में अपने मामा के घर आए थे। गर्मी की छुट्टियों में ननिहाल आने का उत्साह बच्चों के चेहरों पर साफ देखा जा सकता था। दोपहर के वक्त गर्मी से राहत पाने के लिए तीनों भाई-बहन पास ही बहने वाली अनेर नदी पर नहाने चले गए। बताया जा रहा है कि नदी का जलस्तर कुछ स्थानों पर कम था, लेकिन जहां बच्चे नहा रहे थे, वहां पानी के नीचे गहरा गड्ढा था। जैसे ही एक बच्चे का पैर फिसला, उसे बचाने के प्रयास में बाकी दोनों भी गहरे पानी की चपेट में आ गए। आसपास मौजूद लोगों ने जब बच्चों को डूबते देखा, तो शोर मचाया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

ग्रामीणों और स्थानीय गोताखोरों की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद तीनों बच्चों के शवों को नदी से बाहर निकाला गया। जैसे ही एक-एक कर तीनों मासूमों के बेजान शरीर पानी से बाहर आए, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई। मृत बच्चों की पहचान 12 वर्षीय बड़ी बहन, 10 वर्षीय भाई और 8 वर्षीय छोटी बहन के रूप में हुई है। एक ही परिवार के तीन चिरागों के बुझ जाने से मां की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। वह बार-बार बदहवास होकर गिर रही है और अपने बच्चों को वापस बुलाने की गुहार लगा रही है। मामा के घर में शादी या किसी उत्सव जैसी खुशियां मनाने की योजनाएं अब अंतिम संस्कार की तैयारियों में बदल गई हैं, जो किसी भी पत्थर दिल इंसान को रुला देने के लिए काफी है। गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का नदियों और तालाबों की ओर रुख करना आम बात है, लेकिन सुरक्षा की कमी इन स्थानों को 'डेथ ट्रैप' बना देती है। अनेर नदी के इस हिस्से में रेत खनन या प्राकृतिक कटाव के कारण बने गहरे गड्ढे अक्सर जानलेवा साबित होते हैं। प्रशासन बार-बार चेतावनी जारी करता है कि अनजान जल निकायों में उतरने से बचें, विशेष रूप से बिना किसी वयस्क की निगरानी के बच्चों को पानी के पास न जाने दें।

वरला थाना पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर शवों को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह मामला पूरी तरह से दुर्घटना का लग रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि अनेर नदी में कुछ जगहों पर पानी शांत दिखता है, लेकिन नीचे की सतह असमान होने के कारण वह बेहद खतरनाक है। इस घटना के बाद धुलकोट और आसपास के गांवों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। हर कोई इस बात से मर्माहत है कि जो बच्चे कल तक गलियों में खेल रहे थे, वे आज दुनिया छोड़ चुके हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पिता, जो काम के सिलसिले में बाहर थे, इस खबर को सुनकर सुध-बुध खो बैठे हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब बच्चों के शव गांव पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर कलेजा मुंह को आ गया। एक साथ तीन अर्थियां निकलते देख पूरा गांव फफक-फफक कर रो पड़ा। जिला प्रशासन ने इस दुखद घड़ी में परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान या आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया है, हालांकि किसी भी प्रकार की सहायता उस मां की गोद को दोबारा नहीं भर सकती जिसने अपने तीनों कलेजे के टुकड़े एक साथ खो दिए।

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