उपमुख्यमंत्री के आवास के सामने सदर अस्पताल में जलजमाव, विजय कुमार सिन्हा ने दिए तत्काल सुधार के निर्देश। 

Lakhisarai News: बिहार के सदर अस्पताल में 4 अगस्त 2025 को भारी बारिश के बाद जलजमाव की गंभीर स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की...

Aug 5, 2025 - 14:07
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उपमुख्यमंत्री के आवास के सामने सदर अस्पताल में जलजमाव, विजय कुमार सिन्हा ने दिए तत्काल सुधार के निर्देश। 
उपमुख्यमंत्री के आवास के सामने सदर अस्पताल में जलजमाव, विजय कुमार सिन्हा ने दिए तत्काल सुधार के निर्देश। 

Lakhisarai News: बिहार के सदर अस्पताल में 4 अगस्त 2025 को भारी बारिश के बाद जलजमाव की गंभीर स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को सामने ला दिया। यह अस्पताल उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास के ठीक सामने स्थित है, फिर भी इसके परिसर में चारों ओर पानी भरा हुआ था। मरीजों और उनके परिजनों को पानी से भरे रास्तों से गुजरकर इलाज के लिए पहुंचना पड़ा, जिससे उनकी परेशानियां बढ़ गईं। स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मियों ने जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए, क्योंकि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस स्थिति पर गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

4 अगस्त 2025 को लखीसराय में रुक-रुक कर हुई बारिश ने शहर के कई हिस्सों, विशेष रूप से सदर अस्पताल परिसर को जलमग्न कर दिया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार, वार्डों के रास्ते, और यहां तक कि कर्मचारी क्वार्टर तक पानी में डूब गए। डीएम रोड, जो अस्पताल के सामने से गुजरती है, पर एक फीट तक पानी जमा हो गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी हुई। कई मरीजों को स्ट्रेचर पर पानी भरे रास्तों से ले जाना पड़ा, जबकि कुछ को कर्मचारियों ने कंधे पर उठाकर वार्ड तक पहुंचाया।

स्थानीय निवासी रमेश यादव ने बताया, “अस्पताल में पानी भरा हुआ था। मेरी मां को बुखार की वजह से भर्ती करना था, लेकिन पानी के कारण हमें अंदर जाने में बहुत दिक्कत हुई।” अस्पताल कर्मियों ने भी जलनिकासी की खराब व्यवस्था पर नाराजगी जताई। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हर साल बारिश में यही हाल होता है। जलनिकासी के लिए लाखों रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखता।”

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जो लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं, ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया। 4 अगस्त को अपने आवास के सामने अस्पताल के हालात का जायजा लेने के बाद, उन्होंने जिला प्रशासन और नगर परिषद के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जलजमाव की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सिन्हा ने कहा, “यह शर्मनाक है कि मेरे आवास के सामने स्थित सदर अस्पताल में मरीजों को इस तरह की परेशानी हो रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए उन्होंने नगर परिषद को नालियों की सफाई और मरम्मत का काम तुरंत शुरू करने का आदेश दिया। साथ ही, उन्होंने जिला प्रशासन से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी कि जलजमाव की समस्या बार-बार क्यों हो रही है।

लखीसराय में जलजमाव कोई नई समस्या नहीं है। हाल के वर्षों में बारिश के मौसम में शहर के कई हिस्से, जैसे रांची रोड, टेलीफोन एक्सचेंज, नईसराय, कल्याणपुर, और मंसूर नगर, नियमित रूप से जलमग्न हो जाते हैं। खास तौर पर सदर अस्पताल के आसपास की डीएम रोड और बाजार समिति क्षेत्र में जलनिकासी की खराब व्यवस्था के कारण हर बारिश में पानी भर जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियां या तो जाम रहती हैं या उनकी ढलान और डिजाइन सही नहीं है, जिससे पानी सड़कों पर जमा हो जाता है।

नगर परिषद ने पिछले पांच वर्षों में जलनिकासी के लिए कई योजनाओं पर काम करने का दावा किया है, जिसमें नालियों की सफाई और नए ड्रेनेज सिस्टम की स्थापना शामिल है। हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये योजनाएं कागजों तक सीमित रहती हैं। एक स्थानीय दुकानदार, मोहन सिंह, ने बताया, “हर साल बारिश से पहले नालियों की सफाई की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और होती है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों और अस्पताल में पानी भर जाता है।”

सदर अस्पताल लखीसराय का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां आसपास के गांवों और कस्बों से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। जलजमाव के कारण मरीजों को न केवल अस्पताल पहुंचने में दिक्कत हुई, बल्कि वार्डों में भी पानी घुसने से इलाज प्रभावित हुआ। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, और बच्चों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ा। एक मरीज के परिजन, सुनीता देवी, ने कहा, “हम अपने बच्चे को बुखार के लिए लेकर आए थे, लेकिन अस्पताल में पानी भरा होने के कारण हमें उसे गोद में उठाकर वार्ड तक ले जाना पड़ा। अगर बीमार व्यक्ति अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं है, तो वह कहां जाएगा?”

अस्पताल कर्मियों ने बताया कि जलजमाव के कारण मेडिकल उपकरणों और दवाइयों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। कुछ वार्डों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई, क्योंकि पानी बिजली के पैनल तक पहुंच गया था।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। कई स्थानीय लोगों ने X पर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने लिखा, “उपमुख्यमंत्री के घर के सामने अस्पताल का यह हाल है, तो बाकी जगहों का क्या होगा? प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान करे।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी जलजमाव की समस्या बनी हुई है। यह प्रशासन की नाकामी है।”

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया। राजद के स्थानीय नेता धनवीर यादव ने कहा, “लखीसराय में उपमुख्यमंत्री का आवास है, फिर भी उनके सामने अस्पताल में पानी भरा हुआ है। यह सरकार की विकास योजनाओं की हकीकत दिखाता है।” दूसरी ओर, सिन्हा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और जल्द ही स्थिति सुधरेगी।

लखीसराय की यह घटना बिहार के अन्य शहरों में बारिश के मौसम में होने वाली जलजमाव की समस्या का एक हिस्सा है। मधुबनी, भागलपुर, और बिहारशरीफ जैसे शहरों में भी हाल की बारिश ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को जलमग्न कर दिया। मधुबनी में पंचवटी चौक और महिला कॉलेज रोड जैसे क्षेत्रों में जलनिकासी की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानी हुई। इसी तरह, भागलपुर में भी जलजमाव ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में जलजमाव की समस्या पुरानी नालियों, अनियोजित शहरीकरण, और नदियों के किनारे बस्तियों के कारण बढ़ रही है। लखीसराय में किऊल नदी के पास बसे कई मोहल्लों में जलनिकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों और घरों में जमा हो जाता है।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पहले भी लखीसराय में जलजमाव की समस्या को हल करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की थी। इनमें एनएच 80 पर सड़क निर्माण, किऊल नदी पर आरसीसी पुल, और नालियों की मरम्मत शामिल हैं। हालांकि, इन योजनाओं का कार्यान्वयन धीमा रहा है, जिसके कारण स्थानीय लोग निराश हैं।

सिन्हा ने हाल ही में एक जनकल्याण संवाद कार्यक्रम में कहा था कि उनकी सरकार “जनसेवा और विकास” के लिए प्रतिबद्ध है। इस बार उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जलनिकासी के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जाए और इसे समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

लखीसराय के सदर अस्पताल में जलजमाव की घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को सामने ला दिया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास के ठीक सामने होने के बावजूद, यह समस्या जिला प्रशासन और नगर परिषद की नाकामी को दर्शाती है। सिन्हा के त्वरित निर्देशों और कार्रवाई से उम्मीद है कि स्थिति में सुधार होगा, लेकिन स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना और जवाबदेही जरूरी है। यह घटना बिहार के अन्य शहरों में बारिश के मौसम में होने वाली समस्याओं का भी प्रतीक है, जहां जलनिकासी की कमी मरीजों और आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।

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