वाराणसी न्यूज़: यूपी में ग्रीन कोल प्रोजेक्ट की शुरुआत आत्मनिर्भर भारत के लिए एक नई पहल।

Jun 12, 2024 - 12:22
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वाराणसी न्यूज़: यूपी में ग्रीन कोल प्रोजेक्ट की शुरुआत आत्मनिर्भर भारत के लिए एक नई पहल।
  • भारत की सबसे बड़ी हरित कोयला परियोजनाओं से देश को मिलेगी एक नई दिशा
  • 900 टन प्रतिदिन क्षमता के साथ एनटीपीसी के लिए मैकॉबर बीके नोएडा में भारत की सबसे बड़ी हरित कोयला परियोजना करेगी स्थापित
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में हरित कोयला परियोजना का उद्घाटन करते समय कर चुके हैं सराहना

वाराणसी। उत्तर प्रदेश अब आत्मनिर्भर भारत के लिए एक नई पहचान बनने जा रहा है और यह सब हरित कोयला परियोजना के कारण संभव होने जा रहा है। वाराणसी हरित कोयला परियोजना (ग्रीन कोल प्रोजेक्ट) की सफलता के बाद अपनी नवीन तकनीक के साथ वेस्ट टू एनर्जी के क्षेत्र में अग्रणी मैकॉबर बीके प्राइवेट लिमिटेड (एमबीएल) उत्तर प्रदेश के नोएडा में 900 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता वाली सबसे बड़ी परियोजना स्थापित करने जा रहा है।

इसके साथ ही यह परियोजना भारत के अन्य स्थानों पर भी लगेगी। जिसमे भोपाल और हुबली में क्रमशः 500 और 400 टन क्षमता की परियोजना होगी। वाराणसी परियोजना सहित तीन और परियोजनाएं अगस्त 2025 तक प्रति दिन 2400 टन नगरपालिका कचरे का प्रबंधन देखेगी। एनटीपीसी को इन चार परियोजनाओं से सामूहिक रूप से प्रति दिन 800 टन से अधिक हरित कोयला प्राप्त होने की उम्मीद है।

लगभग चार साल पहले भारत की बिजली उत्पादन की महारथी एनटीपीसी लिमिटेड ने नगर निगम के कचरे से हरित कोयला (टॉरिफाइड चारकोल) बनाने की योजना बनाई थी। इस परियोजना को निष्पादित करने के लिए इसकी सहायक कंपनी एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड ने मैकॉबर बीके को ईपीसी आधार पर परियोजना प्रदान की।

ग्रीन कोल प्लांट की कुल क्षमता 600 टीपीडी कचरा प्रबंधन क्षमता है। यह संयंत्र 600 टीपीडी म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) के इनपुट के साथ 200 टन हरित कोयला उत्पन्न करता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में वाराणसी हरित कोयला परियोजना का उद्घाटन करते हुए इस परियोजना की सराहना की थी। जो स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश के लिए पर्यावरण और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है।

मैकॉबर बीके के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम गुप्ता ने कहा कि यह ग्रीन कोल परियोजना मेक इन इंडिया पहल का एक प्रमुख उदाहरण है। जो मैकॉबर बीके के आत्मनिर्भर भारत मिशन के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता है। दुनिया में अपनी तरह के पहले प्लांट में एमबीएल ने एनटीपीसी लिमिटेड के लिए सफलतापूर्वक हरित कोयले का उत्पादन किया है। जो बिजली क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े कोयला उपभोक्ताओं में से एक है।

वाराणसी में टेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के बाद सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (सीपीएसयू) ने मैकॉबर बीके को ग्रीन कोल प्लांट्स के अद्भुत प्रदर्शन के लिये सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि हम ग्रेटर नोएडा में 900 टीपीडी की क्षमता वाला सबसे बड़ा वेस्ट टू ग्रीन कोल प्लांट स्थापित करेंगे।

गौतम गुप्ता ने कहा कि टेक्नोलॉजी में बदलाव के साथ हम निरंतर रिसर्च के साथ इस क्षेत्र में विकास और वाराणसी में प्राप्त अनुभव के साथ टेक्नोलॉजी को और भी बेहतर कर रहे हैं। आगामी परियोजनाओं में हम और भी प्रगति करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दुनिया के पहले वाणिज्यिक प्लांट के उद्घाटन के साथ मैकॉबर बीके ने अपनी अभिनव क्षमता का प्रदर्शन किया और स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक कचरे को जीवाश्म ईंधन के व्यवहार्य विकल्प में बदलने का कार्य किया।

जिससे अपशिष्ट से संबंधित चुनौतियों का समाधान करते हुए ऊर्जा उत्पादन में एक नई क्रांति आई है।।मैकॉबर बीके की वेस्ट टू एनर्जी की प्रक्रिया अपशिष्ट गड्ढे के अंदर सावधानीपूर्वक एमएसडब्ल्यू के संग्रह के साथ शुरू होती है। इसके बाद लीचेट उपचार संयंत्र में लीचेट का उपचार और विशेष ड्रायर के माध्यम से नमी को हटाना होता है।

सकल कैलोरी मान में जीवाश्म ईंधन कोयले को पार करने के लिए उच्च कैलोरी चारकोल पाउडर का उत्पादन करने के लिए कचरे को विशेष मैकॉबर के उपकरण (रिएक्टर) में बदलने से पहले उसके आकार में कमी और धातु घटकों को खत्म कर देती है। यह प्रक्रिया आत्मनिर्भर हीटिंग, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और कार्बन तटस्थता को बढ़ावा देने के लिए अस्थिर गैसों का उपयोग करती है।

इससे न केवल वेस्ट के प्रबंधन की चुनौतियां का समाधान मिलता है बल्कि कोयला-संबंधी लागत, खनन और कचरे के ढेर से जुड़े स्वास्थ्य खतरों को कम करके हर स्तर पर लाभ प्राप्त होता है। सीनियर जनरल मैनेजर प्रोजेक्ट्स बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि हम न केवल वेस्ट के प्रबंधन की चुनौतियों का समाधान करते हैं।

बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण, कार्बन न्यूट्रॅलिटी और आर्थिक लाभ भी प्रदान करने में योगदान निभाते हैं। इसी कारण मैकॉबर बीके वेस्ट टू एनर्जी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका के रूप में उभरा है। इन ग्रीन कोल परियोजनाओं से पर्यावरण को लाभ तो होता ही है, साथ ही देशभर में इससे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी राहत मिलती है।

हरित कोयला उत्पादन का लक्ष्य कई लैंडफिल साइटों में प्रदूषण और कई प्रकार की पर्यावरणीय चुनौतियों से समाधान प्राप्त करना है। ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम गुप्ता ने कहा कि मौजूदा समय में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट अपनी गुणवत्ता और अधिक निवेश के कारण संघर्ष करते हैं।

जिस कारण बिजली की कीमतें भी अधिक हो जाती हैं ऐसे में एक नई दृष्टिकोण की आवश्यकता है। हरित कोयले का उपयोग भारत के ऊर्जा परिदृश्य के लिए अपार संभावनाएं रखता है। थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के साथ मिश्रण करने की क्षमता के साथ यह सरकारी आदेशों में एक स्थायी विकल्प के रूप में भी कार्य करता है।

कल्पना कीजिए कि अगर देश में 50 प्रतिशत से अधिक जीवाश्म ईंधन को प्रतिस्थापित करने के लिए पर्याप्त हरित कोयला उत्पादन क्षमता होती तो पर्यावरण पर इसका कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता। ऐसे में भारत की सबसे बड़ी हरित कोयला परियोजनाओं से देश को एक नई दिशा मिलेगी।

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