Hardoi: भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की नगरी में श्रवण देवी मंदिर में निर्माण-कार्य का किया निरीक्षण
समिति के सदस्यों ने पूर्व निर्मित सत्संग भवन में आंशिक सुधार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभापति ने निर्माणाधीन हॉल का कार्य पूर्ण करने के भी निर्देश दिए हैं।
- असुर राज हिरण्यकशिपु से जुड़ा है प्रह्लाद कुंड का इतिहास, यहीं से हुई थी होली की शुरुआत
Hardoi News INA.
भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की नगरी हरदोई में यूपी विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति ने श्रवण देवी मंदिर में पर्यटन विकास निगम द्वारा कराए जा रहे मरम्मत व निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति के सदस्यों ने पूर्व निर्मित सत्संग भवन में आंशिक सुधार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभापति ने निर्माणाधीन हॉल का कार्य पूर्ण करने के भी निर्देश दिए हैं। डीएम मंगला प्रसाद सिंह, एसपी नीरज कुमार जादौन, सीडीओ सौम्या गुरुरानी सहित कई अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि प्रह्लाद कुंड को विकसित कर उसमें पानी भरवाने की व्यवस्था की जाए और पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया जाए।
बता दें कि इससे पहले 2019 में उस समय के जिलाधिकारी पुलकित खरे ने ऐतिहासिक प्रहलाद कुंड को आकर्षक बनाने की मुहिम के तहत कम से कम सात सीढि़यों तक पानी और बीच में मूर्ति के साथ ही उसके चारों तरफ लाइट लगवाने का निर्देश दिया था। उन्होंने कुंड के बीच के खम्भे की ऊंचाई बढ़ाने के भी निर्देश दिए थे। उनके समय में जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार को निर्देश मिले थे कि औषधि उद्यान में औषधि वृक्ष लगवायें तथा योगा करने आने वाले लोगों के लिए चयनित स्थान पर घास लगवायें ताकि लोग आराम से बैठक कर योगा कर सकें।
प्रहलाद कुण्ड की दीवारों पर चित्र एवं स्लोगन के सम्बन्ध में भी श्री खरे ने निर्देश दिये थे कि दीवारों पर स्कूली बच्चों के माध्यम से आकर्षक चित्रकला करायें। जिलाधिकारी पुलकित खरे के अन्य जिले में जाने के बाद श्रवण देवी मंदिर और प्रह्लाद कुंड फिर से उपेक्षा का शिकार होने लगा था। यूपी विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति के निरीक्षण करने से लोगों में यहां के जीर्णोद्धार को लेकर कुछ उम्मीद जगी है।
... इसलिए है श्रवण देवी का ऐतिहासिक महत्व...
उत्तर प्रदेश के हरदोई में सिद्ध शक्ति पीठ मां श्रवण देवी का स्थान अद्भुत शक्तियों से परिपूर्ण है। देवी पुराण के मुताबिक, माता का कान यहीं पर गिरा था। मंदिर के पुजारी सुरेश तिवारी ने बताया कि देवी पुराण में यह वर्णित है कि राजा दक्ष प्रजापति ने एक बड़े यज्ञ का अनुष्ठान किया था, जिसमें उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं का आवाह्न किया था, लेकिन इस यज्ञ में अपने जमाई भगवान शंकर को आमंत्रित नहीं किया था। भगवान शिव के इसी अपमान को देखते हुए सती ने यज्ञ के विशालकाय हवन कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए थे। जब इसकी सूचना भगवान शिव को लगी तो वह विराट रूप में यज्ञ को विध्वंस करने के बाद करुण क्रंदन करते हुए सती का अधजला शरीर लेकर सारे जगत में भ्रमण करने लगे थे। शिव के इस विराट कंधे पर मां सती के आधे जले शरीर और डरावने रूप को देखकर देवताओं ने ब्रह्मा और विष्णु का आवाह्न किया था। विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए थे।
पृथ्वी पर जहां-जहां सती के अंग गिरे हैं, वहां पर सिद्ध शक्तिपीठ की स्थापना हुई है। देवी पुराण के मुताबिक, देवी माता सती का कर्ण भाग हरदोई के इसी स्थान पर गिरा था, जो माता श्रवण देवी के नाम से विख्यात है। माता श्रवण देवी की मूर्ति पाषाण पंचमुखी है। इस मूर्ति का किसी भी कारीगर के द्वारा निर्माण नहीं किया गया है। वैष्णो माता के दरबार के बाद में यह दूसरी पंचमुखी पाषाण मूर्ति है। माता के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से पंच सुखों की प्राप्ति होती है और पंचमहाभूत भी शांत होते हैं। इंसानी शरीर पांच महा भूतों से मिलकर बना है, जिनमें छिति, जल, पावक, गगन, समीरा शामिल है। इसलिए माता की पूजा-अर्चना करने से रिद्धि-सिद्धि, सुख-शांति, स्वास्थ्य, विद्या का लाभ इंसान को प्राप्त होता है। देवी भागवत में भी 108 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है, जिसमें इस शक्तिपीठ का भी उल्लेख किया गया है।
जानिए प्रह्लाद कुंड का इतिहास....
पौराणिक कथाओं के अनुसार कभी हरदोई का राजा हिरण्यकश्यप था। वह राक्षस था इसलिए वह देवताओं से बैर रखता था और अपने राज्य का नाम भी हरि द्रोही रखा था। हिरण्यकश्यप (hiranyakashyap) का वध भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर किया था। हिरण्यकश्यप का एक पुत्र हुआ जिसका नाम उसने प्रह्लाद (prahlad kund) रखा। प्रहलाद जन्म से ही भगवान विष्णु का भक्त था और विष्णु जी की पूजा अर्चना में लगा रहता था। लेकिन हिरण्यकश्यप को यह अच्छा नहीं लगा कि राक्षस कुल का उसका बेटा भगवान का पूजा करें।
इसलिए उसने कई बार प्रहलाद को भगवान विष्णु की पूजा नहीं करने के लिए कहा लेकिन प्रहलाद नहीं माना और वह विष्णु जी की पूजा में लगा रहा। प्रहलाद को मारने के लिए होलिका (Holika) की गोद में बैठाया जब समझाने के बाद भी प्रहलाद ने विष्णु जी की भक्ती नहीं छोड़ी तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को तमाम यातनाएं दीं। लेकिन प्रहलाद को हर बार भगवान विष्णु ने बचाया। भगवान नरसिंह के अवतार और भक्त प्रह्लाद के साथ होलिका दहन की पौराणिक कथा को लेकर कमोवेश सभी ने पढ़ा है और भक्त प्रह्लाद की भक्ति की गाथा अपने आप में अनूठी है।
नैमिषारण्य धाम की तरह ही हरदोई को लेकर भी धर्म अध्यात्म में मान्यता है। हरदोई शहर में स्थित भक्त प्रह्लाद का घाट और नरसिंह भगवान का मंदिर हमें हिरणाकश्यप की नगरी की याद दिलाता है। इस परिसर से करीब तीन कोस की दूरी पर भगवान वामन अवतार का मंदिर है जिस स्थान को वाबन कस्बा के रूप में जाना जाता है जब कि इन परिसरों से करीब 12 कोस पर नैमिषारण्य है और 6 कोस की दूरी पर ब्रम्हावर्त सांडी झील के पास है।
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