Hardoi News: गोचर एवं चारागाह की भूमि पर अवैध अतिक्रमण- शासन ने चारागाह की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने एवं हरा चारा बोआई के दिए हैं निर्देश। 

जिला प्रशासन की ओर से भी सभी तहसीलों को चारागाह की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अब तक आदेशों का ....

Nov 15, 2024 - 20:21
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Hardoi News: गोचर एवं चारागाह की भूमि पर अवैध अतिक्रमण- शासन ने चारागाह की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने एवं हरा चारा बोआई के दिए हैं निर्देश। 

हरदोई: गोचर एवं चारागाह की भूमि पर अवैध अतिक्रमण से आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं को हरा चारा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। हरा चारा न मिलने एवं सूखा भूसा खाने से पशु बीमार होकर मर रहे हैं। यह हाल तब है जबकि शासन स्तर से गोचर एवं चारागाह की भूमि से अतिक्रमण हटाने एवं पशुओं के लिए हरा चारो बोआई करवाने के निर्देश हैं।

जनपद में 4500 हेक्टेयर से अधिक गोचर एवं चारागाह की भूमि कागजों में सुरक्षित है, पर तमाम प्रयासों के बाद भी ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार चार सौ हेक्टेयर भूमि पर भी हरा चारा की बोआई नहीं करवा पाए हैं। जबकि शासन से गोचर एवं चारागाह की भूमि से अतिक्रमण हटाने, उन पर हरा चारा की बोआई करवाने एवं आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा उपलब्ध करवाने के निर्देश हैं।

जिला प्रशासन की ओर से भी सभी तहसीलों को चारागाह की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अब तक आदेशों का शतप्रतिशत अनुपालन नहीं हो सका है। ऐसे में अव्यवस्थाओं का खामियाजा आश्रय स्थलों में संरक्षित 50 हजार से अधिक पशुओं को भुगतना पड़ रहा है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया गोचर एवं चारागाह की भूमि से अतिक्रमण हटाने एवं हरा चारो बोवाई करवाने की प्रगति की रिपोर्ट पशुपालन निदेशालय की वेबसाइट पर फीड करवाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों के अनुपालन की नियमित रूप से समीक्षा भी की जाएगी।

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  • तहसील प्रशासन को हटाना अतिक्रमण, ग्राम पंचायतों को करना हरा चारा की बोआई

शासन एवं जिला प्रशासन के निर्देशानुसार तहसील प्रशासन को गोचर एवं चारागाह की भूमि को चिन्हित करना होगा। चिन्हित भूमि से अतिक्रमण हटवाने की जिम्मेदारी भी तहसील प्रशासन की होगी। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल का भी सहयोग लिए जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। ग्राम पंचायतों को इन गोचर एवं चारागाह की भूमि पर हरा चारा की बोआई करनी होगी। इसके लिए ग्राम निधि में आवंटित धनराशि का उपयोग किया जाएगा। इस धनराशि से जुताई, बीज की खरीद, सिंचाई व इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाले मानव श्रम में वहन धनराशि का व्यय किया जाएगा।

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