R.R. Inter College विवाद पर एक शिक्षक के शब्द- शिक्षक का सम्मान: अनुशासन की रक्षा में जरूरी प्रतिकार

घटना 18 सितंबर को दोपहर के समय की है। मोहम्मद उबेद, जो साकिन के प्रधान पति गाजी के पुत्र हैं, का नाम कक्षा से कट चुका था। फिर भी, वे स्कूल पहुंचे और अपनी क

Sep 22, 2025 - 00:53
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R.R. Inter College विवाद पर एक शिक्षक के शब्द- शिक्षक का सम्मान: अनुशासन की रक्षा में जरूरी प्रतिकार
R.R. Inter College विवाद पर एक शिक्षक के शब्द- शिक्षक का सम्मान: अनुशासन की रक्षा में जरूरी प्रतिकार

हरदोई जिले के साकिन क्षेत्र में स्थित आरआर इंटर कॉलेज में हाल ही में एक दुखद घटना घटी, जो न केवल शिक्षकों की गरिमा पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने की चुनौतियों को भी उजागर करती है। यह मामला कक्षा 11 के छात्र मोहम्मद उबेद और शिक्षक मनोज मिश्रा के बीच अनुशासनिक विवाद से जुड़ा है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए आंशिक वीडियो ने इसे एकतरफा रंग दे दिया है।सच्चाई यह है कि एक शिक्षक का सम्मान बचाना हर अभिभावक और समाज का दायित्व होना चाहिए, क्योंकि बिना सम्मान के कोई शिक्षक अनुशासन कायम नहीं रख सकता। आइए, इस घटना के पूरे संदर्भ को समझें और शिक्षक के पक्ष को मजबूती से रखें।

घटना का पूरा चित्रण: अनुशासन का उल्लंघन, न कि हिंसा का प्रकोप

घटना 18 सितंबर को दोपहर के समय की है। मोहम्मद उबेद, जो साकिन के प्रधान पति गाजी के पुत्र हैं, का नाम कक्षा से कट चुका था। फिर भी, वे स्कूल पहुंचे और अपनी कक्षा में जाने के बजाय लड़कियों वाली कक्षा में घुस गए। यह स्पष्ट रूप से स्कूल नियमों का उल्लंघन था न केवल अनुशासनहीनता, बल्कि संभावित रूप से छात्राओं की गोपनीयता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य।शिक्षक मनोज मिश्रा ने इसे रोकने का प्रयास किया। उन्होंने उबेद को समझाया, "अपना नाम लिखाओ और बताओ कि इस कक्षा में क्यों आ रहे हो?" लेकिन उबेद ने न केवल अनसुना किया, बल्कि शिक्षक पर ही हाथ साफ कर दिया। यह प्रतिकार स्वरूप का हमला था, जो मात्र 5 सेकंड का वीडियो उबेद के भाइयों ने ही रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया और वह भी आंशिक रूप से, ताकि संदर्भ गुम हो जाए।पूर्ण घटना को देखें तो यह स्पष्ट है कि शिक्षक ने पहले शांतिपूर्ण तरीके से हस्तक्षेप किया। अनुशासन बनाए रखना एक शिक्षक का प्राथमिक कर्तव्य है, खासकर जब छात्र बार-बार उल्लंघन करता हो। उबेद के चार भाई भी इसी कॉलेज में पढ़ते हैं, और सूत्रों के अनुसार, परिवार का इतिहास विवादास्पद रहा है आए दिन बवाल और गाजी की कार्यशैली से स्थानीय लोग वाकिफ हैं। ऐसे में, शिक्षक का प्रतिकार न केवल स्वाभाविक था, बल्कि आवश्यक भी, क्योंकि यह उनके सम्मान और स्कूल की गरिमा की रक्षा का प्रश्न था। क्या हम अपेक्षा करेंगे कि एक शिक्षक अपमान सहते हुए चुप रहे, जबकि छात्र सार्वजनिक रूप से आक्रमण करे?

सोशल मीडिया का विकृत चित्र: आंशिक सत्य का जाल

वायरल वीडियो ने शिक्षक को हिंसक दिखाया, लेकिन सच्चाई उलट है। यह वीडियो छात्रों द्वारा ही बनाया गया था, और इसमें केवल प्रतिकार का हिस्सा दिखाया गया पूर्व संदर्भ गायब। इसके बाद, गाजी और उनके समर्थकों ने कॉलेज पर धावा बोल दिया।पत्थरबाजी हुई, पुलिस बुलानी पड़ी। यह दुखद है कि एक अनुशासनिक मामला राजनीतिक रंग ले लेता है, जहां शिक्षक को खलनायक ठहरा दिया जाता है। लेकिन याद रखें, शिक्षक मनोज मिश्रा ने न केवल स्कूल नियमों का पालन कराया, बल्कि छात्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की। यदि उबेद की लड़कियों वाली कक्षा में घुसने की आदत जारी रहती, तो क्या छात्राओं का भविष्य सुरक्षित रहता?

प्रबंधन की भूमिका: संतुलित फैसला, न कि दबाव का शिकार

कॉलेज प्रबंधन ने समझदारी दिखाई। अनुशासनिक समिति ने विपक्षी पक्षों को बुलाया और कहा, "यदि आप सख्त कार्रवाई नहीं चाहते, तो बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखें। हम उबेद को केवल परीक्षा देने की अनुमति देंगे, निष्कासन नहीं करेंगे।" यह फैसला उचित है, क्योंकि गाजी का राजनीतिक प्रभाव है, लेकिन इससे शिक्षकों के हितों की रक्षा भी हो रही है। प्रशासन और पुलिस कुछ नहीं कर सकते, लेकिन समिति का निर्णय बाध्यकारी है। यह दर्शाता है कि प्रबंधन शिक्षक के सम्मान को प्राथमिकता दे रहा है, बिना अतिरिक्त विवाद बढ़ाए।

शिक्षक का सम्मान क्यों सर्वोपरि?

भाइयों और बहनों, एक शिक्षक समाज का आधार स्तंभ है। वे न केवल ज्ञान देते हैं, बल्कि अनुशासन सिखाते हैं जो भविष्य की नींव है। यदि छात्र हमला करें और शिक्षक चुप रहें, तो स्कूल जंगल कैसे बनेंगे? यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है: क्या अभिभावक अपने बच्चों को नियम तोड़ने की छूट दें? गाजी जैसे प्रभावशाली लोग दबाव डाल सकते हैं, लेकिन सत्य हमेशा शिक्षक के पक्ष में होता है। मनोज मिश्रा जैसे शिक्षकों को सम्मान मिलना चाहिए, न कि कलंक। समाज को एकजुट होकर शिक्षकों की रक्षा करनी होगी, ताकि आने वाली पीढ़ी अनुशासित बने।

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