उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में शादी के बाद दुल्हन ने सुहागरात में दूल्हे से इनकार किया।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सात फेरे लेने के बाद ससुराल पहुंची दुल्हन ने सुहागरात
- प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी दुल्हन ने कोतवाली में की शिकायत, मामला पुलिस पहुंचा
- घरवालों पर जबरदस्ती शादी कराने का आरोप, आपसी सहमति से हो गया तलाक
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सात फेरे लेने के बाद ससुराल पहुंची दुल्हन ने सुहागरात की रात में दूल्हे के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। दुल्हन ने दूल्हे को ठुकराते हुए कहा कि वह किसी और से प्यार करती है और उसी के साथ रहना चाहती है। घटना शनिवार को गोहांड में संपन्न हुई शादी से जुड़ी है, जहां दूल्हा राठ कस्बे के बुधौलियाना मोहल्ले का निवासी धरम था और दुल्हन बिलरख गांव की मिथलेश। शादी बड़े धूमधाम से हुई, जिसमें दुल्हन के मामा ने मुख्य भूमिका निभाई और सभी पारंपरिक रस्में पूरी की गईं। सात फेरों के बाद अन्य रस्में पूरी होने पर रविवार को विदाई हुई और दुल्हन ससुराल पहुंची, जहां उसका जमकर स्वागत किया गया। लेकिन सुहागरात के दौरान जब दूल्हे ने घूंघट उठाने की कोशिश की, तो दुल्हन ने उसे दूर कर दिया और खुद को दूसरे की अमानत बताते हुए कमरे से बाहर कर दिया। इससे ससुराल में हड़कंप मच गया और परिवार वाले हैरान रह गए।
सुहागरात की रात में दुल्हन ने दूल्हे से स्पष्ट कहा कि उसे वह लड़का पसंद नहीं है और वह किसी और से प्यार करती है। उसने घरवालों पर आरोप लगाया कि उन्होंने मारपीट कर जबरदस्ती शादी कराई, जबकि वह पहले से ही किसी और के साथ संबंध में थी। दूल्हा हाथ जोड़कर समझाता रहा कि शादी हो चुकी है और अब साथ रहना चाहिए, लेकिन दुल्हन अपनी जिद पर अड़ी रही। मामला इतना बढ़ गया कि सोमवार को दुल्हन ने राठ कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और हंगामा किया। दूल्हा भी थाने पहुंचा और स्थिति को समझाने की कोशिश की। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई की और पंचायत बिठाई। जांच में पाया गया कि दुल्हन की जिद बहुत मजबूत थी और वह किसी भी हाल में ससुराल में नहीं रहना चाहती थी। पुलिस ने दोनों परिवारों को समझाया और आपसी सहमति से तलाक की व्यवस्था कराई। दूल्हा ने कहा कि अगर दुल्हन पहले बता देती तो बदनामी नहीं होती और इतना खर्च नहीं होता।
यह घटना सामाजिक दबाव और जबरदस्ती शादियों के खतरों को सामने लाती है। दुल्हन के अनुसार, शादी से पहले उसने परिवार को अपनी पसंद के बारे में बताया था, लेकिन परिवार ने सामाजिक प्रतिष्ठा और अन्य कारणों से जबरदस्ती आगे बढ़ाया। शादी के दौरान सात फेरे पूरे होने से सामाजिक रूप से विवाह वैध माना गया, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर दुल्हन तैयार नहीं थी। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने सहमति जताई और तलाक हो गया। दूल्हे के परिवार ने भी इसे स्वीकार कर लिया क्योंकि मामला और बढ़ने से सामाजिक प्रतिष्ठा को और नुकसान होता। पुलिस ने कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं किया क्योंकि दोनों पक्षों में आपसी रजामंदी थी और कोई हिंसा या धोखाधड़ी का स्पष्ट सबूत नहीं मिला। जांच के दौरान दुल्हन ने प्रेमी का नाम नहीं लिया, लेकिन अपनी जिद पर अड़ी रही कि वह उसी के साथ रहना चाहती है।
हमीरपुर जिले में ऐसी घटनाएं कभी-कभी सामने आती हैं, जहां प्रेम संबंधों के कारण शादियां टूटती हैं या विवाद होते हैं। इस मामले में शादी की तैयारियां और खर्च दोनों तरफ से काफी हुआ था, लेकिन परिणाम अप्रत्याशित रहा। दूल्हा परिवार सदमे में है क्योंकि विदाई के बाद स्वागत हुआ था और सब कुछ सामान्य लग रहा था। दुल्हन की जिद से ससुराल पक्ष को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। पुलिस ने मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को समझाया कि जबरदस्ती का रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सकता। तलाक के बाद दुल्हन अपने मायके लौट गई और दूल्हा अकेला रह गया। यह घटना परिवारों के लिए सबक है कि शादी से पहले दोनों पक्षों की सहमति और पसंद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पुलिस जांच में सामने आया कि दुल्हन ने शादी के दौरान कोई विरोध नहीं जताया था, लेकिन सुहागरात में सच सामने आया। दूल्हे ने कहा कि अगर पहले पता चलता तो वह शादी नहीं करता और बदनामी से बच जाता। दोनों परिवारों ने मिलकर मामले को शांतिपूर्वक सुलझाया। पुलिस ने सलाह दी कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता रखी जाए। घटना से इलाके में चर्चा हुई और लोग जबरदस्ती शादियों के नुकसान पर बात कर रहे हैं। दुल्हन की जिद और प्रेमी के प्रति निष्ठा ने मामले को जटिल बनाया, लेकिन अंत में सहमति से समाधान निकला। पुलिस ने दोनों पक्षों को चेतावनी दी कि आगे कोई विवाद न हो।
यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक दबाव के बीच टकराव को दर्शाता है। दुल्हन ने अपनी पसंद को प्राथमिकता दी और जबरदस्ती के खिलाफ आवाज उठाई। दूल्हे की समझदारी से मामला हिंसक नहीं हुआ। पुलिस की मध्यस्थता से तलाक हुआ, जो दोनों के लिए राहत की बात थी। इलाके में ऐसी घटनाओं से जागरूकता बढ़ रही है कि शादी में दोनों की रजामंदी जरूरी है। परिवारों को भी सोचना चाहिए कि जबरदस्ती से रिश्ते टिकते नहीं।
हमीरपुर की इस घटना ने दिखाया कि प्रेम और जबरदस्ती के बीच टकराव कितना दर्दनाक हो सकता है। पुलिस और परिवारों की समझदारी से मामला सुलझा, लेकिन सामाजिक सबक छोड़ गया। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए खुली बातचीत और सहमति पर जोर देना जरूरी है।
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