Ayodhya : सरयू तट पर बस्तर की रामायण कालीन औषधियां लगेंगी, औषधि पार्क में सजेगी दंडकारण्य की दुर्लभ जड़ी-बूटियां
प्रभु श्रीराम के वनवास काल में दंडकारण्य का बड़ा हिस्सा बस्तर में था। श्रीराम शोध संस्थान, नई दिल्ली ने सत्तर वर्षों के शोध के बाद बस्तर को राम वनगमन पथ का सबसे मह
अयोध्या: रामनगरी अयोध्या के सरयू तट पर बन रहे रामायण कालीन वन औषधि पार्क में बस्तर के जंगलों की दुर्लभ और जीवनरक्षक जड़ी-बूटियां लगाई जाएंगी। इन औषधियों को बस्तर में पांच नर्सरियों में तैयार किया जा रहा है, जिससे पार्क जल्द ही इनकी सुगंध और औषधीय गुणों से महक उठेगा।
प्रभु श्रीराम के वनवास काल में दंडकारण्य का बड़ा हिस्सा बस्तर में था। श्रीराम शोध संस्थान, नई दिल्ली ने सत्तर वर्षों के शोध के बाद बस्तर को राम वनगमन पथ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध के कारण बस्तर की औषधियां अयोध्या में नई पहचान बनाएंगी।
पार्क में अमर कंद, हनुमान बल, कालमेघ, राम तुलसी, शतावरी, चिरायता, मंडुक पर्णी, सीता अशोक, काली निर्गुंडी, नीलकंठ, दशमूल, काली हल्दी, पद्म गिलोय, पीपली और भ्रिंगराज जैसी दुर्लभ जड़ी-बूटियां लगाई जाएंगी। इन पौधों की तैयारी श्रीराम शोध संस्थान के बस्तर निवासी कार्यकारिणी सदस्य विजय भारत के नेतृत्व में तेजी से चल रही है।
साथ ही बस्तर के कांकेर से कोन्टा के इन्जरम तक करीब 200 किलोमीटर लंबे राम वनगमन मार्ग के दोनों ओर मौलश्री, नीम, चंदन, सीता अशोक, रामफल और सीताफल जैसे वृक्ष लगाए जाएंगे। इससे इस मार्ग पर चलने वाले यात्रियों को श्रीराम के वनवास की स्मृति ताजा होगी। यह पहल रामायण काल की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ लोगों को प्राचीन औषधियों के लाभ से जोड़ेगी।
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