Ballia : बलिया में गंगा के कटान से नौरंगा गांव में तबाही, 37 मकान नदी में समाए, डीएम ने दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से बैरिया तहसील के चक्की नौरंगा, नौरंगा और भगवानपुर जैसे गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए
Report : S.Asif Hussain zaidi
बलिया : जिले में गंगा नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से बढ़ने के कारण बाढ़ और कटान ने भारी तबाही मचाई है। खास तौर पर सदर और बैरिया तहसील के गंगा किनारे बसे गांवों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। बिहार की सीमा से सटे नौरंगा गांव में गंगा की तेज धारा ने पिछले तीन दिनों में 37 पक्के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। कटान की गति इतनी तेज थी कि लोग अपना सामान भी नहीं बचा पाए। हालांकि, जिला प्रशासन के अनुसार, कोई जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है। गंगा का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जगी है।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से बैरिया तहसील के चक्की नौरंगा, नौरंगा और भगवानपुर जैसे गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। नौरंगा गांव के तीन मजरे कटान की चपेट में आए, जिसके कारण कई परिवार बेघर हो गए। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए बांध पर अस्थायी शिविर बनाए गए हैं, जहां पका हुआ भोजन, पीने का पानी, राशन, और अन्य जरूरी सामग्री जैसे चावल, दाल, आलू, मसाला, गुड़ और बिस्किट वितरित किए जा रहे हैं। रात में जनरेटर के माध्यम से प्रकाश की व्यवस्था भी की गई है।
राहत कार्यों के लिए 16 नावें लगाई गई हैं, जो प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने में मदद कर रही हैं। अपर जिलाधिकारी (एडीएम), मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) और अन्य अधिकारी प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें तैनात की हैं, जो बाढ़ पीड़ितों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। अब तक 5,707 लोगों का इलाज किया जा चुका है, और 10,537 ओआरएस पैकेट व 23,194 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था की गई है, और 6,038 पशुओं की जांच और टीकाकरण किया गया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि सभी प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित गृह सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, 22 लोगों को मुआवजे का ऑनलाइन भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। बैरिया के उप जिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने भी नौरंगा गांव का दौरा किया और कटान पीड़ितों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ है। उन्होंने दयाछपरा के पास जमीन अधिग्रहण कर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बात कही।
कटान के कारण नौरंगा गांव के निवासियों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा की कटान ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई परिवार अपने घर और खेत खो चुके हैं और अब तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ विभाग के जूनियर इंजीनियर अमरनाथ वर्मा ने बताया कि कटान रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण कार्य में बाधा आ रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 31 अगस्त 2025 को गंगा का जलस्तर गायघाट में 59.600 मीटर पर स्थिर हो गया था, जो खतरे के निशान 57.615 मीटर से लगभग दो मीटर ऊपर है।
प्रशासन ने जनपदीय आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जो 24 घंटे कार्यरत है। लोग 9454417979, 05498-220832, 05458-220235 और टोल-फ्री नंबर 1077 पर संपर्क कर सकते हैं।
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