मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं: पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना, गो-आश्रय व दुग्ध विकास को मिलेगी नई रफ्तार।
उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में विभागीय अधिकारियों
- पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का जताया आभार
- पशु चिकित्सा शिक्षा को नई ऊर्जा मिलेगी
- बरसात से पूर्व संचारी रोगों की रोकथाम हेतु प्रदेशव्यापी वैक्सीनेशन अभियान चलाने के निर्देश
- गो-आश्रय स्थलों में बायो गैस संयंत्रों के संचालन को बढ़ावा दिया जाये
- कृत्रिम गर्भाधान एवं नस्ल सुधार के कार्यों में तेजी लाने पर जोर
- कन्नौज, गोरखपुर एवं कानपुर के दुग्ध प्लांट शीघ्र शुरू कराने के निर्देश- पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पशुपालन, दुग्ध विकास एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पशु चिकित्सा के छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 4000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये किए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय पशु चिकित्सा शिक्षा को नई ऊर्जा देने वाला है। इससे छात्रों का उत्साहवर्धन होगा तथा पशु चिकित्सा सेवाओं में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।
पशुधन मंत्री ने प्रदेश के गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु गोबर गैस एवं बायो गैस संयंत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और आय सृजन को बढ़ावा दिए जाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि गोबर गैस संयंत्रों से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन पर भी और अधिक बल दिया जाए, जिससे गो-आश्रय स्थलों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित होने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिल सके। प्रदेश सरकार गोसंरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और इसमें गो आश्रय स्थलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में प्रदेश में 131 गोबर गैस संयंत्र स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 5244.75 घन मीटर है। इनमें 66 संयंत्र क्रियाशील हैं, जबकि 28 संयंत्र एनजीओ द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
बैठक में मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए प्रदेशभर में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए और पशुओं को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने हेतु व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी जनपद में वैक्सीनेशन कार्य में शिथिलता न बरती जाए। ग्रामीण क्षेत्रों व दूर दराज के क्षेत्रों तक के पशुपालकों को जागरूक किया जाए तथा समयबद्ध ढंग से टीकाकरण कार्य पूर्ण कराया जाए।
मंत्री जी ने कृत्रिम गर्भाधान एवं नस्ल सुधार कार्यक्रमों की प्रगति पर कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए उन्नत नस्लों के संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाए। सभी संबंधित योजनाओं के लाभार्थियों का चयन जून माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए, ताकि पात्र पशुपालकों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
श्री सिंह ने बैठक के दौरान मोबाइल वेटरनरी यूनिट से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। जहां कहीं भी मोबाइल वेटरनरी यूनिट के संचालन में तकनीकी अथवा व्यवस्थागत समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे पशुपालकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
दुग्ध विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रदेश में दुग्ध समितियों के विस्तार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक दुग्ध उत्पादकों को समितियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए तथा दुग्ध सहकारी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने गोरखपुर, कन्नौज एवं कानपुर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा संचालित किए जाने वाले दुग्ध प्लांटों को शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन प्लांटों के शुरू होने से प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी, दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने मंत्री को विभाग की अद्यतन प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप तेजी से कार्य किये जाए। दुग्ध समितियों का गठन प्राथमिकता के आधार पर करें। समितियों के लक्ष्य निर्धारण को चरणबद्ध रूप से बढ़ाया जाये। प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किया जाये। कार्य में लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जायेगी और आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
बैठक में विशेष सचिव पशुधन देवेन्द्र पाण्डेय, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक वैभव श्रीवास्तव, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के0, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, डॉ. मेमपाल सिंह, निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक, रोग नियन्त्रण एवं प्रक्षेत्र, अपर निदेशक डा0 संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक डॉ पी के सिंह तथा यूपीएलडीडीबी के डॉ. पी०के० सिंह सहित अन्य योजनाधिकारी उपस्थित रहे।
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