मध्य प्रदेश के गुना में बिहार चुनाव नतीजों पर बहस से भड़की हिंसा: भतीजे की मामा-भांजे ने की हत्या, नशे में RJD-JD(U) समर्थकों का झगड़ा। 

मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक पारिवारिक विवाद ने दर्दनाक मोड़ ले लिया। यहां कैंट थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन के निर्माणाधीन परिसर में बिहार चुनाव

Nov 18, 2025 - 15:35
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मध्य प्रदेश के गुना में बिहार चुनाव नतीजों पर बहस से भड़की हिंसा: भतीजे की मामा-भांजे ने की हत्या, नशे में RJD-JD(U) समर्थकों का झगड़ा। 
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मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक पारिवारिक विवाद ने दर्दनाक मोड़ ले लिया। यहां कैंट थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन के निर्माणाधीन परिसर में बिहार चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक बहस के बाद दो मामा-भांजे ने अपने 22 वर्षीय भतीजे की हत्या कर दी। बिहार के शिवहर जिले का रहने वाला मजदूर शंकर मांझी नशे में अपने रिश्तेदारों के साथ चुनाव परिणामों पर गरमागरम बहस कर रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि शंकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का समर्थक था, जबकि आरोपी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पक्षधर थे। यह घटना रविवार रात की है, और सोमवार सुबह शव मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गुना पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है।

घटना की शुरुआत रविवार रात करीब दस बजे हुई। शंकर मांझी, राजेश मांझी और तूफानी मांझी तीनों बिहार के शिवहर जिले के रहने वाले हैं। वे गुना के कैंट थाना क्षेत्र में पुलिस लाइन के नए आवासीय क्वार्टरों के निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे। तीनों एक ही टेंट में रहते थे और रविवार को देर रात तक साथ बैठे शराब पी रहे थे। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 15 नवंबर को आए थे, जिसमें एनडीए ने शानदार जीत हासिल की। जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं, जबकि आरजेडी महागठबंधन के साथ मिलकर सिर्फ 25 पर सिमट गई। इस जीत-हार पर तीनों की बहस शुरू हो गई। शंकर, जो लालू प्रसाद यादव के आरजेडी का कट्टर समर्थक था, नतीजों से नाराज था। वह तर्क दे रहा था कि ईवीएम में गड़बड़ी हुई है और आरजेडी को अन्याय हुआ। वहीं, उसके मामा राजेश (25) और तूफानी (27) नीतीश कुमार की जेडीयू के समर्थक थे। वे एनडीए की जीत को सही बताते हुए शंकर को ताना मार रहे थे।

कैंट थाना प्रभारी अनूप भार्गव ने बताया कि शराब के नशे में छोटी-सी बहस मारपीट में बदल गई। शंकर ने विरोध किया तो राजेश और तूफानी ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने शंकर को परिसर के पास ही एक कीचड़ भरी जगह पर घसीटा और उसका मुंह दबा दिया। शंकर की सांस रुक गई और वह बेहोश हो गया। आरोपी उसे वहीं छोड़ भाग गए। सोमवार सुबह करीब सात बजे अन्य मजदूरों ने शव देखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो शव की पहचान शंकर के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में सिर पर चोटें और श्वास नली में कीचड़ मिला, जो दम घुटने से मौत का संकेत देता है। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसे हत्या ही बताया। भार्गव ने कहा कि आरोपी एक घंटे के अंदर गिरफ्तार हो गए। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि नशे में गुस्सा भड़क गया और मामला हाथ से निकल गया।

गुना पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घटना मजदूरों के कैंप में हुई, जहां बिहार चुनाव का उत्साह अभी ठंडा भी नहीं हुआ था। सोनी ने बताया कि शंकर का परिवार शिवहर में रहता है। उसके पिता रामचंद्र मांझी खेत मजूरी करते हैं। शंकर दो साल पहले काम की तलाश में मध्य प्रदेश आया था। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला था। मौत की खबर सुनकर परिवार सदमे में है। शिवहर से गुना पहुंचने में समय लगेगा, लेकिन पुलिस ने शव सौंपने की तैयारी कर ली है। सोनी ने चेतावनी दी कि नशे और राजनीतिक बहस से दूर रहें, वरना सख्त कार्रवाई होगी। मामले में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (साझा इरादा) के तहत केस दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने साइट से साक्ष्य संग्रहित किए हैं।

यह घटना बिहार चुनाव के नतीजों के बाद पूरे देश में फैले उत्साह और नाराजगी का एक उदाहरण है। 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 243 सीटों पर मतदान हुआ। एनडीए ने 202 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जिसमें भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 मिलीं। महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें नसीब हुईं, जिसमें आरजेडी की 25 थीं। आरजेडी को वोट शेयर में 22.8 प्रतिशत मिला, जो भाजपा (20.08) और जेडीयू (19.25) से ज्यादा था, लेकिन सीटों में पिछड़ गई। तेजस्वी यादव ने रघोपुर से जीत हासिल की, लेकिन पार्टी को करारा झटका लगा। आरजेडी ने ईवीएम पर सवाल उठाए और कानूनी लड़ाई की बात कही। ऐसे में प्रवासी बिहारी मजदूरों के बीच बहसें आम हो गईं। गुना जैसे शहरों में हजारों बिहारी मजदूर काम करते हैं, और चुनाव नतीजों ने उनके बीच तनाव बढ़ा दिया।

पुलिस का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। चुनाव के दौरान बिहार में भी राजनीतिक हिंसा के कई मामले सामने आए। जैसे मोकामा में जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या, जिसमें जेडीयू प्रत्याशी आनंद सिंह पर आरोप लगा। लेकिन मध्य प्रदेश जैसे दूसरे राज्य में प्रवासी मजदूरों के बीच ऐसा विवाद दुर्लभ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शराब और राजनीति का मिश्रण खतरनाक होता है। सोशल मीडिया पर इस घटना ने बहस छेड़ दी। ट्विटर पर BiharElectionMurder ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा कि राजनीति परिवार तोड़ रही है। दूसरे ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को जागरूक करने की जरूरत है। न्यूज चैनलों जैसे एनडीटीवी, इंडिया टुडे और आज तक ने इसे प्रमुखता से दिखाया। रिपोर्ट्स में बताया गया कि गुना में बिहारी मजदूरों की संख्या बढ़ रही है, और पुलिस अब कैंपों में जागरूकता अभियान चला रही है।

आरोपी राजेश और तूफानी भी गरीब परिवार से हैं। वे शंकर के साथ साल भर से काम कर रहे थे। परिवारिक रिश्ते मजबूत थे, लेकिन नशे ने सब बर्बाद कर दिया। तूफानी ने पूछताछ में कहा कि शंकर ने जेडीयू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिससे गुस्सा भड़क गया। राजेश ने माना कि बहस को रोकने की कोशिश की, लेकिन हाथ साफ न हो सका। पुलिस अब उनके मोबाइल रिकॉर्ड चेक कर रही है। गुना जिला मुख्यालय भोपाल से 200 किलोमीटर दूर है। यहां मजदूरी के अच्छे अवसर हैं, लेकिन अपराध दर भी बढ़ रही है। एसपी सोनी ने कहा कि मजदूर कैंपों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। बिहार पुलिस से भी संपर्क किया गया है, ताकि परिवार को सहायता मिले।

यह हत्या समाज को सोचने पर मजबूर करती है। राजनीतिक समर्थन व्यक्तिगत राय है, लेकिन उसे हिंसा में बदलना गलत है। बिहार चुनाव ने विकास और जाति पर फोकस किया, लेकिन नतीजों ने विपक्ष को पीछे धकेल दिया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता ने गलत संदेश दिया। वहीं, नीतीश कुमार ने जीत को ऐतिहासिक बताया। ऐसे में प्रवासी बिहारियों के बीच भावनाएं उफान पर हैं। शंकर की मौत ने साबित कर दिया कि बहस सीमा में रखनी चाहिए। परिवार अब न्याय की उम्मीद कर रहा है। पुलिस ने आश्वासन दिया कि आरोपी को फांसी तक की सजा दिलाई जाएगी।

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