'पुष्पा झुकेगा नहीं... क्यों, क्योंकि वह हीरो है. वैसा हीरो यदि पुलिस को या मुझे मिल जाए तो..., देखिये देवरिया एसपी संजीव सुमन का वायरल वीडियो।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे एक कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे एक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों जैसे पुष्पा और केजीएफ के नकारात्मक किरदारों का जिक्र करते हुए गुंडागर्दी करने वालों को कड़ी चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई फिल्मी हीरो जैसा गुंडा पुलिस के हाथ लग जाए तो उसे लाठी से पीट-पीटकर सुधार दिया जाएगा। यह बयान न सिर्फ युवाओं को गलत रोल मॉडल्स से बचाने का संदेश देता है, बल्कि सिनेमा और वास्तविक जीवन के बीच की खाई को भी रेखांकित करता है।
कार्यक्रम मणिनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज, नोनापार में आयोजित मणिनाथ ब्रह्म जयंती समारोह का था। यह समारोह हर साल धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग, छात्र और अधिकारी भाग लेते हैं। इस बार एसपी संजीव सुमन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। मंच पर बोलते हुए उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, पुष्पा झुकेगा नहीं... क्यों, क्योंकि वह हीरो है। लेकिन वैसा हीरो अगर पुलिस को या मुझे मिल जाए तो लाठी से पीट-पीटकर ठीक कर देंगे। यह संवाद वीडियो में साफ सुनाई देता है और दर्शकों में हंसी के साथ-साथ गंभीरता भी पैदा करता है। एसपी का यह अंदाज सरल और सीधा है, जो स्थानीय भाषा में बोला गया है, ताकि हर कोई समझ सके।
एसपी संजीव सुमन ने आगे केजीएफ फिल्म के रॉकी भाई का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ये जो केजीएफ वाले रॉकी भाई हैं या दूसरी फिल्मों के विलेन, जितने भी निगेटिव कैरेक्टर्स हैं, इन सबको मीडिया ने पॉजिटिव बना दिया है। सारे चोर-उचक्के आज हीरो बनकर घूम रहे हैं। आलम यह है कि अब सिनेमा में बड़े-बड़े हीरो निगेटिव रोल्स कर रहे हैं, क्योंकि उनको पता है कि आजकल के लड़के-लड़कियों को यही पसंद आ रहा है। एसपी का यह बयान सिनेमा जगत की वर्तमान प्रवृत्ति पर करारा प्रहार है। पुष्पा में अल्लू अर्जुन का किरदार एक लकड़ी तस्कर का है, जो विद्रोही और बेबाक अंदाज के लिए मशहूर है। इसी तरह केजीएफ में यश का रॉकी एक खूंखार गैंगस्टर है, जो गरीबी से उठकर साम्राज्य बनाने की कहानी सुनाता है। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े हैं, लेकिन एसपी के अनुसार, ये किरदार युवाओं को गलत संदेश दे रहे हैं।
वीडियो में एसपी ने सिनेमा के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जबकि असल में यदि कोई बच्चा पढ़ाई-लिखाई करने वाला है तो वह लड़ाई-झगड़ा से बचना चाहता है। मगर फिल्मों में उसको एक खराब कैरेक्टर के रूप में दिखाते हैं। एक लड़का जो सिगरेट पीता है, गुंडागर्दी करता है, रोड पर घूमता है... वह कुछ लोगों की नजर में हीरो है। कहीं न कहीं यह बच्चों के मन में गहरी छाप छोड़ रहा है। पुरुषों के मन में, महिलाओं के मन में, दोनों के मन में। एसपी ने जोर देकर कहा कि हमें यह समझना पड़ेगा कि सिनेमा सिर्फ सिनेमा है। सिनेमा असल जीवन नहीं है। इसलिए उससे बचिए। अपने जीवन को खुद सुधारिए। अध्यात्म की ओर जाइए। अपने जीवन में बहुत प्रगति कीजिए। पॉजिटिव बनिए। यह संदेश न सिर्फ गुंडागर्दी रोकने का है, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का भी।
एसपी संजीव सुमन का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है। ट्विटर और फेसबुक पर हजारों यूजर्स ने इसे शेयर किया है। एक यूजर ने लिखा, एसपी साहब ने सही कहा, फिल्में मनोरंजन हैं, जीवन नहीं। एक अन्य ने कमेंट किया, पुष्पा जैसा बनने की होड़ में युवा गलत रास्ते पर जा रहे हैं। वीडियो को आज तक और एनडीटीवी जैसे चैनलों ने भी कवर किया है। आज तक की रिपोर्ट में बताया गया कि वीडियो में एसपी का अंदाज कड़क लेकिन प्रेरणादायक है। एनडीटीवी ने कार्यक्रम के विवरण देते हुए कहा कि यह समारोह स्थानीय संस्कृति और नैतिक शिक्षा पर केंद्रित था। एसपी का भाषण इसी थीम का हिस्सा था।
संजीव सुमन देवरिया के वर्तमान एसपी हैं। वे उत्तर प्रदेश पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पहले लखीमपुर खीरी में एसएसपी रह चुके हैं, जहां उन्होंने भूमि विवादों और अपराधों पर सख्त कार्रवाई की थी। 2022 में एक वायरल वीडियो में उन्होंने एक विधवा के घर पर गुंडों द्वारा बुलडोजर चलाने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। यह कार्रवाई उनकी ईमानदारी को दर्शाती है। देवरिया में आने के बाद उन्होंने अपराध दर कम करने पर फोकस किया है। जिले में गुंडागर्दी, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर नकेल कसने के लिए कई अभियान चलाए हैं। इस वीडियो से भी साफ है कि वे न सिर्फ कानूनी कार्रवाई पर जोर देते हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता पर भी।
भारतीय सिनेमा में नकारात्मक किरदारों का प्रभाव एक लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुष्पा और केजीएफ जैसी फिल्में युवाओं को आकर्षित करती हैं क्योंकि वे संघर्ष और जीत की कहानी दिखाती हैं। लेकिन एसपी सुमन की तरह कई लोग मानते हैं कि यह ग्लोरिफिकेशन अपराध को बढ़ावा देता है। एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 70 प्रतिशत युवा फिल्मी हीरोज को रोल मॉडल मानते हैं। इससे सिगरेट पीना, झगड़ा करना जैसी आदतें बढ़ रही हैं। एसपी का संदेश इसी समस्या का समाधान सुझाता है। उन्होंने अध्यात्म और सकारात्मकता पर जोर दिया, जो युवाओं को सही दिशा दे सकता है।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी नैतिकता और शिक्षा पर बात की। मणिनाथ ब्रह्म जयंती एक धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है, जो भक्ति और ज्ञान पर आधारित है। एसपी की उपस्थिति ने इसे और महत्वपूर्ण बना दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम अपराध रोकने में मदद करते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद देवरिया पुलिस के आधिकारिक हैंडल ने भी इसे शेयर किया है, जिसमें लिखा है कि सिनेमा देखें, लेकिन जीवन न बनाएं। यह पोस्ट को हजारों लाइक्स मिले हैं।
एसपी सुमन का यह बयान समयानुकूल है। आज के दौर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग्स कॉपी करना आम हो गया है। लेकिन वास्तविकता में ये आदतें जेल की सैर करा सकती हैं। एसपी ने युवाओं से अपील की कि पढ़ाई पर ध्यान दें, अच्छे काम करें। उन्होंने कहा कि असली हीरो वही है जो समाज के लिए कुछ करता है, न कि जो गुंडागर्दी दिखाता है। यह संदेश स्कूलों और कॉलेजों में चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से जुड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार भी अपराध रोकने के लिए ऐसे प्रयास कर रही है।
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