रेलवे ट्रैक पर हथिनी (Elephant) ने दिया बच्चे को जन्म, दो घंटे रुकी ट्रेन, मां-बच्चा सुरक्षित जंगल लौटे। 

Viral News: झारखंड के रामगढ़ (Ramgarh) जिले में 25 जून 2025 को एक अनोखी और दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई। रामगढ़ (Ramgarh) वन ....

Jul 9, 2025 - 13:15
Jul 9, 2025 - 16:22
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रेलवे ट्रैक पर हथिनी (Elephant) ने दिया बच्चे को जन्म, दो घंटे रुकी ट्रेन, मां-बच्चा सुरक्षित जंगल लौटे। 
(Pic: AI)    

झारखंड के रामगढ़ (Ramgarh) जिले में 25 जून 2025 को एक अनोखी और दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई। रामगढ़ (Ramgarh) वन प्रमंडल के सरवहा गांव के पास हजारीबाग-बरकाकाना रेलखंड पर एक गर्भवती हथिनी (Elephant) ने रेलवे ट्रैक के किनारे अपने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान रेलवे प्रशासन और वन विभाग ने मानवता का परिचय देते हुए करीब दो घंटे तक ट्रेनों का परिचालन रोक दिया, ताकि हथिनी (Elephant) और उसके नवजात शावक को कोई नुकसान न हो। प्रसव के बाद हथिनी (Elephant) अपने बच्चे के साथ सुरक्षित रूप से 10 किलोमीटर की दूरी तय कर हाथी कॉरिडोर जंगल में लौट गई।

25 जून की सुबह रामगढ़ (Ramgarh)-हजारीबाग रेलखंड के सरवहा गांव के पास एक हथिनी (Elephant) रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। वह प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी और दर्द के कारण चिंघाड़ रही थी। उसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण इकट्ठा हो गए। उन्होंने देखा कि हथिनी (Elephant) रेल पटरियों के आसपास घूम रही है और बच्चे को जन्म देने की स्थिति में है। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना रामगढ़ (Ramgarh) वन विभाग को दी। वन रक्षक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए रामगढ़ (Ramgarh) के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) नीतीश कुमार को सूचित किया।

नीतीश कुमार ने तुरंत रेलवे नियंत्रण कक्ष से संपर्क किया और अनुरोध किया कि हथिनी (Elephant) के प्रसव तक ट्रेनों की आवाजाही रोकी जाए। रेलवे प्रशासन ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए हजारीबाग-बरकाकाना रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन लगभग दो घंटे के लिए रोक दिया। इस दौरान एक मालगाड़ी को भी रोकना पड़ा। वन विभाग की टीम और स्थानीय लोग मौके पर मौजूद रहे, ताकि हथिनी (Elephant) को कोई परेशानी न हो। कुछ ही समय बाद हथिनी (Elephant) ने ट्रैक के किनारे एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया। आश्चर्यजनक रूप से, जन्म के कुछ सेकंड बाद ही नवजात शावक खड़ा होकर चलने लगा, जो प्रकृति का एक अद्भुत दृश्य था।

प्रसव के बाद हथिनी (Elephant) ने अपने बच्चे को संभाला और धीरे-धीरे जंगल की ओर बढ़ने लगी। वन विभाग की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि मां और बच्चा सुरक्षित रूप से हाथी कॉरिडोर तक पहुंच जाए। हथिनी (Elephant) ने अपने नवजात शावक के साथ करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय की और रामगढ़ (Ramgarh) वन क्षेत्र के जंगल में प्रवेश कर गई। वन अधिकारियों ने बताया कि यह हथिनी (Elephant) संभवतः अपने झुंड से बिछड़ गई थी। पिछले 15 दिनों से हाथियों का एक झुंड बोकारो, बसंतपुर, चींची कला, और करगी गांवों के रास्ते सरवहा क्षेत्र में देखा गया था। माना जा रहा है कि प्रसव पीड़ा के कारण यह हथिनी (Elephant) झुंड से अलग होकर रेलवे ट्रैक तक पहुंच गई।

इस घटना में वन विभाग और रेलवे प्रशासन के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। DFO नीतीश कुमार ने बताया कि वन रक्षक की त्वरित सूचना और रेलवे के सहयोग के कारण हथिनी (Elephant) और उसके बच्चे की जान बचाई जा सकी। अगर ट्रेनों का परिचालन न रोका जाता, तो हथिनी (Elephant) और शावक रेल हादसे का शिकार हो सकते थे। रेलवे प्रशासन ने भी इस मानवीय कदम की सराहना की। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और रेलवे की इस पहल को प्रकृति संरक्षण का एक शानदार उदाहरण बताया।

ग्रामीणों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई ने इस घटना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरवहा गांव के निवासियों ने हथिनी (Elephant) की चिंघाड़ सुनकर न केवल वन विभाग को सूचित किया, बल्कि प्रसव के दौरान शांति बनाए रखने में भी मदद की। कई ग्रामीण इस दृश्य को देखने के लिए मौके पर जमा हो गए थे। उन्होंने इसे प्रकृति का चमत्कार बताया। एक ग्रामीण ने कहा, “हमने पहली बार इतने करीब से हथिनी (Elephant) को बच्चा देते देखा। यह बहुत भावुक करने वाला पल था।”

झारखंड में हर साल 12 से 20 हाथी रेल हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। हाल के वर्षों में चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा में कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें हाथी शावकों की मौत हुई। इन हादसों को रोकने के लिए वन्यजीव संरक्षण संस्थान ने डिजिटल निगरानी की योजना बनाई है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका की तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक में रेलवे ट्रैक पर डिजिटल सेंसर लगाए जाएंगे, जो हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर ट्रेनों की गति कम करने का संकेत देंगे।

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें हथिनी (Elephant) और उसका नवजात शावक जंगल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। लोगों ने इसे प्रकृति और मानवता का सुंदर मेल बताया। एक यूजर ने लिखा, “यह घटना दिखाती है कि अगर हम चाहें, तो वन्यजीवों की रक्षा कर सकते हैं। रेलवे और वन विभाग ने कमाल का काम किया।”

रामगढ़ (Ramgarh) जिला हाथियों के लिए दो प्रमुख कॉरिडोर का हिस्सा है। पहला कॉरिडोर बोकारो जिले से बसंतपुर, चींची कला, करगी, और सरवहा होते हुए हजारीबाग के बड़कागांव तक जाता है। दूसरा कॉरिडोर सिल्ली से गोला प्रखंड, सरगडीह, बरगा, और रजरप्पा तक फैला है। ये कॉरिडोर हाथियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये उनके आवागमन के प्राकृतिक रास्ते हैं। हालांकि, रेलवे ट्रैक और मानवीय गतिविधियों के कारण इन कॉरिडोर में बाधा उत्पन्न होती है।

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