Bharat Bandh 2025 : किसने बुलाया भारत बंद, क्या रहेगा खुला और क्या रहेगा बंद, 25 करोड़ से अधिक लोग होंगे शामिल, जानिए किस पर पड़ेगा बड़ा असर

Bharat Bandh किसने और क्यों किया; यूनियनों का कहना है कि ये कानून सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल (Strike) जैसे मजदूरों के मूल अधिकारों को छीन

Jul 9, 2025 - 01:04
Jul 9, 2025 - 01:12
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Bharat Bandh 2025 : किसने बुलाया भारत बंद, क्या रहेगा खुला और क्या रहेगा बंद, 25 करोड़ से अधिक लोग होंगे शामिल, जानिए किस पर पड़ेगा बड़ा असर
जान लीजिये, Bharat Bandh 2025 का कहाँ कहाँ पड़ेगा प्रभाव

भारत बंद (Bharat Bandh) का ऐलान

देश भर में 9 जुलाई 2025 को एक बड़े पैमाने पर हड़ताल (Strike) का ऐलान किया गया है, जिसे "भारत बंद (Bharat Bandh)" नाम दिया गया है। इस हड़ताल (Strike) का आह्वान 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों ने मिलकर किया है। इन संगठनों का कहना है कि वे केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें वे मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक मानते हैं। इस हड़ताल (Strike) में करीब 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी, मजदूर और किसानों के शामिल होने की उम्मीद है। यह बंद न केवल शहरी क्षेत्रों, बल्कि ग्रामीण भारत में भी व्यापक असर डाल सकता है।

भारत बंद (Bharat Bandh) का कारण: क्यों हो रही है हड़ताल (Strike)?

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने पिछले कुछ सालों में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाते हैं, जबकि आम मजदूरों और किसानों की स्थिति बद से बदतर हो रही है। खास तौर पर, चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) को लागू करने का फैसला यूनियनों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह है। इन संहिताओं को यूनियनों ने मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाला बताया है।

श्रम संहिताओं का विरोध

नए श्रम संहिताओं के तहत सरकार ने काम के घंटे बढ़ाने, यूनियन गतिविधियों को कमजोर करने और नियोक्ताओं को श्रम कानूनों की जवाबदेही से बचाने की कोशिश की है। यूनियनों का कहना है कि ये कानून सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल (Strike) जैसे मजदूरों के मूल अधिकारों को छीनते हैं। इसके अलावा, निजीकरण को बढ़ावा देने और स्थायी नौकरियों को ठेका आधारित नौकरियों में बदलने की नीतियों ने भी मजदूरों में असंतोष पैदा किया है।

किसानों की चिंताएं

संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने भी इस हड़ताल (Strike) को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों ने बेरोजगारी को बढ़ाया है, आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, और शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की जा रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि सरकार कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर रही है।

17 सूत्री मांगपत्र

पिछले साल ट्रेड यूनियनों ने श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को 17 मांगों का एक चार्टर सौंपा था, लेकिन उनका दावा है कि सरकार ने इन मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इन मांगों में शामिल हैं:

  • चार श्रम संहिताओं को रद्द करना।

  • पुरानी पेंशन योजना की बहाली।

  • न्यूनतम वेतन को 26,000 रुपये करने की मांग।

  • ठेका नौकरियों को खत्म करना।

  • सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक।

  • बेरोजगारी भत्ते की शुरुआत।

  • मनरेगा की मजदूरी बढ़ाना और इसे शहरी क्षेत्रों में लागू करना।

  • शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी मूलभूत जरूरतों पर खर्च बढ़ाना।

  • वार्षिक श्रम सम्मेलन की नियमितता सुनिश्चित करना।

यूनियनों का कहना है कि सरकार ने पिछले 10 सालों से वार्षिक श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया, जो उनकी उदासीनता को दर्शाता है।

कौन-कौन शामिल है इस हड़ताल (Strike) में?

ट्रेड यूनियनों की भूमिका

इस हड़ताल (Strike) का नेतृत्व 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का गठबंधन कर रहा है। इनमें शामिल हैं:

  1. भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)

  2. अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)

  3. हिंद मजदूर सभा (HMS)

  4. भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU)

  5. अखिल भारतीय संयुक्त ट्रेड यूनियन केंद्र (AIUTUC)

  6. ट्रेड यूनियन समन्वय केंद्र (TUCC)

  7. स्वरोजगार महिला एसोसिएशन (SEWA)

  8. अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद (AICCTU)

  9. लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)

  10. यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)

हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ (BMS) इस हड़ताल (Strike) में शामिल नहीं है।

किसान संगठनों का समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न कृषि श्रमिक संगठनों ने भी इस हड़ताल (Strike) को समर्थन देने का ऐलान किया है। ये संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रैलियां और सड़क जाम करने की योजना बना रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार की नीतियां ग्रामीण भारत के संकट को और गहरा रही हैं।

विपक्षी दलों का साथ

बिहार में विपक्षी महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शामिल है, ने भी इस हड़ताल (Strike) को समर्थन देने का फैसला किया है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “9 तारीख को राहुल गांधी और हम, दोनों मिलकर चक्का जाम करेंगे। बिहार में जिस तरह से गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं, हम उनके हक के लिए लड़ेंगे और ट्रेड यूनियनों का पूरा साथ देंगे।” इसके अलावा, इंडिया गठबंधन और विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने पूर्णिया जैसे शहरों में इस बंद को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई है।

भारत बंद (Bharat Bandh) का असर: क्या-क्या प्रभावित होगा?

बैंकिंग और बीमा सेवाएं

हड़ताल (Strike) के कारण बैंकिंग और बीमा सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। कई शहरों में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल (Strike) के कारण शाखाएं बंद रह सकती हैं या सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 जुलाई को कोई आधिकारिक छुट्टी घोषित नहीं की है, इसलिए कुछ बैंक शाखाएं सामान्य रूप से काम कर सकती हैं। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे पहले से सतर्क रहें और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करें।

डाक सेवाएं

डाक विभाग में कार्यरत कर्मचारी भी इस हड़ताल (Strike) में शामिल हो सकते हैं, जिसके कारण डाक सेवाएं बाधित हो सकती हैं। डाकघरों में सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है, और पत्र या पार्सल की डिलीवरी में देरी हो सकती है।

परिवहन सेवाएं

सार्वजनिक परिवहन सेवाएं, जैसे बस, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब सेवाएं (ओला, उबर, रैपिडो), इस हड़ताल (Strike) से प्रभावित हो सकती हैं। कई शहरों में ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने विरोध रैलियां और सड़क जाम की योजना बनाई है, जिससे यात्रा में देरी या रद्दीकरण की संभावना है। बिहार में ऑटो यूनियनों ने भी 8 और 9 जुलाई को हड़ताल (Strike) का ऐलान किया है, जिसका असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों पर पड़ सकता है।

रेल सेवाएं

रेलवे यूनियनों ने औपचारिक रूप से इस हड़ताल (Strike) में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। हालांकि, पहले हुई ऐसी हड़ताल (Strike)ों में प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशनों या पटरियों पर प्रदर्शन करते देखे गए हैं, खासकर उन राज्यों में जहां यूनियनों की मजबूत उपस्थिति है। इससे ट्रेनों में देरी या स्थानीय स्तर पर परिचालन प्रभावित हो सकता है।

कोयला खनन और औद्योगिक उत्पादन

कोयला खनन, इस्पात और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी इस हड़ताल (Strike) में शामिल हो सकते हैं। इससे कारखानों और फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो सकता है। खास तौर पर, एनएमडीसी लिमिटेड और अन्य सरकारी खनन कंपनियों के कर्मचारियों ने हड़ताल (Strike) में भाग लेने की पुष्टि की है।

बिजली आपूर्ति

उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों (PVVNL और DVVNL) के निजीकरण के विरोध में 27 लाख बिजली कर्मचारी इस हड़ताल (Strike) में शामिल होंगे। इससे कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

स्कूल और कॉलेज

तमिलनाडु और पुडुचेरी में स्कूल और कॉलेज पूरी तरह बंद रहेंगे, क्योंकि इन राज्यों में सार्वजनिक परिवहन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों में स्कूल, कॉलेज और निजी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहने की उम्मीद है। फिर भी, परिवहन समस्याओं के कारण छात्रों और कर्मचारियों को आने-जाने में दिक्कत हो सकती है।

बाजार और दुकानें

कुछ शहरों में स्थानीय स्तर पर दुकानें और बाजार बंद रह सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां यूनियनों की मजबूत उपस्थिति है। हालांकि, अधिकांश बड़े मॉल और निजी दुकानें सामान्य रूप से काम कर सकती हैं।

आपातकालीन सेवाएं

अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं इस हड़ताल (Strike) से प्रभावित नहीं होंगी। सरकार और यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी।

क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

खुले रहने वाली सेवाएं

  • निजी कार्यालय: अधिकांश निजी कंपनियां और कार्यालय सामान्य रूप से काम करेंगे।

  • आपातकालीन सेवाएं: अस्पताल, पुलिस, और एंबुलेंस सेवाएं बंद से अछूती रहेंगी।

  • शेयर बाजार: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सामान्य रूप से सुबह 9 बजे से शाम 3:30 बजे तक काम करेंगे।

  • ऑनलाइन सेवाएं: ऑनलाइन बैंकिंग, डिलीवरी और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी।

बंद रहने वाली सेवाएं

  • बैंकिंग और बीमा: कई शहरों में बैंक और बीमा सेवाएं बाधित हो सकती हैं।

  • डाक सेवाएं: डाकघरों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।

  • सार्वजनिक परिवहन: बस, टैक्सी और कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

  • कोयला और खनन: खनन और औद्योगिक उत्पादन ठप हो सकता है।

  • बिजली आपूर्ति: कुछ क्षेत्रों में बिजली सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

भारत बंद (Bharat Bandh) का क्षेत्रीय असर

बिहार

बिहार में इस हड़ताल (Strike) का व्यापक असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह एक चुनावी राज्य है। विपक्षी महागठबंधन और ऑटो यूनियनों ने हड़ताल (Strike) को समर्थन दिया है। राजधानी पटना में नए ट्रैफिक नियमों के विरोध में ऑटो यूनियनों ने भी हड़ताल (Strike) का ऐलान किया है, जिससे स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों को परेशानी हो सकती है।

तमिलनाडु और पुडुचेरी

इन राज्यों में हड़ताल (Strike) का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद रह सकते हैं।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल (Strike) के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में स्कूल, कॉलेज और निजी कार्यालय सामान्य रूप से काम करेंगे। हालांकि, सड़क जाम और विरोध प्रदर्शनों के कारण यात्रा में दिक्कत हो सकती है।

अन्य राज्य

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी हड़ताल (Strike) का असर देखने को मिल सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां यूनियनों की मजबूत उपस्थिति है।

पहले की हड़ताल (Strike)ें और उनका असर

यह पहली बार नहीं है जब ट्रेड यूनियनों ने भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया है। इससे पहले 26 नवंबर 2020, 28-29 मार्च 2022 और 16 फरवरी 2024 को भी ऐसी हड़ताल (Strike)ें हुई थीं, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे। इन हड़ताल (Strike)ों का असर सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन और औद्योगिक उत्पादन पर देखा गया था। इस बार यूनियनों का दावा है कि 9 जुलाई की हड़ताल (Strike) हाल के वर्षों में सबसे बड़ी होगी।

ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। हिंद मजदूर सभा के वरिष्ठ नेता हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा, “सरकार ने पिछले 10 सालों से वार्षिक श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया है। यह मजदूरों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।” यूनियनों ने सरकार से मांगों पर बातचीत की अपील की है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।

आर्थिक नुकसान की आशंका

इस हड़ताल (Strike) के कारण करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की संभावना जताई जा रही है। बैंकिंग, डाक, परिवहन और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में कामकाज ठप होने से देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, शेयर बाजार जैसी स्वायत्त संस्थाएं सामान्य रूप से काम करेंगी।

जनता के लिए सलाह

  • यात्रा की योजना: अगर आप 9 जुलाई को यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो पहले से वैकल्पिक व्यवस्था कर लें। सार्वजनिक परिवहन में व्यवधान हो सकता है।

  • बैंकिंग सेवाएं: ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करें, क्योंकि कई बैंक शाखाएं बंद रह सकती हैं।

  • आपातकालीन सेवाएं: आपात स्थिति में अस्पताल और पुलिस सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

  • स्कूल-कॉलेज: अपने स्कूल या कॉलेज से संपर्क कर ताजा जानकारी लें।

9 जुलाई 2025 का भारत बंद (Bharat Bandh) एक बड़े सामाजिक और आर्थिक आंदोलन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और मजदूरों व किसानों के हितों की रक्षा करना है। 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों की भागीदारी के साथ यह हड़ताल (Strike) देश की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं और कुछ निजी क्षेत्र सामान्य रूप से काम करेंगे।

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