Politics News: दिल्ली अस्पताल घोटाला:- पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ ACB जांच को गृह मंत्रालय की मंजूरी।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी अस्पतालों के निर्माण में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के घोटाले...
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी अस्पतालों के निर्माण में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti-Corruption Branch, ACB) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 1988) की धारा 17A के तहत दोनों नेताओं के खिलाफ जांच शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की 6 मई 2025 को की गई सिफारिश के बाद मिली है।यह जांच दिल्ली में 2018-19 के दौरान शुरू किए गए 24 अस्पताल परियोजनाओं (11 ग्रीनफील्ड और 13 ब्राउनफील्ड) में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू की गई है, जिनकी अनुमानित लागत 5,590 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, सितंबर 2021 में 6,800 बेड की क्षमता वाले सात ICU अस्पतालों के निर्माण के लिए 1,125 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिन्हें छह महीने में पूरा करना था, लेकिन तीन साल बाद भी ये केवल 50% पूरे हुए हैं। इन परियोजनाओं में अब तक 800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, और लागत में भारी वृद्धि देखी गई है।
इसके अतिरिक्त, 94 पॉलीक्लिनिक्स के निर्माण की योजना 168 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई थी, लेकिन केवल 52 पॉलीक्लिनिक्स बनाए गए, जिन पर 220 करोड़ रुपये खर्च हुए। स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन प्रणाली (HIMS) को भी कथित तौर पर पारदर्शिता से बचने के लिए वर्षों तक विलंबित किया गया। ACB की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि परियोजनाओं की लागत को जानबूझकर बढ़ाया गया, कार्य में देरी की गई, लागत प्रभावी समाधानों को अस्वीकार किया गया, और धन का दुरुपयोग किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। यह मामला दिल्ली विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष और बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता की 22 अगस्त 2024 को दायर शिकायत के बाद सुर्खियों में आया। गुप्ता ने आरोप लगाया कि AAP सरकार के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, जिसमें तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज की संलिप्तता संदिग्ध है। शिकायत में कहा गया कि परियोजनाओं में लागत को असामान्य रूप से बढ़ाया गया, और कई परियोजनाएं निर्धारित समय से वर्षों बाद भी अधूरी हैं, जिससे धन की हेराफेरी का संदेह पैदा होता है।
ACB ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की और जनवरी 2025 में अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग को सौंपी। सतर्कता विभाग ने स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टिप्पणियों के बाद इस मामले को उपराज्यपाल के पास भेजा। सतर्कता विभाग ने अपनी टिप्पणी में उल्लेख किया कि परियोजनाओं की योजना खराब थी, निर्माण शुरू होने के बाद डिजाइन और सुविधाओं में बार-बार बदलाव किए गए, और लागत अनुमान गलत थे, जिससे लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई। विभाग ने यह भी चेतावनी दी कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और साक्ष्य अभी भी छिपे हो सकते हैं, जिसके लिए गहन जांच आवश्यक है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत किसी भी सार्वजनिक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। उपराज्यपाल सक्सेना ने 6 मई 2025 को ACB की अनुमति के लिए अनुरोध को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था। 24 जून 2025 को गृह मंत्रालय ने इस जांच को हरी झंडी दे दी।
- आरोप
लागत में वृद्धि: LNJP अस्पताल के नए ब्लॉक की शुरुआती लागत 465.52 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 1,125 करोड़ रुपये हो गई।
विलंब: सात ICU अस्पताल, जो 2022 तक पूरे होने थे, 2025 तक केवल आधे पूरे हुए।
धन का दुरुपयोग: ACB ने आरोप लगाया कि लागत को जानबूझकर बढ़ाया गया और गैर-कार्यात्मक संपत्तियां बनाई गईं।
पारदर्शिता की कमी: HIMS को लागू करने में देरी को भ्रष्टाचार छिपाने की रणनीति के रूप में देखा गया।
आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को "राजनीतिक बदले की कार्रवाई" करार दिया है। AAP का कहना है कि परियोजनाओं में देरी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे भ्रष्टाचार का नाम देना गलत है। पार्टी ने तर्क दिया कि कोविड-19 महामारी के दौरान दिल्ली को 80,000 बेड की आवश्यकता थी, जिसके लिए संसाधनों को जुटाया गया था। महामारी के कम होने के बाद प्राथमिकताएं बदलीं, जिससे कुछ परियोजनाएं प्रभावित हुईं। AAP ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार की 53% परियोजनाओं में तीन साल से अधिक की देरी और लागत वृद्धि पर कोई जांच क्यों नहीं होती।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा, "ACB ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। बीजेपी, उपराज्यपाल, और उनकी एजेंसियां जैसे CBI, ED, और ACB हमारे खिलाफ आधारहीन शिकायतें दर्ज करवाती हैं।" पार्टी ने दावा किया कि ये अस्पताल परियोजनाएं दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए थीं और महामारी के दौरान इनका लाभ भी मिला। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "यह जांच AAP सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करेगी। दिल्ली की जनता ने स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार को पहचाना और सत्येंद्र जैन व सौरभ भारद्वाज को चुनाव में हराकर सजा दी।" बीजेपी ने आरोप लगाया कि AAP ने जानबूझकर परियोजनाओं को विलंबित किया और धन का दुरुपयोग किया।
सत्येंद्र जैन, जो AAP के वरिष्ठ नेता और दिल्ली में तीन बार स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं, पहले भी भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंस चुके हैं। मई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था, और वह अभी जमानत पर हैं। मार्च 2025 में ACB ने 571 करोड़ रुपये के CCTV प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार के लिए उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया था, जिसमें उन पर 7 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। यह जांच दिल्ली की AAP सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही शराब नीति और कक्षा निर्माण घोटाले जैसे मामलों में जांच का सामना कर रही है। सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ ACB की जांच से AAP की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में। सौरभ भारद्वाज, जो AAP के दिल्ली इकाई के प्रमुख हैं, अब तक भ्रष्टाचार के मामलों से अपेक्षाकृत बचे रहे थे। यह पहला मौका है जब उनके खिलाफ ACB ने जांच शुरू की है। उनकी स्वच्छ छवि को इस जांच से नुकसान पहुंच सकता है, जिसका असर AAP की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
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