Delhi : वक्फ संशोधन- सुप्रीम कोर्ट ने पूरे कानून पर रोक लगाने से किया इंकार 

सुप्रीम कोर्ट ने इस बीच सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए साफ किया है कि वह मामले की गहन सुनवाई करेगा और यह तय करेगा कि आखिर वक्फ कानून में संशोध

Sep 16, 2025 - 00:21
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Delhi : वक्फ संशोधन- सुप्रीम कोर्ट ने पूरे कानून पर रोक लगाने से किया इंकार 

संदिग्ध संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, सरकार के लिए बड़ी जीत- रीना एन सिंह

नई दिल्ली : केंद्र सरकार के द्वारा वक्फ संशोधन बिल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की लोग अपने-अपने तरीके से व्याख्या कर रहे हैं इसी मामले पर हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने वाली एडवोकेट रीना एन सिंह ने कहा कि दीर्घकाल में, सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ प्रावधानों पर अंतरिम स्थगन लगाया है ताकि उन्हें कानूनी रूप से और मज़बूत किया जा सके। उदाहरण के लिए, संशोधन अधिनियम के तहत कलेक्टर को दी गई वह शक्ति, जिसके अंतर्गत वह अस्पष्ट शीर्षक वाली वक्फ़ संपत्तियों पर कार्यवाही कर सकता था, उस पर अभी रोक लगा दी गई है। दीर्घावधि में, जब अंतिम आदेश पारित होंगे, तो यह अंतरिम आदेश वस्तुतः इन प्रावधानों को कानूनी मान्यता प्रदान करेगा जिससे उनका विधि के अंतर्गत सही तरीके से परिवर्तन सुनिश्चित होगा।

रीना एन सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस लाइन पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि कानून पर रोक केवल दुर्लभतम मामलों में ही लगाई जा सकती है अनुमान हमेशा कानून की संवैधानिकता के पक्ष में होता है। गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विरोधियों का कहना है कि इसमें प्रशासन को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे मनमानी और विवाद बढ़ सकते हैं। वहीं समर्थकों का मानना है कि इससे वक्फ संपत्तियों पर हो रहे अवैध कब्जों और दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बीच सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए साफ किया है कि वह मामले की गहन सुनवाई करेगा और यह तय करेगा कि आखिर वक्फ कानून में संशोधन किस हद तक संवैधानिक और न्यायसंगत है। रीना एन. सिंह का कहना है कि यह फैसला महज़ तकनीकी कानूनी पहलू नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के धार्मिक और सामाजिक हितों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अदालत का यह कदम संतुलित न्याय की मिसाल बनेगा और यह दिखाएगा कि कानून किसी भी पक्ष को अनुचित बढ़त नहीं देने देगा।

कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह रोक एक तरह से ‘सुरक्षा कवच’ है, ताकि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। वहीं, कई जानकारों का यह भी कहना है कि अदालत का रुख बताता है कि वह इस मुद्दे को हल्के में नहीं ले रही और वक्फ संपत्तियों की संवेदनशीलता को पूरी तरह समझ रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट अंतिम सुनवाई में क्या फैसला सुनाता है। क्या संशोधन अधिनियम को पूरी तरह से बहाल किया जाएगा, या फिर इसमें और बदलावों का रास्ता खुलेगा? फिलहाल इतना तय है कि अदालत का यह आदेश पूरे देश में वक्फ संपत्तियों के विवादों और उनकी वैधानिक स्थिति पर गहरा असर डालने वाला है।

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