Deoband : इलाज में लापरवाही और ब्लैकमेलिंग का आरोप, पत्रकार की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज

पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के दौरान संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। दुर्घटना के वक्त पीड़ित का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था, लेकिन डॉक्टर ने बिना सुन्न किए ही टांके लगा दिए। हड्डियों को जबरन मोड़ने की कोशिश की गई

May 17, 2026 - 12:21
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Deoband : इलाज में लापरवाही और ब्लैकमेलिंग का आरोप, पत्रकार की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज
Deoband : इलाज में लापरवाही और ब्लैकमेलिंग का आरोप, पत्रकार की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज

देवबंद में एक निजी अस्पताल के डॉक्टर और संचालक पर सड़क दुर्घटना में घायल पत्रकार के इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने और पैसे के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित पत्रकार ने इस मामले को लेकर कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत दी है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

दैनिक भास्कर डिजिटल से जुड़े स्थानीय पत्रकार आबाद अली अप्रैल के अंतिम सप्ताह में एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। इस दुर्घटना में उन्हें कई गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए रेलवे रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर ने तुरंत इलाज शुरू नहीं किया और पीड़ित काफी देर तक दर्द से तड़पता रहा। डॉक्टर पहले पैसे जमा कराने की जिद पर अड़े रहे। जब परिजनों और साथियों ने आकर पैसे जमा किए, तब जाकर इलाज शुरू हुआ।

पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के दौरान संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। दुर्घटना के वक्त पीड़ित का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था, लेकिन डॉक्टर ने बिना सुन्न किए ही टांके लगा दिए। हड्डियों को जबरन मोड़ने की कोशिश की गई और भारी-भरकम प्लास्टर चढ़ा दिया गया। हाथ पर लगे खून को साफ किए बिना ही उस पर रुई रखकर कच्चा प्लास्टर बांध दिया गया। पसली टूटी होने के बावजूद एक छोटी बेल्ट छाती पर कस दी गई, जिससे पीड़ित को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। इस शुरुआती और कथित तौर पर गलत इलाज के एवज में डॉक्टर ने मोटी रकम वसूल ली और मरीज की मर्जी के खिलाफ उसी दिन अस्पताल से छुट्टी कर दी।

घर पहुंचने पर पीड़ित की हालत और बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ और असहनीय दर्द के कारण उनका बुरा हाल था। छुट्टी के वक्त डॉक्टर ने परिजनों को सब कुछ सामान्य बताया था, लेकिन दो दिन बाद जब पीड़ित को दोबारा जांच के लिए ले जाया गया, तो डॉक्टर ने उनके बेटों से कहा कि तुरंत ऑपरेशन करना होगा, जिसमें लगभग 90 हजार रुपये का खर्च आएगा। डॉक्टर ने यह भी डराया कि ऑपरेशन के बाद भी मरीज जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो सकता है। इस बात से पूरा परिवार गहरे सदमे और डर में आ गया।

डॉक्टर के इस रवैए से परेशान होकर परिजनों ने पीड़ित को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक वहां ऑपरेशन जैसी कोई नौबत नहीं है। पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने पैसे ऐंठने के मकसद से उन्हें और उनके परिवार को डराया और साजिशन ब्लैकमेल किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए जांच में जुटी है, वहीं पीड़ित पक्ष ने न्याय के लिए आगे तक संघर्ष करने की बात कही है।

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