Gonda : गोंडा में नौ दिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन प्रभु राम जन्म का वर्णन

माता कौशल्या के चरित्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मां का स्वभाव ही घर का माहौल बनाता है। माताओं के कारण घरों में झगड़े नहीं होने चाहिए। पुरुषों को अपने व्य

Dec 16, 2025 - 22:44
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Gonda : गोंडा में नौ दिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन प्रभु राम जन्म का वर्णन
Gonda : गोंडा में नौ दिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन प्रभु राम जन्म का वर्णन

गोंडा। शहीद भगत सिंह कॉलेज मैदान में संगीतमय श्रीरामकथा के दूसरे दिन भक्ति और अध्यात्म का अनोखा माहौल बना। कथावाचक स्वामी प्रणवपुरी अंशुमान महाराज ने कहा कि हर परिवार में एक पंथ, एक ग्रंथ और एक संत जरूर होना चाहिए। इससे घर में संस्कार, शांति और सद्भाव आता है। स्वामी प्रणवपुरी अंशुमान महाराज ने राम जन्म का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने प्रभु के अवतार की वजह, माता कौशल्या के गुणों और पुत्रेष्टि यज्ञ की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि राम का अवतार सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का संदेश है।

माता कौशल्या के चरित्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मां का स्वभाव ही घर का माहौल बनाता है। माताओं के कारण घरों में झगड़े नहीं होने चाहिए। पुरुषों को अपने व्यवहार से घर में रामराज्य लाना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि मां को नम्र, सहनशील और दयालु होना चाहिए। कठोरता, गुस्सा और उत्तेजना परिवार को बिगाड़ते हैं। इसी पर रामचरितमानस की चौपाई सुनाई- "जासु नाम बल संकर कासी, देत सकल सुख लवलेसी।" मतलब राम नाम जीवन के सभी दुख दूर करता है।

कथा में श्रृंगी ऋषि का आना और राजा दशरथ द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराना बताया गया। स्वामी प्रणवपुरी अंशुमान महाराज ने समझाया कि दशरथ ने श्रृंगी ऋषि को सम्मान से अयोध्या बुलाया। यज्ञ के बाद मिला प्रसाद कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को दिया गया, जिससे राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। इस पर मानस की चौपाई गूंजी- "प्रगटे चारि कुमार, हर्षे पुर नर-नारी।" इसे सुनकर पूरा पंडाल भक्ति में डूब गया।

स्वामी प्रणवपुरी अंशुमान महाराज ने कहा कि राम का जीवन आज के समाज के लिए प्रेरणा है। पति के रूप में मर्यादा, बेटे के रूप में आज्ञापालन, राजा के रूप में न्याय और इंसान के रूप में दया-ये गुण राम को सबका नेता बनाते हैं।

कथा के दौरान भजन और चौपाइयों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। बड़ी संख्या में भक्तों ने "जय श्रीराम" के नारे लगाए। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। महाकाल भक्त परिवार की ओर से आयोजित कथा में यजमान जन्मेजय सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, निर्विकार सिंह भदौरिया, डीजीसी बसंत शुक्ल के अलावा कई लोग मौजूद रहे।

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