Special : भाजपा का नवीन अध्याय: Gen Z के नाम एक राजनीतिक संदेश- प्रीतेश दीक्षित, भाजपा नेता

यदि वर्ष 1998 से भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की संरचना और नेतृत्व पर दृष्टि डालें, तो एक बड़ा अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कांग्रेस पार्टी में वर्ष 1998 में

Dec 15, 2025 - 23:29
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Special : भाजपा का नवीन अध्याय: Gen Z के नाम एक राजनीतिक संदेश- प्रीतेश दीक्षित, भाजपा नेता
Special : भाजपा का नवीन अध्याय: Gen Z के नाम एक राजनीतिक संदेश- प्रीतेश दीक्षित, भाजपा नेता

आज के समय में जब विपक्षी दल लोकतंत्र का हवाला देकर देश की Gen Z पीढ़ी को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में यह लेख विशेष रूप से उन्हीं युवाओं को समर्पित है जिनका जन्म वर्ष 1998 या उसके बाद हुआ है। Gen Z आज देश की राजनीति को दिशा देने की क्षमता रखती है और उन्हें तथ्यों के आधार पर सही निर्णय लेने की आवश्यकता है।

यदि वर्ष 1998 से भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की संरचना और नेतृत्व पर दृष्टि डालें, तो एक बड़ा अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कांग्रेस पार्टी में वर्ष 1998 में सोनिया गांधी अध्यक्ष बनीं और वर्ष 2017 तक लगातार 19 वर्षों तक इस पद पर रहीं। इसके बाद अध्यक्ष पद उनके पुत्र राहुल गांधी को सौंपा गया। दो वर्षों के असफल कार्यकाल के बाद 2019 में राहुल गांधी से अध्यक्ष पद ले लिया गया, किंतु नेतृत्व पुनः सोनिया गांधी के हाथों में ही लौट आया। वर्ष 2022 में लगभग 24 वर्षों बाद कांग्रेस ने एक गैर-गांधी अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे को नियुक्त किया, हालांकि पार्टी की निर्णय प्रक्रिया आज भी हाईकमान केंद्रित मानी जाती है।

अन्य दलों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। समाजवादी पार्टी में वर्ष 2012 में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद मुलायम सिंह यादव से उनके पुत्र अखिलेश यादव को सौंपा गया, जो आज तक उसी पद पर बने हुए हैं। बहुजन समाज पार्टी में मान्यवर कांशीराम जी द्वारा वर्ष 2003 में बहन कुंवारी मायावती को अध्यक्ष बनाया गया, जो तब से अब तक पार्टी की मुखिया हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) में करुणानिधि जी के बाद उनके पुत्र एम. के. स्टालिन पार्टी अध्यक्ष बने। तृणमूल कांग्रेस की कमान शुरू से ही ममता बनर्जी के हाथों में है। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की कमान पहले डॉ. फारूक अब्दुल्ला के पास थी और अब उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं।

देश में ऐसे अनेक दल हैं, जहाँ कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल नारे लगाने तक सीमित रह जाती है, क्योंकि नेतृत्व तय होता है परिवार के आधार पर।

इसके विपरीत, यदि भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो वर्ष 1998 से अब तक पार्टी ने अनेक राष्ट्रीय अध्यक्ष दिए हैं। लाल कृष्ण आडवाणी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, जना कृष्णमूर्ति, वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और वर्तमान में जे. पी. नड्डा जैसे नेता पार्टी का नेतृत्व कर चुके हैं। हाल ही में मात्र 45 वर्ष की आयु में नितिन नवीन को विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना कोई संयोग नहीं, बल्कि संगठन की उस परंपरा का प्रमाण है जहाँ योग्यता, परिश्रम और संगठन क्षमता को प्राथमिकता दी जाती है।

यही भारतीय जनता पार्टी की पहचान है यहाँ वंश नहीं, बल्कि कार्यकर्ता की योग्यता उसकी पहचान बनती है। भाजपा वह पार्टी है जहाँ एक साधारण कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है।

मैं देश के सभी Gen Z राजनीतिक कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूँ कि वे अपने-अपने दलों में सवाल उठाएँ। अपने नेतृत्व से पूछें क्या आपको अध्यक्ष बनने का अधिकार है? यदि उत्तर “न” में मिले, तो यह सोचने का समय है।

भारतीय जनता पार्टी में रास्ते बंद नहीं होते।
यहाँ अवसर सबके लिए खुले हैं।

क्योंकि भाजपा में
वंश नहीं, योग्यता चलती है।

(भाजपा नेता प्रीतेश दीक्षित द्वारा सोशल मीडिया पर व्यक्त विचारों पर आधारित)

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