Lucknow : खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश व रोजगार को नई गति, किसानों की आय वृद्धि और स्टार्ट-अप को मिलेगा सशक्त समर्थन

कृषि उत्पादन आयुक्त, उ०प्र० शासन दीपक कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अन्तर्गत गठित राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एस.एल.ई.सी.) की 16वीं

Feb 18, 2026 - 22:06
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Lucknow : खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश व रोजगार को नई गति, किसानों की आय वृद्धि और स्टार्ट-अप को मिलेगा सशक्त समर्थन
Lucknow : खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश व रोजगार को नई गति, किसानों की आय वृद्धि और स्टार्ट-अप को मिलेगा सशक्त समर्थन

लखनऊ : उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कुशल मार्गदर्शन मे उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार मिल रही है।प्रदेश सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 का उद्देश्य राज्य में निवेश, रोजगार और निर्यात को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। उप मुख्यमंत्री के नेतृत्व व निर्देशन मे खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र मे सुदृढ़ नीति एवं पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त, उ०प्र० शासन दीपक कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अन्तर्गत गठित राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एस.एल.ई.सी.) की 16वीं बैठक कृषि उत्पादन आयुक्त कार्यालय सभागार मे संपन्न हुई। उ०प्र० खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 अंतर्गत स्वीकृत प्रस्तावों के प्लान मैप सक्षम स्तर से स्वीकृति में बिलम्ब होने के प्रकरण पर कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि संबन्धित विभागों एवं उद्यमियों के साथ पाक्षिक वर्चुवल मीटिंग की जाय एवं प्रकरणों के निस्तारण की कार्यवाही में गति लायी जाय।

निर्देश दिये गये कि विगत पाँच वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों को हस्तान्तरित कुल अनुदान के साथ-साथ विभिन्न इकाईयों के माध्यम से स्वरोजगार/ उद्यमिता विकास की जानकारी प्राप्त करने हेतु संबन्धित क्षेत्र से जुडी सलाहकार संस्था के साथ अनुबन्ध कर ग्राउण्ड सर्वे कराने एवं यह ज्ञात करने की आवश्यकता पर बल दिया गया कि प्रदेश के किन जनपदों में समानान्तर इकाईयों की स्थापना से सैचुरेशन तो उत्पन्न नहीं हो जायेगा, यदि ऐसी फाइन्डिंग प्राप्त होती है, तो निवेशकों को अन्यत्र जनपदों में इकाई स्थापना हेतु सुझाव दिया जाय। जिन जनपदों से कोई प्राजेक्ट स्वीकृत नहीं हैं, वहाँ के जिलाधिकारियों से वार्ता कर आवश्यक कार्यवाही करने हेतु निदेशक, खाद्य प्रसंस्करण को समन्वय करने हेतु निर्देशित किया गया।बैठक मे बताया गया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अन्तर्गत जनपद बरेली कुल स्वीकृत 33 परियोजनाओं के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर,वहीं जनपद कानपुर नगर 24 परियोजनाओं के साथ द्वितीय एवं 22 परियोजनाओं के साथ आगरा एवं रामपुर तृतीय स्थान पर है।

अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा अवगत कराया गया कि उ०प्र० खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत अब तक 593 प्रस्तावों को अप्रैजल समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अप्रैजल समिति द्वारा  471 प्रस्तावों को एस.एल.ई.सी. के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एस०एल०ई०सी० 460 प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति प्रदान की गयी। राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एस.एल.ई.सी.) की 16वीं बैठक में समिति के समक्ष 22 प्रस्ताव परीक्षण एवं निर्णय हेतु प्रस्तुत किये गये।एस०एल०ई०सी० द्वारा जनपद कानपुर नगर से 03, कुशीनगर से 01, सुल्तानपुर से 01, गौतम बुद्ध नगर से 01, कानपुर देहात से 01, अमेठी से 02, कौशाम्बी से 01, वाराणसी से 01, सहारनपुर से 01, जालौन से 01, रामपुर से 01, हाथरस से 01, बाराबंकी से 02, शामली से 01, गोरखपुर से 01, मुरादाबाद से 01, सीतापुर से 01 एवं एटा से 01 कुल 22 प्रस्तावों केसापेक्ष लेटर-आफ-कम्फर्ट जारी करने की स्वीकृत प्रदान की गयी। बताया गया कि 22 प्रोजेक्ट्स पर अनुमानित रू0 500 करोड़ के निवेश होगा, इसमे 55 करोड़ का अनुदान मिलेगा।

बैठक मे बताया गया कि विगत वर्ष के अंत तक कुल 127 इकाईयों की सब्सिडी के सापेक्ष वर्तमान वित्तीय वर्ष में अद्यतन 311 अर्थात 144.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। विगत वित्तीय वर्ष में जहाँ प्रथम एवं द्वितीय किश्त 26 इकाईयों को हस्तान्तरित की गयी थी, वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में अद्यतन 82 अर्थात 215 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। विगत वर्ष में रू0 13.00 करोड़ के व्यय के सापेक्ष वर्तमान वित्तीय वर्ष में अद्यतन उपलब्ध बजट के सापेक्ष रू0 111.67 करोड़ की प्रगति प्राप्त की गयी है।

बैठक मे निर्देश दिये गये कि उ०प्र० खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाय। उचित होगा कि इसके लिए अधिकतम 3 मिनट की डाक्यूमेन्टरी फिल्म तैयार कराया जाय, जिसमें पहले विभागीय अधिकारियों द्वारा नीति से अवगत कराया जाय, तत्पश्चात नीति से लाभान्वित उद्यमी, स्टार्ट-अप से उनकी आवाज में सफलता की कहानी को रिकार्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाय ताकि अन्य लोगो को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके तथा वे भी नीति अंतर्गत लाभान्वित हो सकें। नीति अंतर्गत स्थापित इकाईयों की सफलता की कहानियां प्रतिदिन विभागीय हैण्डल या उपलब्ध सूचना प्रौद्योगिकी हैण्डल के माध्यम से प्रसारित कराया जाये। इस प्रकार के प्रसारण से नव-नवयुवको/ युवतियों / स्टार्ट-अप को प्रेरणा मिलेगी और वह अधिक से अधिक संख्या में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को स्थापित करने हेतु आगे आयेंगें।

उ०प्र० खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति अंतर्गत नामित थर्ड पार्टी इन्पेक्शन एजेन्सी आर०बी०एस० कालेज, आगरा के डा० रणविजय सिंह, प्राध्यापक, कृषि अर्थशास्त्र एवं डा० अंकुर महेन्द्र आर्या, सहायक प्राध्यापक, कृषि यांत्रिकी को आवंटित परियोजनाओं के गुणवत्तायुक्त स्थलीय निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग हेतु कृषि उत्पादन आयुक्त, उ०प्र० शासन द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

बताया गया कि अमेठी एवं सुलतानपुर पशु एवं कुक्कुट चारा उत्पादन एवं बरेली, रामपुर, सहारपुर एवं पीलीभीत फ्रोजेन फल एवं सब्जियों तथा मशरूम उत्पादन के हब के रूप में विकसित हो रहा है।समिति द्वारा उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अन्तर्गत स्थापित परियोजनाओं को संचालित करने में स्थानीय कृषकों की भागेदारी यथा रा-मटेरियल की आपूर्ति में सहयोग लेने तथा उनकी आय में वृद्धि करने को प्रमुखता से लिया गया तथा इस पर बल दिए जाने के निर्देश दिए गये।

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