गाजियाबाद में कथावाचक निधि सारस्वत ने पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के बेटे चिराग उपाध्याय से रचाई शादी।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 9 दिसंबर 2025 को एक भव्य विवाह समारोह का आयोजन हुआ, जहां प्रसिद्ध कथावाचक और भजन गायिका
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 9 दिसंबर 2025 को एक भव्य विवाह समारोह का आयोजन हुआ, जहां प्रसिद्ध कथावाचक और भजन गायिका निधि सारस्वत ने पूर्व ऊर्जा मंत्री स्वर्गीय रामवीर उपाध्याय के इकलौते बेटे चिराग उपाध्याय से विवाह बंधन में बंध गईं। यह शादी नायाब वेदांता फार्म में संपन्न हुई, जो राजनीतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं का अनूठा मेल दर्शाती है। विवाह की रस्में 7 दिसंबर से शुरू हो गई थीं, और 8 दिसंबर को हल्दी समारोह गाजियाबाद स्थित उपाध्याय परिवार के आवास पर आयोजित किया गया। चिराग ने पारंपरिक घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन के द्वार पर पहुंचकर निधि का स्वागत किया, और सात फेरे लेकर दोनों ने जीवन साथी के रूप में एक-दूसरे को स्वीकार किया। यह विवाह ब्राह्मण समाज की परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ, जिसमें वेद मंत्रोच्चार और पारिवारिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। समारोह में परिवार के सदस्यों और निकट रिश्तेदारों ने भाग लिया, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को सख्ती से लागू रखा गया। निधि सारस्वत का जन्म 1997 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सासनी गेट क्षेत्र में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चिरंजी लाल गर्ल्स कॉलेज से प्राप्त की। मात्र आठ वर्ष की आयु से ही उन्होंने श्रीमद् भगवद्गीता का पाठ शुरू कर दिया, जो उनकी आध्यात्मिक यात्रा का प्रारंभिक बिंदु था। निधि श्रीमद् भागवत कथा, रामायण और भागवत प्रवचनों की प्रसिद्ध वाचिका हैं। वे अपनी छोटी बहन नेहा सारस्वत के साथ मिलकर कथाएं सुनाती हैं, और दोनों को भक्तों के बीच युगल जोड़ी के रूप में जाना जाता है। नेहा भी भजन गायन में निधि का साथ देती हैं, और उनकी संयुक्त प्रस्तुतियां देशभर में लोकप्रिय हैं। निधि ने एमएससी और बीएड की शिक्षा प्राप्त की है, जो उनकी बौद्धिक क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में कथाएं सुनाई हैं, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है।
निधि की आध्यात्मिक यात्रा ने उन्हें कई सम्मान दिलाए। उन्हें यूनाइटेड किंगडम संसद से इंटरनेशनल श्रीमद् भागवद्गीता स्कॉलर अवॉर्ड प्रदान किया गया। इसके अलावा, लंदन के मेयर से हार्मनी अवॉर्ड भी प्राप्त हुआ। ये पुरस्कार उनके आध्यात्मिक साहित्य और प्रवचनों में योगदान को मान्यता देते हैं। निधि विकलांग व्यक्तियों के लिए कार्य करने वाली एक फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं, जहां वे सामाजिक कल्याण गतिविधियों में भाग लेती हैं। उनके भजन जैसे मैं राधावल्लभ की राधारानी मेरी हैं और भजो रे मन गोविंदा ने लाखों श्रोताओं को प्रभावित किया है। निधि की कथाएं भावनात्मक गहराई और संगीतमय प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती हैं। उनकी यात्रा ने साबित किया कि युवा पीढ़ी आध्यात्मिक परंपराओं को नई ऊर्जा दे सकती है। चिराग उपाध्याय स्वर्गीय रामवीर उपाध्याय और सीमा उपाध्याय के इकलौते पुत्र हैं। रामवीर उपाध्याय उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रह चुके थे, और उन्होंने चिकित्सा शिक्षा तथा परिवहन विभाग का भी प्रभार संभाला था। रामवीर 2022 में कैंसर से जूझते हुए निधन हो गया, जिसके बाद परिवार ने उनकी विरासत को संभाला। सीमा उपाध्याय हाथरस जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, और वे 2009 में आगरा की फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। चिराग ने राजनीतिक पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर सामाजिक कार्यों में रुचि दिखाई है। 2020 में चिराग ने भाजपा का दामन थाम लिया, जो उनके पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का कदम था। रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई मुकुल उपाध्याय भी भाजपा से जुड़े हुए हैं। चिराग ने पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं, और वे ब्राह्मण समाज के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे।
निधि और चिराग की मुलाकात 2020 में अलीगढ़ में आयोजित एक ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में हुई। दोनों का आध्यात्मिकता की ओर गहरा झुकाव था, जो उनकी निकटता का आधार बना। चिराग ने निधि के प्रवचनों को सुना, और उनकी बातचीत धीरे-धीरे व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गई। परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार किया, और विवाह की औपचारिक घोषणा की गई। चिराग के परिवार ने निधि को अपनी बेटी के रूप में अपनाया, जबकि निधि के परिवार ने चिराग को पुत्र के समान माना। यह विवाह दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का प्रतीक है। चिराग ने अपनी शिक्षा के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में योगदान दिया, जबकि निधि ने अपनी कथावाचक भूमिका को जारी रखा। दोनों की साझा रुचि आध्यात्म और सेवा भाव ने इस बंधन को मजबूत किया। विवाह समारोह की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं। 7 दिसंबर को संगीत और अन्य पूर्व रस्में संपन्न हुईं, जबकि 8 दिसंबर को हल्दी का आयोजन उपाध्याय परिवार के गाजियाबाद स्थित आवास पर किया गया। हल्दी समारोह में परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से भाग लिया, और हल्दी मिश्रण से दुल्हन की त्वचा की देखभाल की रस्म निभाई गई। 9 दिसंबर को मुख्य विवाह समारोह नायाब वेदांता फार्म में हुआ, जहां विस्तृत सजावट और मंडप की व्यवस्था की गई थी। चिराग घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचे, और द्वार पूजन के बाद निधि का स्वागत किया। पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों का जाप किया गया, और सात फेरे के दौरान दोनों ने एक-दूसरे के प्रति प्रतिज्ञा ली। विदाई की रस्म भावुक रही, जहां निधि ने अपने मायके को अलविदा कहा। समारोह में केवल निकट परिवार और चुनिंदा अतिथियों को आमंत्रित किया गया था।
रामवीर उपाध्याय की अनुपस्थिति समारोह में महसूस हुई। परिवार के सदस्यों ने उनकी याद में भावुक क्षण बिताए, और कहा कि रामवीर इस दिन को देखना चाहते। सीमा उपाध्याय ने बेटे की शादी को परिवार की नई शुरुआत बताया। चिराग ने पिता की स्मृति में एक छोटा सा स्मरण समारोह भी आयोजित किया। निधि के परिवार ने भी रामवीर को श्रद्धांजलि दी, और कहा कि यह विवाह दोनों परिवारों के मूल्यों को जोड़ता है। विवाह के बाद चिराग और निधि ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और साझा जीवन की प्रतिबद्धता व्यक्त की। समारोह की तस्वीरें और वीडियो परिवार के माध्यम से साझा किए गए, जो विवाह की भव्यता को दर्शाते हैं। यह विवाह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और आध्यात्मिक दुनिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। निधि की कथावाचक पहचान और चिराग की राजनीतिक पृष्ठभूमि इस बंधन को विशेष बनाती है। रामवीर उपाध्याय हाथरस जिले के सिकंद्राराऊ, सदाबाद और मुरसान विधानसभा क्षेत्रों से विधायक रह चुके थे, और उन्होंने जिले के विकास में योगदान दिया। उनके निधन के बाद चिराग ने पिता की विरासत को संभाला, और भाजपा में सक्रियता बढ़ाई। निधि ने विवाह के बाद कहा कि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को जारी रखेंगी, और चिराग परिवार के सामाजिक कार्यों में सहयोग करेंगी। यह जोड़ा आध्यात्म और राजनीति के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है। विवाह समारोह ने गाजियाबाद और अलीगढ़ में चर्चा का विषय बना दिया।
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