आने वाला है भारतीय जनगणना का डिजिटल युग- 2027 की गणना होगी पूरी तरह मोबाइल ऐप्स और वेब पोर्टल पर आधारित, गृह मंत्रालय ने की लोकसभा में पुष्टि।
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार 9 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में पुष्टि की कि भारत
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार 9 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में पुष्टि की कि भारत की 2027 जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। यह ऐतिहासिक कदम देश की 16वीं जनगणना को पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से हटाकर आधुनिक तकनीकी आधार पर ले जाएगा, जहां गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद संतान पांडे के प्रश्न के जवाब में राय ने कहा कि यह निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है, और डेटा संग्रहण मोबाइल ऐप्स के जरिए होगा। साथ ही, नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध होगा, जहां वे समर्पित वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया को एक विशेष पोर्टल के जरिए प्रबंधित और निगरानी की जाएगी, जो पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करेगा। यह बदलाव 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई जनगणना की तैयारियों का हिस्सा है, जो अब 2026-2027 में दो चरणों में चलेगी।
जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहला चरण घर सूचीकरण और आवास गणना पर केंद्रित होगा। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, और राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में सम्पन्न होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह चरण गृह सूचीकरण, आवास की स्थिति और संपत्ति विवरण जैसे तत्वों पर डेटा संग्रह करेगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी-मार्च 2027 में संपन्न होगा, और संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 रात्रि 12 बजे निर्धारित की गई है। हालांकि, लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान हैं, जहां गणना सितंबर 2026 में होगी और संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 रात्रि 12 बजे होगी। इस व्यवस्था से जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान होगा, और पूरे देश में समान रूप से कवरेज सुनिश्चित होगा। मंत्रालय ने कहा कि यह समयसीमा पूर्व जनगणनाओं की प्रथाओं के अनुरूप रखी गई है, ताकि कोई व्यवधान न हो, डिजिटल प्रक्रिया का मुख्य आधार मोबाइल ऐप्स होंगे, जो एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होंगे। गणनाकर्ता अपने व्यक्तिगत स्मार्टफोन पर ऐप इंस्टॉल करके डेटा दर्ज करेंगे, जो जीपीएस एकीकरण के माध्यम से स्थान सत्यापन सुनिश्चित करेगा। स्व-गणना के लिए वेब पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जहां नागरिक आधार या अन्य पहचान पत्रों से लॉगिन करके अपनी जानकारी भर सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और प्रवासी आबादी के लिए उपयोगी होगी, जहां पारंपरिक घर-घर जाकर गणना में देरी हो सकती है। मंत्रालय ने पुष्टि की कि डेटा संग्रहण सुरक्षित रहेगा, और गोपनीयता नियमों का सख्त पालन होगा। प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जो रीयल-टाइम अपडेट्स प्रदान करेगा। इससे प्रशिक्षण, सत्यापन और रिपोर्टिंग सभी चरण डिजिटल रूप से प्रबंधित होंगे। पूर्व परीक्षण के रूप में, अक्टूबर 2025 में जारी गजट अधिसूचना के अनुसार चयनित नमूना क्षेत्रों में घर सूचीकरण का प्री-टेस्ट आयोजित किया गया, जो सफल रहा।
जनगणना 2027 में जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा, जो 1931 के बाद पहली बार होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने 30 अप्रैल 2025 को इस निर्णय को मंजूरी दी थी। यह कदम सामाजिक-आर्थिक संकेतकों को मजबूत करेगा, और नीति निर्माण में सहायक होगा। मंत्रालय ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 तथा संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश 1950 के अनुसार की जाएगी, जो समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं। जाति डेटा संग्रहण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही होगा, ताकि सटीकता बनी रहे। इसके अलावा, प्रवासन संबंधी प्रश्नों को विस्तार दिया जाएगा, जिसमें वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवासन का कारण शामिल होंगे। यह बदलाव आंतरिक प्रवासियों, विशेषकर श्रमिकों की गणना को बेहतर बनाएगा, जो देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रश्नावली विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और जनगणना डेटा उपयोगकर्ताओं से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दी जाती है। ड्राफ्ट प्रश्नावली का फील्ड टेस्टिंग किया जाता है, और फिर आधिकारिक गजट में अधिसूचित की जाती है। जनगणना की तैयारियां जून 2025 में गजट अधिसूचना के साथ शुरू हो चुकी हैं, जिसमें जनसंख्या गणना की मंशा व्यक्त की गई थी। जुलाई 2025 में राष्ट्रीय राजधानी में जनगणना संचालन निदेशकों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां रोडमैप पर चर्चा हुई। मंत्रालय ने पुष्टि की कि डिजिटल डेटा संग्रहण और जाति गणना की योजना पर कार्य चल रहा है। जनवरी 2026 तक राज्यों को कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है, ताकि समय पर तैयारी हो सके। प्राथमिक स्कूल शिक्षकों को गणनाकर्ता के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो पूर्व प्रथाओं के अनुरूप है। लगभग 34 लाख गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक तैनात होंगे, साथ ही 1.3 लाख जनगणना अधिकारी कार्यभार संभालेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल टूल्स पर केंद्रित होंगे, जिसमें ऐप उपयोग और डेटा सत्यापन शामिल होंगे। मंत्रालय ने कहा कि 150 वर्षों की पूर्व जनगणनाओं से प्राप्त अनुभवों को शामिल किया गया है, ताकि प्रक्रिया सुगम हो।
यह डिजिटल जनगणना देश की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है, जो डेटा संग्रहण को तेज और सटीक बनाएगी। परिणामों की तत्काल उपलब्धता से 2029 की लोकसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया प्रभावित होगी, जो 1971 की जनगणना पर आधारित फ्रीज को समाप्त करेगी। 84वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2001 के अनुसार, 2026 के बाद की पहली जनगणना पर आधारित परिसीमन होगा। इससे संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा, जो जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखेगा। इसके अलावा, केंद्रीय वित्त आयोग और योजनाओं के लिए फंड आवंटन में डेटा का उपयोग होगा। जाति गणना से सामाजिक न्याय संबंधी नीतियां मजबूत होंगी, और क्षेत्रीय असंतुलनों का समाधान संभव होगा। मंत्रालय ने कहा कि प्रश्नावली में ग्रामीण-शहरी असमानताओं, बुनियादी ढांचे और विकास संबंधी तत्व शामिल हैं। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए अंतर-राज्य परिषद बैठकों में चर्चा होगी, ताकि प्रतिनिधित्व संतुलित रहे। जनगणना का संचालन पंजीकृत महानिरीक्षक और जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा किया जाएगा, जो गृह मंत्रालय के अधीन है। संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची प्रविष्टि 69 के तहत केंद्र सरकार को जनगणना का अधिकार है। हालांकि, दशकीय आवृत्ति कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन 1881 से हर दस वर्ष पर आयोजित होती रही है। 2027 की जनगणना 2026 के बाद पहली होगी, जो परिसीमन का आधार बनेगी। प्रश्नावली को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श लिया गया, और नवंबर 2025 तक राष्ट्रव्यापी प्री-टेस्ट समाप्त हो चुका है। मंत्रालय ने कहा कि परिणाम प्रकाशित होने में दो से तीन वर्ष लग सकते हैं, लेकिन डिजिटल प्रक्रिया से प्रोसेसिंग तेज होगी। प्रवासियों की गणना के लिए विस्तारित प्रश्न उपयोगी साबित होंगे, जो आर्थिक योजना में सहायक होंगे।
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