Hardoi: संक्रमण रोकने की पहल: हाई रिस्क मरीजों की एक्स-रे जांच जरूरी।

प्रदेश में टीबी की आशंका वाले सभी मरीजों का एक्स-रे कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य

Jan 19, 2026 - 18:59
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Hardoi: संक्रमण रोकने की पहल: हाई रिस्क मरीजों की एक्स-रे जांच जरूरी।
संक्रमण रोकने की पहल: हाई रिस्क मरीजों की एक्स-रे जांच जरूरी।

Hardoi: प्रदेश में टीबी की आशंका वाले सभी मरीजों का एक्स-रे कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पाण्डे ने बताया कि टीबी की पहचान के लिए एक्स-रे एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक जांच है, जिससे बीमारी के संकेत समय रहते मिल जाते हैं। इसके माध्यम से न केवल शीघ्र उपचार शुरू किया जा सकता है, बल्कि संक्रमण के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य समय पर रोग की पहचान, टीबी से होने वाली मृत्यु दर में कमी लाना और नए मामलों को रोकना है।

एक्स-रे जांच से टीबी की मौजूदगी के साथ-साथ संक्रमण की गंभीरता और फैलाव का भी आकलन किया जा सकता है। डायबिटीज या एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, धूम्रपान या नशे का सेवन करने वाले, शराब पीने वाले, टीबी के पूर्व मरीज, टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले सहित कुल 10 उच्च जोखिम समूहों में शामिल लोगों में टीबी होने की संभावना अधिक रहती है। इन सभी श्रेणियों के व्यक्तियों का अनिवार्य रूप से एक्स-रे कराया जाएगा तथा उनकी जानकारी निक्षय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।

इसके तहत ओपीडी में आने वाले उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर उनकी पर्ची पर लाल मोहर या सितारा चिन्ह लगाया जाएगा। इसके बाद उन्हें मेडिकल ऑफिसर के पास भेजा जाएगा, ताकि प्राथमिकता के आधार पर एक्स-रे के लिए रेफर किया जा सके। जनपद में जिला अस्पताल सहित सभी 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। इसके अलावा जरूरत के अनुसार पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की भी व्यवस्था की गई है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.नौमान उल्लाह ने बताया कि कई बार टीबी के शुरुआती चरण में बलगम की जांच नकारात्मक आती है और खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे लक्षण भी स्पष्ट नहीं होते। ऐसे मामलों में एक्स-रे से फेफड़ों में संक्रमण, सूजन या धब्बों जैसे संकेत सामने आ जाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि संक्रमण कितना गंभीर है और बीमारी केवल फेफड़ों तक सीमित है या शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है।

उन्होंने यह भी बताया कि कई बार निमोनिया, फेफड़ों के कैंसर या अन्य संक्रमणों के लक्षण टीबी से मिलते-जुलते होते हैं। ऐसे में एक्स-रे डिफरेंशियल डायग्नोसिस में सहायक होता है। यदि एक्स-रे में टीबी की आशंका दिखाई देती है तो पुष्टि के लिए मरीज की ट्रूनैट, सीबीनेट या बलगम की जांच कराई जाती है।

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