जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव: नेशनल कॉन्फ्रेंस की शानदार जीत, तीन सीटें हासिल, भाजपा को एक पर सफलता।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद पहली बार हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजे शुक्रवार को घोषित हो गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा को एक सीट
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद पहली बार हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजे शुक्रवार को घोषित हो गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा को एक सीट मिली। यह चुनाव चार खाली सीटों के लिए हुआ था, जो फरवरी 2021 से रिक्त पड़ी हुई थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता चौधरी मोहम्मद रमजान ने 58 वोट हासिल कर एक सीट जीती, जबकि सज्जाद अहमद किचलू और शमी ओबेरॉय ने भी अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने चौथी सीट पर 32 वोटों से सफलता पाई। यह परिणाम नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है, जो विधानसभा में बहुमत के साथ सत्ता चला रही है।
यह चुनाव जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण कदम है। अनुच्छेद 370 को 2019 में समाप्त करने के बाद केंद्र शासित प्रदेश बना। उसके बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस ने प्रमुख भूमिका निभाई। ओमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। राज्यसभा की चारों सीटें पूर्व सदस्यों के रिटायरमेंट के कारण खाली थीं। इनमें पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, पीडीपी के मीर मोहम्मद फयाज, भाजपा के शमशेर सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नजीर अहमद लावेय शामिल थे। चुनाव विधानसभा के सदस्यों द्वारा वोटिंग से तय होता है। कुल 90 विधायक हैं, जिनमें से अधिकांश नेशनल कॉन्फ्रेंस के हैं।
चुनाव 24 अक्टूबर को श्रीनगर के विधानसभा भवन में हुआ। सभी विधायकों ने वोट डाले। गिनती दोपहर में शुरू हुई और शाम तक नतीजे आ गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चार उम्मीदवार उतारे थे। चौधरी मोहम्मद रमजान कुपवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। वे पूर्व मंत्री रहे और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उनकी जीत को पार्टी ने ऐतिहासिक बताया। सज्जाद अहमद किचलू रानावली से विधायक हैं। वे युवा चेहरे हैं और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय। शमी ओबेरॉय, जिन्हें शम्मी ओबेरॉय के नाम से जाना जाता है, जम्मू क्षेत्र से हैं। वे सिख समुदाय की प्रतिनिधि हैं और पार्टी की एकता का प्रतीक। इन तीनों की जीत से नेशनल कॉन्फ्रेंस का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मजबूत हो गया।
भाजपा की ओर से सत शर्मा ने चौथी सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के इमरान निसार को 32-22 वोटों से हराया। सत शर्मा जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष हैं। वे पूर्व मंत्री भी रहे। उनकी जीत को पार्टी ने जम्मू क्षेत्र के समर्थन का प्रमाण बताया। भाजपा ने तीन उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन केवल एक पर सफलता मिली। यह सीट जम्मू संभाग से जुड़ी मानी जाती है, जहां भाजपा का आधार मजबूत है। नतीजों के बाद भाजपा ने कहा कि यह उनकी बढ़ती लोकप्रियता दिखाता है।
ओमर अब्दुल्ला ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रॉस वोटिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों से कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, फिर भाजपा को चार अतिरिक्त वोट कैसे मिले। उन्होंने कहा कि देखते हैं कौन सा गुप्त दल अपनी आत्मा बेचने की बात स्वीकार करता है। यह बयान राजनीतिक बहस छेड़ दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि तीन सीटें जीतना अपेक्षित था, लेकिन भाजपा की जीत पर सतर्क रहेंगे। ओमर अब्दुल्ला ने पहले ही कांग्रेस से समर्थन का विश्वास जताया था। कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस का साथ दिया। पीडीपी और अन्य छोटे दलों ने भी गठबंधन का पालन किया।
यह चुनाव अनुच्छेद 370 के बाद पहला बड़ा राजनीतिक आयोजन था। 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 53 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 6, भाजपा को 29 मिलीं। पीडीपी को 3। गठबंधन सरकार बनी। राज्यसभा चुनाव विधानसभा की ताकत दिखाता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की तीन सीटें विधानसभा बहुमत का परिणाम हैं। भाजपा की एक सीट जम्मू के हिंदू वोट बैंक से आई। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह परिणाम आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों का संकेत देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत कश्मीर घाटी में उनकी पकड़ मजबूत करती है। जम्मू में भाजपा का दबदबा बरकरार। ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यसभा सदस्य विकास और शांति के लिए काम करेंगे। चौधरी रमजान ने जीत के बाद कहा कि वे कश्मीर के मुद्दों को संसद में उठाएंगे। सज्जाद किचलू ने युवाओं के रोजगार पर फोकस का वादा किया। शमी ओबेरॉय ने महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात की। सत शर्मा ने कहा कि भाजपा केंद्र सरकार के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर का विकास करेगी।
चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। निर्वाचन आयोग ने कड़े इंतजाम किए। वोटिंग के दौरान कोई अनियमितता नहीं हुई। नतीजों के बाद श्रीनगर और जम्मू में उत्सव मनाया गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस कार्यालय पर मिठाई बांटी गई। भाजपा ने भी अपनी जीत का जश्न मनाया। विपक्षी दलों ने परिणामों का स्वागत किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि गठबंधन की जीत सबकी है। पीडीपी ने बधाई दी, लेकिन अपनी अनुपस्थिति पर चुप्पी साधी।
सोशल मीडिया पर नतीजे वायरल हो गए। एएनआई के ट्वीट को लाखों व्यूज मिले। लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि यह लोकतंत्र की जीत है। कुछ ने क्रॉस वोटिंग पर सवाल उठाए। न्यूज चैनलों ने लाइव कवरेज किया। आज तक, इंडिया टीवी और हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रमुखता दी। एनआई ने ओमर के बयान को हेडलाइन बनाया। यह चुनाव जम्मू-कश्मीर की राजनीति को नई दिशा देगा। राज्यसभा सदस्य संसद में प्रदेश के हितों की रक्षा करेंगे।
अब नजरें आगामी उपचुनावों पर हैं। नागरोटा और बडगाम विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को उपचुनाव होंगे। नागरोटा में देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई। बडगाम में ओमर अब्दुल्ला के इस्तीफे से। नेशनल कॉन्फ्रेंस इन पर जीत का दावा कर रही। भाजपा नागरोटा पर नजर। ये उपचुनाव विधानसभा में संतुलन बनाए रखेंगे।
जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2019 के बदलाव के बाद शांति स्थापना पर जोर। केंद्र सरकार ने विकास परियोजनाएं शुरू कीं। राज्यसभा चुनाव इस प्रक्रिया का हिस्सा। नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत से ओमर सरकार मजबूत हुई। भाजपा की सीट से विपक्ष की आवाज बनी रहेगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह संतुलित परिणाम है। भविष्य में और चुनाव होंगे, जो प्रदेश को आगे ले जाएंगे।
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