बिजनौर: मां ने कहा- बेटी को तेंदुए उठा ले गया, सर्च किया तो बीए छात्रा प्रेमी के साथ देहरादून में मिली। 

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। राजपुर नन्हेड़ा गांव की 20 वर्षीय साक्षी, जो बीए की छात्रा है, गुरुवार शाम खेत में शौच के लिए

Oct 25, 2025 - 13:31
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बिजनौर: मां ने कहा- बेटी को तेंदुए उठा ले गया, सर्च किया तो बीए छात्रा प्रेमी के साथ देहरादून में मिली। 
बिजनौर: मां ने कहा- बेटी को तेंदुए उठा ले गया, सर्च किया तो बीए छात्रा प्रेमी के साथ देहरादून में मिली। 

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। राजपुर नन्हेड़ा गांव की 20 वर्षीय साक्षी, जो बीए की छात्रा है, गुरुवार शाम खेत में शौच के लिए गई थी। कुछ देर बाद जब वह लौटी नहीं, तो परिवार ने चिल्लाना शुरू कर दिया। साक्षी की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी को तेंदुए ने उठा लिया है। यह इलाका तेंदुओं के हमलों के लिए कुख्यात है, इसलिए दावा सुनते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ड्रोन कैमरों और ग्रामीणों की मदद से पूरे दिन खेतों और जंगलों में तलाशी अभियान चलाया। लेकिन अगले दिन खुलासा हुआ कि साक्षी सुरक्षित है और देहरादून में अपने प्रेमी के साथ है। यह घटना न केवल राहत की सांस लाई, बल्कि परिवार के झूठे दावे पर सवाल भी खड़े कर दी।

घटना गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 की शाम करीब साढ़े छह बजे की है। राजपुर नन्हेड़ा गांव बिजनौर के नगीना तहसील में आता है। यहां गन्ने के खेतों की भरमार है, जो तेंदुओं के लिए छिपने का सुरक्षित स्थान होते हैं। साक्षी एक सामान्य परिवार से है। उसके पिता किसान हैं और मां घर संभालती हैं। साक्षी स्थानीय कॉलेज में बीए की दूसरी वर्ष की छात्रा है। वह पढ़ाई में अच्छी है और गांव में सबकी लाड़ली मानी जाती है। शाम को वह अपनी मां के साथ खेत के पास गई। मां ने बताया कि बेटी ने कहा कि वह शौच के लिए जा रही है। कुछ मिनट बाद चीखें सुनाई दीं। मां दौड़ीं तो बेटी कहीं नजर नहीं आई। उन्होंने देखा कि खेत की झाड़ियों में कुछ हलचल है। डर के मारे उन्होंने चिल्लाया कि तेंदुआ बेटी को ले गया।

यह दावा सुनकर पूरा गांव जुट गया। ग्रामीणों ने डरते-डरते खेतों में टॉर्च जलाकर देखना शुरू किया। लेकिन अंधेरा होने के कारण कुछ न मिला। तुरंत थाने को फोन किया गया। नगीना कोतवाली पुलिस की टीम पहुंची। वन विभाग के अधिकारी भी आ गए, क्योंकि बिजनौर में पिछले दो वर्षों में तेंदुए के हमलों में 30 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। जिला वन अधिकारी ने बताया कि इलाके में तेंदुए की मौजूदगी पक्की है। गन्ने के खेतों में वे छिपते हैं और रात में हमला करते हैं। इस साल ही जुलाई में एक सात वर्षीय बच्ची की तेंदुए ने हत्या कर दी थी। अगस्त में एक महिला की मौत हुई। इसलिए दावे पर तुरंत कार्रवाई हुई।

शुक्रवार सुबह तलाशी अभियान तेज हो गया। पुलिस ने ड्रोन कैमरे उड़ाए, जो खेतों, नदियों और जंगलों पर नजर रखते थे। थर्मल इमेजिंग कैमरों से गर्मी का पता लगाया जा रहा था। वन विभाग ने तीन टीमें लगाईं। ग्रामीणों को भी शामिल किया गया। साक्षी के भाई ने बताया कि बहन का फोन बंद था। परिवार रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने कहा कि बेटी के कपड़े खेत में बिखरे मिले, जैसे तेंदुए ने खींचा हो। पुलिस ने स्निफर डॉग भी बुलाए। पूरे दिन सर्च चला। दोपहर तक कुछ सुराग नहीं मिला। ग्रामीण डरे हुए थे, बच्चे घरों में बंद। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल भी लगाए।

लेकिन शाम होते-होते ट्विस्ट आ गया। साक्षी का फोन चालू हुआ। लोकेशन ट्रेस करने पर पता चला कि वह देहरादून में है। पुलिस ने कॉल किया तो साक्षी ने बताया कि वह सुरक्षित है और एक लड़के के साथ है। वह लड़का उसी कॉलेज का सहपाठी है। दोनों का प्रेम प्रसंग दो साल से चल रहा था। साक्षी ने घरवालों को बताया कि वे शादी करना चाहते हैं, लेकिन परिवार विरोधी था। इसलिए भाग गई। प्रेमी का नाम गोपनीय रखा गया है। वह देहरादून के एक हॉस्टल में रहता है। साक्षी उसके पास पहुंच गई थी। पुलिस ने देहरादून से संपर्क किया और दोनों को बिजनौर बुलाया।

साक्षी के बयान से पूरा मामला साफ हो गया। वह घर से खुद ही निकली थी। मां ने तेंदुए का दावा इसलिए किया ताकि परिवार की इज्जत बचे। साक्षी ने कहा कि वह डर गई थी, लेकिन अब सब ठीक है। पुलिस ने परिवार को समझाया। कोई मुकदमा नहीं दर्ज किया गया, क्योंकि लड़की बालिग है। लेकिन वन विभाग नाराज था। उन्होंने कहा कि झूठे दावे से संसाधन बर्बाद हुए। ड्रोन और टीमों पर हजारों रुपये खर्च। ग्रामीणों में डर फैला। एसपी अभिषेक झा ने कहा कि ऐसी अफवाहें न फैलाएं। वन विभाग ने जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया।

यह घटना बिजनौर के तेंदुआ हमलों की समस्या को उजागर करती है। जिला गन्ने का केंद्र है। अमृतसर-पठानकोट हाईवे के पास जंगल हैं। तेंदुए शहर की ओर आ जाते हैं। एनसीआरबी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 50 से अधिक हमले। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित। वन विभाग ने कैमरे लगाए, जाल बिछाए। लेकिन बढ़ती आबादी से टकराव बढ़ा। साक्षी का मामला झूठा था, लेकिन इलाके में सतर्कता जरूरी। ग्रामीणों ने कहा कि रात में अकेले न निकलें। बच्चों को सावधान रखें।

साक्षी अब घर लौट आई। परिवार ने माफी मांगी। मां ने कहा कि डर के मारे ऐसा कहा। साक्षी ने प्रेमी से बात की। शादी पर फैसला परिवार करेगा। कॉलेज दोस्तों ने राहत की सांस ली। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए। टीवी9 हिंदी और आज तक ने कवरेज किया। लोग कमेंट्स में लिख रहे कि परिवार का डर समझ में आता, लेकिन झूठ से बचें। एक यूजर ने कहा कि तेंदुए की समस्या गंभीर है, ऐसी खबरें भ्रम फैलाती हैं।

पुलिस ने सलाह दी कि लापता होने पर तुरंत सूचना दें, झूठे दावे न करें। वन विभाग ने ट्रैप बढ़ाए। बिजनौर डीएम ने बैठक बुलाई। ग्रामीणों को फसल बीमा और सहायता का आश्वासन। साक्षी की पढ़ाई पर असर न पड़े। वह परीक्षा देगी। प्रेम प्रसंग पर परिवार सोच रहा। यह घटना समाज को आईना दिखाती है। प्रेम और परिवार के बीच संतुलन जरूरी। तेंदुए के हमलों से बचाव के लिए दीवारें बनें।

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