Sambhal: बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा: सम्भल की तुलसी बनी तमन्ना की आस्था, पर उठे सामाजिक सवाल।
सम्भल जनपद के थाना असमोली क्षेत्र अंतर्गत गांव बदनपुर बसई निवासी अमन त्यागी ने साढ़े तीन वर्ष पूर्व अपने ही गांव की मुस्लिम
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल जनपद के थाना असमोली क्षेत्र अंतर्गत गांव बदनपुर बसई निवासी अमन त्यागी ने साढ़े तीन वर्ष पूर्व अपने ही गांव की मुस्लिम युवती तमन्ना मलिक से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद दोनों कुछ समय बाहर रहे, फिर गांव लौटकर बस गए। इस दौरान तमन्ना ने हिंदू धर्म अपनाते हुए अपना नाम तुलसी रखा और दो बेटों को जन्म दिया। दो वर्षीय आर्यन और एक वर्षीय दक्ष।
पहली बार इस वर्ष तुलसी अपने पति अमन त्यागी के साथ 10 फरवरी को हरिद्वार से कांवड़ लाने निकलीं। खास बात यह रही कि उन्होंने यात्रा के दौरान बुर्का पहना। 11 फरवरी को हरिद्वार में गंगा स्नान कर ‘बम बोले’ के जयघोष के साथ कांवड़ उठाई और लगभग 170 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की। शुक्रवार को वे बिजनौर और अमरोहा होते हुए आगे बढ़ीं तथा शनिवार को सम्भल पहुंचीं, जहां कांवड़ को शिवालय क्षेमनार्थ में अर्पित करने की तैयारी बताई गई। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक निर्णय बताते हुए समर्थन किया, तो कुछ वर्गों ने सवाल उठाए कि बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने का संदेश क्या है और क्या इससे किसी धर्म की छवि प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला निजी आस्था और पहनावे की स्वतंत्रता से जुड़ा है, जबकि आलोचक इसे अनावश्यक विवाद का कारण मान रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अब तक किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या सामने नहीं आई है। पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हर नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है, बशर्ते उससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो। कुल मिलाकर, तुलसी उर्फ तमन्ना की कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर धर्म, आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस को हवा दी है जहां कुछ इसे श्रद्धा का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ सवालों के साथ देख रहे हैं।
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