Lucknow : प्रधानमंत्री ने देश का नेतृत्व सम्भालने के साथ ही डिजिटल गवर्नेन्स तथा को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त आधार प्रदान किया - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर ‘प्रगति‘ (प्रो-एक्टिव गवर्नेन्स एण्ड टाइम्ली इम्प्लीमेण्टेशन) पोर्टल के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्हों

Jan 13, 2026 - 22:58
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Lucknow : प्रधानमंत्री ने देश का नेतृत्व सम्भालने के साथ ही डिजिटल गवर्नेन्स तथा को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त आधार प्रदान किया - मुख्यमंत्री
Lucknow : प्रधानमंत्री ने देश का नेतृत्व सम्भालने के साथ ही डिजिटल गवर्नेन्स तथा को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त आधार प्रदान किया - मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री ने ‘प्रगति‘ पोर्टल के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया
  • ‘प्रगति’ पोर्टल केवल देश के बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट की समीक्षा नहीं, बल्कि नये भारत की नयी कार्य संस्कृति का उदाहरण, उ0प्र0 में यह मॉडल गेम चेन्जर साबित  हुआ
  • राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति‘ पोर्टल के माध्यम से  86 लाख करोड़ रु0 से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली 
     
    10.48 लाख करोड़ रु0 की 330 परियोजनाओं के साथ उ0प्र0 के पास देश का सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो
  •  2.37 लाख करोड़ रु0 की 128 परियोजनाएं कमीशन्ड हो चुकी, 8.11 लाख करोड़ रु0  की 202 परियोजनाएं गुणवत्तापरक एवं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही
  • टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग और ‘प्रगति‘ जैसे प्लेटफॉर्म पर निरन्तर समीक्षा के परिणामस्वरूप उ0प्र0 ‘बॉटलनेक स्टेट‘ से ‘ब्रेक-थ्रू स्टेट‘ बना
  • ‘प्रगति’ ने आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय जैसे क्षेत्रों में पॉजिटिव गवर्नेंस को नई दिशा दी, फाइल कल्चर से फील्ड रिजल्ट की दिशा में क्रान्तिकारी परिवर्तन किया
  • ‘प्रगति‘ के माध्यम से केन्द्र व राज्य के मन्त्रालयों एवं विभागों में समन्वय मजबूत तथा स्पष्ट जवाबदेही तय हुई
  • प्रदेश में रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो व एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल व इनलैण्ड वाटर-वे संचालित हो रहे
  • ‘प्रगति‘ पोर्टल से इण्टर-एजेन्सी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ, सभी सम्बन्धित साथ बैठकर एवं समन्वय बनाकर समयसीमा में समस्याओं का समाधान करते

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का नेतृत्व सम्भालने के साथ ही डिजिटल गवर्नेन्स तथा को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त आधार प्रदान किया। ‘प्रगति’ ने सिद्ध करके दिखाया कि जब इन्टेन्ट, टेक्नोलॉजी और एकाउन्टेबिलिटी एक साथ आते हैं, तो बेहतर परिणाम सुनिश्चित होते हैं। ‘प्रगति’ पोर्टल केवल देश के बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट की समीक्षा नहीं, बल्कि नये भारत की नयी कार्य संस्कृति का उदाहरण है। यह गवर्नेन्स का रिफॉर्म है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह मॉडल गेम चेन्जर साबित हुआ है। प्रदेश आज भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर ‘प्रगति‘ (प्रो-एक्टिव गवर्नेन्स एण्ड टाइम्ली इम्प्लीमेण्टेशन) पोर्टल के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग करते हुए अन्तरमन्त्रालय या अन्तरविभागीय समन्वय का ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जहां सभी समस्याओं के समाधान की दिशा में बेहतर प्रयास किये जा सकें। ‘प्रगति’ ने आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय जैसे क्षेत्रों में पॉजिटिव गवर्नेंस को नई दिशा दी है। ‘प्रगति‘ ने शासन की फाइल कल्चर से फील्ड रिजल्ट की दिशा में भी क्रान्तिकारी परिवर्तन किया है। इसके माध्यम से निर्णय तेज हुए है। समय व लागत की बर्बादी रूकी है। केन्द्र व राज्य के मन्त्रालयों एवं विभागों में समन्वय मजबूत तथा स्पष्ट जवाबदेही तय हुई है।

‘स्वागत‘ (स्टेट वाइड अटेन्शन ऑन ग्रीवान्सेज बाय एप्लीकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) पोर्टल की शुरुआत वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री द्वारा उस समय की गई थी, जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। यह पोर्टल नागरिक शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता व जवाबदेही बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। ‘स्वागत’ पोर्टल का ही राष्ट्रीय स्वरूप ‘प्रगति‘ है, जिसके माध्यम से मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सामाजिक योजनाओं तथा सिस्टम रिफॉर्म को लेकर टीम इण्डिया की अप्रोच को सुदृढ़ किया गया है। यह पोर्टल मिनीमम गवर्नमेण्ट-मैक्सिमम गवर्नेन्स की कार्यशैली को दर्शाने का महत्वपूर्ण आधार बना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण सम्बन्धी अनेक प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं, जो केवल राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की रीढ़ बने हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति‘ पोर्टल के माध्यम से 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है, जिनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा सीधे प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। 3,162 में 2,958 मुद्दों का समाधान हुआ है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि गवर्नेन्स की विश्वसनीयता को दर्शाता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल 10 लाख 48 हजार करोड़ रुपये की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो उत्तर प्रदेश के पास है, जिसमें परिवहन, पावर, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्र सम्मिलित हैं। इनकी समीक्षा पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। इसमें 02 लाख 37 हजार करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (39 प्रतिशत) कमीशन्ड हो चुकी हैं तथा 08 लाख 11 हजार करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं सरकार की मंशानुरूप गुणवत्तापरक एवं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। सड़क व रेलवे के क्षेत्र में सर्वाधिक प्रोजेक्ट ने उत्तर प्रदेश को ट्रान्सपोर्ट एण्ड लॉजिस्टिक हब बनाने में मदद की है। 

लगभग 09 वर्षों में प्रदेश को एक्सप्रेस-वे राज्य के रूप में स्थापित करने में सफलता प्राप्त हुई है। प्रदेश में रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो व एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल व इनलैण्ड वाटर-वे संचालित हो रहे हैं। यह सभी प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से इसलिए चले हैं, क्योंकि ‘प्रगति’ पोर्टल के माध्यम से इनकी लगातार समीक्षा एवं भूमि, पर्यावरण या अन्य समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। आज के प्रतिस्पर्धा के युग में यदि कोई राज्य प्रोजेक्ट लाने व एन0ओ0सी0 प्रदान करने में लापरवाही करेगा, तो स्वाभाविक रूप से निवेशकों को जहां आसानी होगी, वहां चला जाएगा। निवेशकों के लिए प्रोजेक्ट्स को निश्चित समयान्तर्गत पूर्ण करना ही प्रगति का आधार है। समस्याओं के निस्तारण की कार्यवाही सुशासन का मॉडल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 04 लाख 19 हजार करोड़ रुपये के 65 बड़े प्रोजेक्ट ‘प्रगति‘ के अन्तर्गत आते हैं, जिनमें 26 प्रोजेक्ट कमीशन्ड हो गये हैं तथा 39 प्रोजेक्ट निर्माण के अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। ‘प्रगति‘ पोर्टल से इण्टर-एजेन्सी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। इसके माध्यम से जब समीक्षा होती है, तो अलग-अलग विभाग जैसे राजस्व, पॉल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज विभाग सहित अन्य सम्बन्धित विभाग एक साथ बैठते हैं। एक दूसरे के साथ समन्वय बना कर निश्चित समय सीमा में समस्याओं का समाधान करते हैं। इससे स्वीकृतियां तेजी से होती है। परिणामस्वरूप, हाईवे, रेलवे, पावर, टेलीकॉम जैसे प्रोजेक्ट्स में तीव्रता आती है।

‘प्रगति’ पोर्टल के माध्यम से कुल 515 में 494 मुद्दों अर्थात् 96 प्रतिशत का समाधान किया गया है। 287 में 278 प्रोजेक्ट्स अर्थात् 97 प्रतिशत का समाधान ‘प्रगति’ पोर्टल के माध्यम से किया गया है। यह उच्च समाधान के दृष्टिगत प्रशासनिक तत्परता और निर्णायक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाता है। जब अलग-अलग विभाग से जुड़े मामले एक प्लेटफॉर्म पर आते हैं और एक-दूसरे के सामने जवाबदेही तय होती है, तो तेजी से मामलों का निस्तारण निश्चित समय सीमा के अंदर करना होता है। टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग और ‘प्रगति‘ जैसे प्लेटफॉर्म पर निरन्तर समीक्षा के परिणामस्वरूप प्रोजेक्ट की दिशा में कार्य करने के लिए उत्तर प्रदेश आज ‘बॉटलनेक स्टेट‘ से ‘ब्रेक-थ्रू स्टेट‘ बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट्स के माध्यम से राज्य फैसेलिटेटर से एक्सेलिरेटर के रूप में आगे बढ़ा है। ‘प्रगति‘ जैसे प्लेटफॉर्म ने टीम इण्डिया स्पिरिट को और अधिक प्रभावी बनाया है। केन्द्र और राज्य सरकार मिल कर जब किसी प्रोजेक्ट में साथ आगे बढ़ते हैं, तो बेहतर रिजल्ट सामने आते हैं। नागरिक तक विकास समय पर प्रभावी ढंग से पहुंचाना प्रधानमंत्री का विजन है, उस विज़न को ‘प्रगति‘ जैसे पोर्टल के माध्यम से प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिली है। नए भारत की नई सोच के साथ अब समस्या पर चर्चा नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से समाधान पर चर्चा होती है। जब प्रोजेक्ट्स समयबद्ध तरीके से चलता है, तो रोजगार सृजन के साथ विकास को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप ‘प्रगति‘ पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से आज प्रत्येक प्रोजेक्ट के शिलान्यास के साथ उसके पूर्ण होने की तिथि भी तय हो जाती है। इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

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