Lucknow : उत्तर प्रदेश में निवेश को जमीन पर उतारने में तेजी ला रहा ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह
औद्योगिक विकास विभाग की जानकारी के अनुसार राज्य अब जीबीसी-5 की तैयारी कर रहा है। इस आयोजन से 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाओं
उत्तर प्रदेश भारत के औद्योगिक क्षेत्र में नया आर्थिक बदलाव ला रहा है। निवेश में तेज बढ़ोतरी और व्यापार आसानी के प्रति राज्य की निष्ठा ने इसे औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना निर्माण और रोजगार पैदा करने के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह (जीबीसी) श्रृंखला इस विकास यात्रा का मजबूत साधन बनी हुई है। इसके चार सफल संस्करणों के माध्यम से अब तक 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारा गया है।
औद्योगिक विकास विभाग की जानकारी के अनुसार राज्य अब जीबीसी-5 की तैयारी कर रहा है। इस आयोजन से 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की उम्मीद है। यह सफलता उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के और निकट ले जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह योजना अब राज्य की औद्योगिक नीति का प्रतीक बन चुकी है। इसने शासन की सक्रियता, क्षेत्रीय विविधता और निवेशकों के प्रति विश्वास को मजबूती से स्थापित किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हुए निवेशों ने राज्य में मजबूत और समावेशी आर्थिक व्यवस्था की नींव रखी है।
2018 में जीबीसी की शुरुआत के बाद उत्तर प्रदेश ने इसके चार सफल संस्करण आयोजित किए हैं। इनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कुल 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है। जीबीसी-1 में 81 परियोजनाओं से 61,792 करोड़ रुपये का निवेश शुरू हुआ। यह जीबीसी-2 में 290 परियोजनाओं के साथ 67,202 करोड़ रुपये तक पहुंचा। जीबीसी-3 में 1,406 परियोजनाओं से 80,224 करोड़ रुपये का निवेश मिला। जीबीसी-4 में यह आंकड़ा 14,701 परियोजनाओं के साथ 10,01,056 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पैमाना और क्रियान्वयन की गति राज्य की व्यापार आसानी के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।
पिछले चार जीबीसी के मुख्य आकर्षण इस प्रकार हैं:
जीबीसी-1: 61,792 करोड़ रुपये | 81 परियोजनाएं इसने राज्य की औद्योगिक यात्रा की दिशा तय की। प्रमुख परियोजनाएं: • मोबाइल ओपन एक्सचेंज क्लस्टर (वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, गौतम बुद्ध नगर) – 10,000 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक निर्माण क्षेत्र (आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग)। • टेगना इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड – 5,000 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक निर्माण क्लस्टर (ग्रेटर नोएडा)। • वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) – 3,500 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट मुख्यालय और कैंपस। • अदानी पावर – 2,500 करोड़ रुपये की 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन (घाटमपुर से हापुड़ तक)। • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) – 2,300 करोड़ रुपये का नया आईटी/आईटीईएस केंद्र। इन निवेशों ने गौतम बुद्ध नगर को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निवेश का प्रमुख केंद्र बना दिया।
जीबीसी-2: 67,202 करोड़ रुपये | 290 परियोजनाएं दूसरे संस्करण ने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार का रास्ता खोला। • विवो मोबाइल्स – 7,429 करोड़ रुपये का मोबाइल निर्माण संयंत्र। • हायर इंडिया – 2,804 करोड़ रुपये की सीडीआईटी उत्पाद निर्माण इकाई। • टोरेंट गैस प्राइवेट लिमिटेड – 2,751 करोड़ रुपये की पाइप्ड नेचुरल गैस वितरण परियोजना (कई जिलों में)। • ओप्पो मोबाइल्स इंडिया – 2,000 करोड़ रुपये का स्मार्टफोन निर्माण संयंत्र। • सनवोड़ा इलेक्ट्रॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड – 1,500 करोड़ रुपये की लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई। इस चरण ने उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बना दिया।
जीबीसी-3: 80,224 करोड़ रुपये | 1,406 परियोजनाएं तीसरे संस्करण ने डेटा आधारभूत संरचना और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दी। • एनआईडीपी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड – 9,100 करोड़ रुपये का डेटा सेंटर। • सिफी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड – 2,692 करोड़ रुपये का प्रमुख डेटा सेंटर। • अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड – 2,416 करोड़ रुपये का डेटा सेंटर। • एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स एंड क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड – 1,687 करोड़ रुपये का डेटा सेंटर। • फेयरफॉक्स आईटी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड – 1,200 करोड़ रुपये का आईटी और आईटीईएस पार्क। इस संस्करण ने उत्तर प्रदेश को भारत का तेजी से बढ़ता डेटा और डिजिटल केंद्र स्थापित किया।
जीबीसी-4: 10,01,056 करोड़ रुपये | 14,701 परियोजनाएं चौथा संस्करण अब तक का सबसे बड़ा और सबसे विविध रहा, जिसने राज्य भर में औद्योगिक विस्तार को नई ऊंचाई दी। • टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड – 4,174 करोड़ रुपये से आईटीआई केंद्रों का उन्नयन (कौशल विकास मिशन)। • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड – 3,450 करोड़ रुपये से 11 जिलों में सिटी गैस वितरण। • उर्वशी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (डीएलएफ) – 3,400 करोड़ रुपये की आईटी परियोजना (नोएडा)। • सी यू इंटरनेशनल (चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी) – 2,000 करोड़ रुपये का निजी विश्वविद्यालय (उन्नाव)। • एबी मॉरी – 1,677 करोड़ रुपये की यीस्ट निर्माण इकाई (पीलीभीत)। • अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड – 1,500 करोड़ रुपये का हथियार निर्माण संयंत्र (कानपुर)। • शराफ ग्रुप (हिंद टर्मिनल्स) – 1,250 करोड़ रुपये का इनलैंड कंटेनर डिपो (मुरादाबाद)। • फोर्थ पार्टनर एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड – 1,200 करोड़ रुपये का सौर ऊर्जा संयंत्र (झांसी)। • कियान डिस्टिलरीज – 1,200 करोड़ रुपये का पेय निर्माण संयंत्र (गोरखपुर)। • वरुण बेवरेजेज लिमिटेड – 1,071 करोड़ रुपये और 1,053 करोड़ रुपये की परियोजनाएं (गोरखपुर और प्रयागराज)। • वंडर सीमेंट लिमिटेड और श्री सीमेंट नॉर्थ प्राइवेट लिमिटेड – 1,434 करोड़ रुपये के सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट (अलीगढ़ और एटा)। • मून बेवरेजेज, बिंदाल्स पेपर मिल्स, इफको, हल्दीराम, बिकानेरवाला – 510 करोड़ रुपये से 1,071 करोड़ रुपये तक के निवेश (हापुड़, बिजनौर, बरेली, हरदोई और गौतम बुद्ध नगर)। इन परियोजनाओं ने रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक निवेश सुनिश्चित किया। इससे राज्य के विभिन्न जिलों में औद्योगिक विकास को गति मिली।
सतत और समावेशी विकास की दिशा में जीबीसी-5 की तैयारियां तेज हैं। इसका लक्ष्य 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का भूमि पूजन कर मूर्त रूप देना है। निवेश विभाग और इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से राज्य तेज अनुमोदन प्रक्रियाएं, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेशकों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था (निवेश मित्र) जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहा है। 2018 के 61,000 करोड़ रुपये से 2024 के 10 लाख करोड़ रुपये तक की जीबीसी यात्रा उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिवर्तन और निवेशक-अनुकूल नीतियों का जीवंत उदाहरण है।
उत्तर प्रदेश अब न केवल 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, बल्कि समावेशी, सतत और रोजगार-केंद्रित विकास का नया मानक भी स्थापित कर रहा है।
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